अम्फान के बाद बंगाल में मचा हुआ है हाहाकार

चक्रवाती तूफान अम्फान के गुजरने के 48 घंटे बाद भी बंगाल के कई जिलों में हाहाकार मचा हुआ है। बिजली गुल है पेयजल नदारद हो गया है। फोन बंद पड़े हैं, इंटरनेट ठप हो गया है। उखड़े पेड़ों से रास्ते बंद हैं। जल निकासी व्यवस्था ने दम तोड़ दिया है।

By: Paritosh Dube

Updated: 22 May 2020, 07:56 PM IST

कोलकाता. पश्चिम बंगाल में चक्रवाती तूफान अम्फान के कहर से हाहाकार मचा हुआ है। तूफान गुजर जाने के 48 घंटे बाद भी लाखों लोग चारों ओर पानी से घिरे हुए हैं। निकासी व्यवस्था दम तोड़ चुकी है। कहीं कमर तक कहीं छाती तक और कहीं घुटनों तक पानी भरा हुआ है। बंगाल की खाड़ी के तटवर्ती इलाकों और सुंदरवन के दुरूह क्षेत्रों में खारा पानी खड़ी फसलों के खेत में प्रवेश कर चुका है। इसका मतलब फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। मौसम विभाग के अनुसार तूफान की अवधि के कुछ घंटों में महानगर कोलकाता और आसपास औसतन 225 मिलीमीटर पानी गिरा। शहर व आसपास की निकासी व्यवस्था महज 16 से 22 मिलीमीटर बारिश का पानी प्रतिघंटे निकालने की क्षमता वाली है। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि शहर अभी भी जलबंदी क्यों है।
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अम्फान के बाद बंगाल में मचा हुआ है हाहाकार

आम और पान की फसल चौपट
जिलों की बात करेंं तो मालदह, मुर्शिदाबाद, बशीरहाट के आम बागानों में सिर्फ पेड़ बाकी रह गए हैं फल जमींदोज हो चुके हैं। इसका मतलब इस बार मालदह के रसभरे आम बाजारों में न आ पाएंगे। दक्षिण व उत्तर २४ परगना के सभी पान बेड़े (जहां पान की बेलें रोपी जाती हैं) मटियामेट हो चुके हैं। पान की खेती से जुड़े लगभग २ लाख लोग विभीषिका से पीडि़त हुए हैं।

अम्फान के बाद बंगाल में मचा हुआ है हाहाकार

कहीं गुस्सा, कहीं बेबसी
उत्तर व दक्षिण 24 परगना, कोलकाता, हावड़ा, हुगली, पूर्व मिदनापुर समेत कई जिलों के बड़े इलाके बिजली के बिना 48 घंटे गुजार चुके हैं। फोन, इंटरनेट, केबल ठप पड़ा हुआ है। कई जगहों पर लोग स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर गुस्सा निकाल रहे हैं। कई स्थानों पर बेबसी छाई हुई है।
महानगर और आसपास के उपनगरों में ज्यादातर निचले इलाकों के ग्राउंड फ्ïलोर में पानी भर गया है। उनके मोटर पंप पानी में डूबे हुए हैं। घरों में पानी नहीं है।
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सडक़ें बंद, करंट का खतरा
तूफानी हवा जिसकी गति 120 से 135 किलोमीटर तक बताई जा रही है ने बड़े बड़े दरख्त उखाड़ दिए हैं। वृक्षों की शाखाएं, तनों ने भारी भरकम वाहनों को मसल दिया है। बिजली के तारों और खंभो को उखाड़ दिया है। सैकड़ों पेड़ सडक़ों के बीचों बीच पड़े हुए हैं। रास्ता बंद हो गया है। प्रशासन सभी जगह तक नहीं पहुंच पा रहा है। अभी एजेंसियों का ध्यान मुख्य सडक़ों पर है। कई जगहों पर करंट प्रवाहित होने की खबरें भी आ रही हैं। मारे गए 72 लोगों में से कई की मौत बिजली के झटकों से ही हुई है। बिजली कंपनी का अमला कोशिश के बावजूद सभी शिकायतों पर कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। ग्रामीण इलाकों में हजारों कच्चे घर धराशायी हो गए हैं। टीन, सीमेंट, प्लास्टिक की चादरों वाले शेड नेस्तनाबूद हो गए हैं। १ हजार से ज्यादा मोबाइल टॉवर और हजारों बिजली के खंभे तूफान की गति के आगे झुक गए हैं। अम्फान को गए ४८ घंटे होने वाले हैं। उसकी स्याह तस्वीरें अभी भी बंगाल के कई जिलों में देखी जा रही हैं।

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Paritosh Dube Desk
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