अब एसी ट्वॉय ट्रेन की सवारी करेंगे पर्यटक

तैयारी जोरों पर, इसी साल अप्रैल-मई से होगा आगाज, एसी कोच ट्वॉय ट्रेन का ट्रायल रन सफल

By: Shishir Sharan Rahi

Published: 13 Mar 2018, 08:20 PM IST

कोलकाता/दार्जिलिंग. यूनेस्को वल्र्ड हेरिटेज दर्जा प्राप्त दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे (डीएचआर) के तहत चलाई जाने वाली विश्व प्रसिद्ध सपनों की रानी के नाम से मशहूर ट्वॉय ट्रेन में जल्द ही पर्यटक वातानुकूलित कोच का लुत्फ उठा सकेंगे। इसकी तैयारी इन दिनों जोर-शोर से चल रही है और यदि सबकुछ ठीक रहा तो इसी साल अप्रैल-मई से इसे चालू कर दिया जाएगा। इस बारे में डीएचआर के निदेशक एम नार्जरी ने बताया कि एसी कोच लगाए जाने की योजना है। इसके लिए 2 कोच तैयार हो चुके हैं तथा 2 और तैयार किए जा रहे हैं। एसी कोच लगे ट्वॉय ट्रेन का ट्रायल रन भी कर लिया गया है। डीएचआर के आधिकारिक सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि फिलहाल 2 एसी कोच तैयार हो गए हैं तथा 2 और तैयार किए जा रहे हैं। फिलहाल 3 नॉन एसी कोच के साथ ट्वॉय ट्रेन रोजाना न्यू जलापईगुड़ी (एनजेपी)से दार्जिलिंग आती-जाती है। डीएचआर की ओर से एक नॉन एसी कोच हटाकर एक एसी कोच जोडऩे की योजना है। इसमें जरूरत के मुताबिक डीजल इंजन युक्त चार्टर्ड एसी कोच ट्वॉय ट्रेन भी पर्यटकों को उपलब्ध कराया जा सकता है। एसी कोच युक्त ट्वॉय ट्रेन का किराया तथा इसे किस रूप में चलाया जाएगा, इसपर बाद में फैसला लिया जाएगा। इससे पहले एनएफ रेलवे के जीएम (कंस्ट्रक्शन) नीलेश किशोर प्रसाद ने सोमवार को एसी कोच लगी ट्वॉय ट्रेन से सुकना से दार्जिलिंग तक भ्रमण भी किया था। इस दौरान उन्होंने तीनधरिया वर्कशॉप का जायजा लिया।
---क्या है ट्वॉय ट्रेन?
ट्वॉय ट्रेन के नाम से मशहूर दार्जिलिंग हिमालयी रेल पश्चिम बंगाल में न्यू जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग के बीच चलने वाली एक छोटी लाइन की रेलवे प्रणाली है। इसका निर्माण 1879 और 1881 के बीच किया गया था और इसकी लंबाई 78 किलोमीटर (48 मील है। इसकी ऊंचाई स्तर न्यू जलपाईगुड़ी में लगभग 100 मीटर (328 फीट) से लेकर दार्जिलिंग में 2,200 मीटर (7,218 फीट) तक है। इसकी अनुसूचित सेवाओं का परिचालन मुख्यतया 4 आधुनिक डीजल इंजनों से किया जाता है। कुर्सियांग-दार्जिलिंग वापसी सेवा और दार्जिलिंग से घुम (भारत के सबसे ऊंचे रेलवे स्टेशन) के बीच चलने वाली दैनिक पर्यटन गाडिय़ों का परिचालन पुराने ब्रिटिश निर्मित बी श्रेणी के भाप इंजन, डीएचआर 778 से नियंत्रित किया जाता है। इस टॉय ट्रेन को यूनेस्को की ओर से 1999 में विश्व धरोहर की सूची में नीलगिरि पर्वतीय रेल और कालका शिमला रेलवे के साथ भारत की पर्वतीय रेल के रूप में शामिल किया गया था। इस रेलवे का मुख्यालय कुर्सियांग शहर में स्थित है। यह ट्रेन सिलीगुड़ी से दार्जिलिंग के बीच चलती है। इस रेलवे की खासियत लूप लाइनों का प्रयोग है और इसी रेलवे लाइन पर फिल्म आराधना के प्रसिद्ध गीत ‘मेरे सपनों की रानी’ की शूटिंग हुई थी।
--2010 में बंद हो गई थी ट्रेन
जून 2010 में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-55 पर गयाबाड़ी और कुर्सियांग के बीच पगलाझोरा में भूस्खलन के कारण सिलीगुड़ी और कुर्सियांग के बीच टॉय ट्रेन सेवा बंद कर दी गई थी। भूस्खलन के कारण राजमार्ग का करीब 500 मीटर का हिस्सा और साथ ही राजमार्ग के किनारे का टॉय ट्रेन ट्रैक भी बह गया था।

Shishir Sharan Rahi Reporting
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