विश्वप्रसिद्ध बंगाल का तांत शिल्प गर्दिश में

  • संकट: विलुप्त होने के कागार पर है यह उद्योग
  • कभी बंगाल की छवि को चमकाता था यह शिल्प

By: Rajendra Vyas

Published: 24 Dec 2020, 05:29 PM IST

कृष्णदास पार्थ
कोलकाता. बंगाल का तांत शिल्प उद्योग पहले से ही संकट में था, लेकिन कोरोना महामारी के प्रभाव के कारण यह शिल्प और ज्यादा संकट में आ गया है। इससे जुड़े लोगों का आजीविका भी संकट में है। परिवहन अभी भी पूरी तरह से सामान्य नहीं है। नदिया जिले में शांतिपुर और फुलिया ये दो प्रमुख जगह हैं। शांतिपुर व फुलिया अपने तांत बुनाई उद्योग के लिए राज्य में ही नहीं बल्कि विश्व प्रसिद्ध है। यहां की तांत साडिय़ां देश के विभिन्न प्रांतों के अलावा अमेरिका, मलेशिया और थाईलैंड में निर्यात की जाती हैं।
इस उद्योग से शांतिपुर और फुलिया के 40 हजार से ज्यादा तांती जुड़े हैं जो फिलहाल संकट की स्थिति में हैं, क्योंकि इनके द्वारा उत्पादित साडिय़ों की बिक्री लगभग बंद हो गई है। साहूकार भी बुनकरों को मजदूरी, सूत या बुनाई के उपकरण खरीदने में सहयोग नहीं कर रहे हैं। जिससे इनकी परेशानी काफी बढ़ गई है। इस सिलसिले में बुनकर सायंतन का कहना है कि बुनाई उद्योग ने बंगाल को युगों तक समृद्ध किया है और विदेशों में बंगाल की छवि को चमकाया है। लेकिन आज यह लगभग विलुप्त होने के कगार पर है। मौजूदा स्थिति में बुनकर बेरोजगार हैं। बंगाल में साढ़े छह लाख से अधिक रजिस्टर्ड बुनकरों की दयनीय स्थिति है।
सरकार ने खरीदी कुछ साडिय़ां
बुनकरों की मदद करने के लिए राज्य सरकार ने कुछ दिनों पहले लगभग 25 लाख रुपए की साडिय़ां यहां के बुनकरों से खरीदी है। जिला परिषद की अध्यक्ष रिक्ता कुंडू का कहना है कि राज्य सरकार ने तंतुबाया समिति के माध्यम से सभी बुनकरों से 50-50 साडिय़ां खरीदी है। इससे उनको कुछ मदद मिलेगी। इस पहल की सराहना करते हुए कई बुनकरों ने कहा, "तंतुज से उन्हें जो दाम मिल रहे हैं वह उत्पादन की लागत से थोड़ा कम है, फिर भी उत्पादन जारी रखने के लिए यह अच्छी पहल है।" इस संबंध में तंतुजा के विपणन अधिकारी ने कहा, "राज्य के विभिन्न हिस्सों में तंतुजा शोरूमों की बिक्री बहुत खराब है। विभिन्न छूट के माध्यम से खरीदारों को आकर्षित करने का प्रयास किया जा रहा है।"
शिविर लगेंगे कई स्थानों पर
राज्य के लघु और कुटीर उद्योग मंत्री रत्ना घोष ने कहा, "इस समय विपणन समस्याएं हैं। बुनकरों के घर में भी कपड़े जमा हो रहे हैं। बे बेच नहीं सके । साड़ी सीधे बुनकरों से खरीदी गई। इस तरह के शिविर कई स्थानों पर लगाए जाएंगे।
इनका कहना है
ने कहा, "हम इस पहल का स्वागत करते हैं। बुनाई उद्योग एक संकट में है। तनुजा को सीधे बुनकरों से कपड़े खरीदने का फायदा होगा।
-तारक दास, अध्यक्ष, शांतिपुर वीविंग टेक्सटाइल ट्रेडर्स एसोसिएशन

Rajendra Vyas
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned