हमारी थाली से दूर हो रहा आलू

सब्जियों का राजा आलू अब आम आदमी की थाली से दूर होने लगा है। देश के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक राज्य पश्चिम बंगाल से लेकर अन्य राज्यों में इसके दाम गत दो महीने में लगभग दोगुने हो गए हैं। जून महीने तक आलू 20 से 25 रुपए किलो बिक रहा था। सितम्बर आते ही इसके दाम 34 से 50 रुपए तक पहुंच गए।

By: Rabindra Rai

Published: 16 Sep 2020, 04:39 PM IST

महंगाई: दामों में दोगुना इजाफा, बढऩे लगी परेशानी
रवीन्द्र राय
कोलकाता. सब्जियों का राजा आलू अब आम आदमी की थाली से दूर होने लगा है। देश के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक राज्य पश्चिम बंगाल से लेकर अन्य राज्यों में इसके दाम गत दो महीने में लगभग दोगुने हो गए हैं। जून महीने तक आलू 20 से 25 रुपए किलो बिक रहा था। सितम्बर आते ही इसके दाम 34 से 50 रुपए तक पहुंच गए। इससे आम आदमी की परेशानी बढऩे लगी है। महानगर के एक बाजार में आलू खरीदने के बाद सुरेश दास ने बताया कि हम निम्न मध्यम वर्ग के लोगों के घर का बजट बिगडऩे लगा है। टमाटर समेत अन्य कुछ हरी सब्जियां पहले से महंगी थी, अब आलू के दाम बढ़ जाने से हम मुश्किल में पड़ते जा रहे हैं। आलू ही आम आदमियों का सहारा है। यह पीड़ा किसी एक सुरेश की नहीं है, देश के लगभग हर शहर में महंगाई बढ़ जाने से आम लोगों की हालत खराब होने लगी है। राज्य सरकार का मानना है कि आलू का कृत्रिम संकट है। इस साल राज्य में करीब ९० लाख टन आलू का उत्पादन हुआ है, जबकि राज्य में वार्षिक खपत करीब ६० लाख टन है।
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दाम बढऩे के कारण
विशेषज्ञ कहते हैं कि आलू की कीमतों में तेजी की वजह उत्पादन में कमी नहीं हो सकती है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2019-20 के दौरान देश में आलू का उत्पादन 513 लाख टन हुआ। कुछ का दावा है कि ज्यादा मुनाफा कमाने के मकसद से मंडियों में आलू की आपूर्ति कम की जा रही है, जबकि कुछ कारोबारी कहते हैं बारिश और बाढ़ भी वजह हो सकती हैं। बंगाल के व्यापारियों ने आलू के दाम में तेजी के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम में हाल में किए गए संशोधन को जिम्मेदार बताया है, क्योंकि इसमें एक राज्य से दूसरे राज्य को माल भेजने की बाधा खत्म हो गई है। व्यापारियों का कहना है कि थोक मंडियों में दैनिक आवक का 15 से 20 प्रतिशत माल पड़ोसी राज्यों को चला जा रहा है। इस कारण स्थानीय बाजार में आलू चढ़ गया है।
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नई फसल आएगी मिलेगी राहत
व्यापारियों के अनुसार, जब तक नया आलू बाजार में नहीं आता तब तक कीमतें कम नहीं होंगी। देश में आलू का उत्पादन ज्यादातर रबी सीजन में होता है लेकिन कुछ इलाकों में खरीफ सीजन में आलू की पैदावार होती है। पंजाब से आलू की फसल अक्टूबर में तथा उत्तर प्रदेश से नवबर में आलू की फसल आनी शुरू होगी।
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आलू उत्पादक प्रमुख राज्य
आलू उत्पादन में उत्तर प्रदेश पहले पायदान पर तो पश्चिम बंगाल दूसरे पर है। उत्तर प्रदेश में सालाना 150 लाख टन तथा बंगाल में 110 लाख टन आलू का उत्पादन होता है। इसके अलावा बिहार, गुजरात तथा मध्य प्रदेश आलू उत्पादक प्रमुख राज्य हैं।
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कोल्ड स्टोरेज
कोल्ड स्टोरेज के मालिक राजेश बंसल ने बताया कि किसान आमतौर पर मार्च- अप्रेल में आलू को कोल्ड स्टोरेज में रख देते हैं। बंगाल में कुल 585 कोल्ड स्टोरेज हैं, इनमें से 483 आलू को रखने के लिए हैं। इस साल 440 कोल्ड स्टोरेज में करीब 55 लाख टन आलू को रखा गया है। कोल्ड स्टोरेज से हर माह करीब 5 लाख टन आलू की आपूर्ति मंडियों में की जाती है
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इनका कहना है
आलू के बढ़ते दामों पर राज्य सरकार की नजर है। कीमतों पर काबू रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज पर नजर रखी जा रही है। कोल्ड स्टोरेज और बाजारों का औचक जायजा लिया जा रहा है।
फिरहाद हकीम, शहरी विकास मंत्री, बंगाल

Rabindra Rai Editorial Incharge
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