राहुल ने मोदी पर किया वार, चाय पर चर्चा करते हैं, पर चायबागान मजदूरों की बात नहीं करते पीएम    

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने चाय बागानों में कथित भुखमरी के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर जम कर वार किया

By: Paritosh Dube

Published: 16 Dec 2015, 11:40 PM IST

दिल्ली/कोलकाता कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने पश्चिम बंगाल के चाय बागानों में कथित भुखमरी के मुद्दे पर बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर जम कर वार किया, पर उन्होंने राज्य की ममता सरकार पर चुप्पी साधे रखी। केन्द्र से फरियाद करने दिल्ली के जंतर मंतर पहुंचे चाय बागान मजदूरों को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री चाय पर चर्चा करते हैं, लेकिन चायबागान में काम करने वालों की उन्हें फिक्र नहीं है। दु:ख की बात है कि वे चाय पीते हैं, लेकिन सभी को चाय देने वालों के बारे में वे बात नहीं करते। 
केन्द्र सरकार की निंदा करते हुए उन्होंने कहा कि बुलेट ट्रेन चलाने और विकास की बात होती है, लेकिन जो लोग देश को अपना खून पसीना देते हैं, उनकी बात नहीं की जाती। हम राज्य और केन्द्र सरकार से कहना चाहते हैंं कि इनके (चाय बागान मजदूरों के) लिए कुछ करें। इनका विकास करे, ताकि भूख से इनकी मौत नहीं हो। हमें ऐसा हिन्दुस्तान नहीं चाहिए, जहां पर लोग भूख से मरते हैंं। हालांकि उन्होंने ममता बनर्जी की सरकार के खिलाफ कुछ भी नहीं कहा। 
इससे पहले राहुल गांधी ने राज्य सरकार से नाउम्मीद हो कर गत 27 नवम्बर से जंतर-मंतर में धरने पर बैठे चायबागान के मजदूरों से मुलाकात की और उनका हालचाल पूछा। चायबागान के मजदूरों ने उन्हें बताया कि केन्द्र और राज्य सरकार की उदासीनता के कारण चायबागान के मजदूर दूसरे राज्यों में पलायन कर रहे हैं और जो लोग कहीं जाने के लायक नहीं रह गए हैं, वे इलाज के बिना कुपोषण और भूख जनित बीमारियों से मर रहे हैं। 
 छोटे-छोटे आमलासोल बन गए हैं चायबागान- अधीर
भले ही ममता सरकार पर राहुल गांधी चुुप रहे, लेकिन पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने केन्द्र और बंगाल सरकार दोनों पर जम कर वार किया। उन्होंने कहा कि बंगाल के चायबागान छोट-छोटे आमलासोल बन गए हैंं। चायबागानों में खाना नहीं है। बिजली, पानी और चिकित्सा की व्यवस्था नहीं है। अभाव में मजदूरों की मौत हो रही है और राज्य सरकार यह मानने ो तैयार नहीं कि चायबागान के मजदूर भूख के कारण मर रहे हैं। इनका ख्याल रखने का काम केन्द्र सरकार का है और केन्द्र की योजनाओं को लागू करना राज्य के श्रम विभाग का काम है, लेकिन दोनों सरकारें कुछ नहीं कर रही हैंं। उल्लेखनीय है कि वाम मोर्चा के शासनकाल में पश्चिम मिदनापुर के आमलासोल इलाके में भूख से कुछ लोगों की मौत हुई थी। अनाज नहीं मिलने पर मजबूर होकर आदिवासियों ने चींटी के अण्डे वगैरह खाया था।  
 राष्ट्रपति से लगाई गुहार 
प्रदेश कांग्रेस प्रतिनिधि दल ने इस दिन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से मुलाकात की और उन्हें ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन मेंं प्रदेश कांग्रेस ने राष्ट्रपति से राज्य के चायबागान मजदूरों की समस्याएं सुलझाने और इनका जीवन स्तर बेहतर करने में मदद की गुहार लगाई।  
एक और चाय बागान मजदूर की मौत
राज्य सरकार की ओर से चायबागानों में भुखमरी से इनकार करने के दूसरे दिन कुपोषण जनित बीमारी के कारण बुधवार को चायबागान के एक और मजदूर की मौत हो गई। उसका नाम संजय लोहार है। 
संजय लोहार अलीपुरदुआर स्थित डनकन समूह के डिमडिमा चायबागान का स्थाई श्रमिक था। वह कई दिनों से बीमार था। लोहार के परिवार वालों ने आरोप लगाया कि चायबागान में बंद जैसी स्थिति है। आर्थिक अभाव में हम इलाज नहीं करा सके। इस कारण संजय की मौत हो गई। 
इसके साथ ही पिछले 72 घंटे में अभाव में दम तोडऩे वाले राज्य के विभिन्न चायबागानों के मजदूरों की संख्या बढ़ कर छह हो गई है। इससे पहले गत रविवार और सोमवार को पांच चायबागान मजदूरों की मौत हुई थी। 

Paritosh Dube Desk
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