अब स्कूली विद्यार्थी भी पढ़ेंगे जियोलॉजी !

जीएसआई ने केंद्र सरकार को लिखा पत्र
-जियोलॉजी को स्कूल स्तर के पाठ्यक्रम में शामिल करने का किया आग्रह
-इसमें है रोजगार की अपार संभावनाएं

By: Krishna Das Parth

Published: 23 Apr 2020, 04:32 PM IST

कृष्णदास पार्थ
कोलकाता. इंजीनियरिंग और मेडिकल के बाद जियोलॉजी ही एकमात्र ऐसा विषय है जिसमें देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी रोजगार की आपार संभावनाएं हैं। मगर, यह विषय अब तक देश की स्कूली शिक्षा में शामिल नहीं हो पाया है। हालांकि इसे स्नातक स्तर पर जरूर पढ़ाया जाता है, लेकिन स्कूली शिक्षा में शामिल नहीं होने के कारण आगे चलकर विद्यार्थियों की संख्या कम हो जाती है। इसके मद्देनजर जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई) ने जियोलॉजी (भूविज्ञान) को देशभर के माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों के पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए केंद्र सरकार से पैरवी की है। इस संदर्भ में जीएसआई ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय को पत्र लिखा है। जिसमें कहा गया है कि सीबीएसई, आईसीएसई और सभी राज्यों के बोर्डों को निर्देश दिया जाए कि जियोलॉजी को एक अनिवार्य विषय के तौर पर पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाए। क्योंकि इस विषय के विद्यार्थियों के क रियर के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी आपार संभावनाएं हैं। जीएसआई सूत्रों के अनुसार मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने भी इसमें रूचि दिखाई है। जिससे यह माना जा रहा है कि जियोलॉजी को बहुत जल्द ही देश के स्कूली पाठ्यक्रमों में शामिल कर लिया जाएगा। इस शिक्षा सत्र से इसे लागू करने की योजना थी, लेकिन कोरोना वायरस के चलते जारी लॉकडाउन इसके राह में रोड़ा बन गया। फिर भी उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इसे देश के स्कूलों के पाठ्यक्रमों में शामिल कर लिया जाएगा।
------------
क्या है जियोलॉजी और क्यों बनाएं करियर -
भूविज्ञान एक मौलिक विज्ञान ही नहीं, बल्कि बहु-अनुशासनात्मक विज्ञान है क्योंकि यह पृथ्वी का अध्ययन करने के लिए भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और गणित के सिद्धांतों का उपयोग करता है। भूविज्ञान का अध्ययन प्रयोगशाला और फील्ड दोनों पर आधारित है। इसमें पृथ्वी की सतह और भीतर होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन कर भूविज्ञानी यह बता सकते हैं कि भूगर्भीय घटनाएं और ग्रह प्रक्रियाएं इस प्लानेट के विकास को कैसे नियंत्रित कर रही हैं। भूविज्ञान चट्टानों और खनिजों की उत्पत्ति और विकास के साथ ही पहाड़ों, घाटियों, पठारों, नदियों, सहित विभिन्न भू-आकृतियों का अध्ययन कर पृथ्वी में छिपे खजानों के बारे में बताता है। यह अतीत के रहस्य उजागर कर कई वनस्पतियों (पौधों) की उत्पत्ति और विकास को समझने में सक्षम बनाता है। यही नहीं भूस्खलन, ज्वालामुखी, भूकंप आदि जैसी कई गतिविधियों पर भी इस विषय के पंडितों की नजर रहती है। भूकंप, भूस्खलन, ज्वालामुखी, ग्लेशियर लेक, आउटबस्र्ट फ्लड (जीएलओएफ) और सुनामी जैसे भूगर्भीय खतरों से होने वाले जोखिम का भी वे मूल्यांकन कर देश में आपदा प्रबंधन योजनाओं को अधिक कुशल तरीके से शामिल करने के लिए सुझाव भी देते हैं।
-------------
कर सकते हैं इंजीनियरिंग जियोलॉजी -
बीएससी या बीएससी ऑनर्स के विद्यार्थी जियोलॉजी को बतौर विकल्प विषय चुन सकते हैं। फिर एमएससी भी किया जा सकता है। मास्टर्स के बाद इंजीनियरिंग जियोलॉजी, मिनरल एक्सप्लोरेशन, पेट्रोलियम एक्सप्लोरेशन, जियो-एन्वायर्नमेंटल इंजीनियरिंग आदि में एम. फिल भी किया जा सकता है।
--
इन संस्थानों में रोजगार के अवसर -
इसके विद्यार्थी एक भूविज्ञानी इंजीनियरिंग और परामर्श फर्मों, सरकारी एजेंसियों, खनन कंपनियों, भूजल एजेंसी, पेट्रोलियम कंपनियों, संग्रहालयों आदि में काम कर सकते है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई), केंद्रीय भूजल बोर्ड, भूविज्ञान और खनन निदेशालय, भारतीय खान ब्यूरो (आईबीएम), रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन समेत ऐसे कई दर्जन देश और विदेश में प्रतिष्ठान हैं, जहां जियोलॉजी के छात्रों के लिए रोजगार के आपार अवसर हैं।
इनका कहना है -
हमने केंद्र सरकार से देश के सभी स्कूलों में जियोलॉजी को अनिवार्य विषय के तौर पर शामिल करने का आग्रह किया है। क्योंकि इस विषय में छात्रों के करियर के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी आपार संभावनाएं हैं।
-आशीष कुमार नाथ, निदेशक और पीआरओ, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई)

Krishna Das Parth Desk
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned