रंग-रंगीलो राजस्थान का स्थापना दिवस आज

22 रियासतों को मिलाकर बना था राजस्थान संघ----महानगर में होंगे विविध कार्यक्रम------‘राजस्थान है धडक़न और राजस्थान ही है पहचान’-----राजस्थान दिवस की पूर्व संध्या पर पत्रिका के साथ बातचीत में बोले प्रवासी राजस्थानी

By: Shishir Sharan Rahi

Updated: 29 Mar 2019, 10:39 PM IST

कोलकाता . 22 रियासतों को मिलाकर बनी आन-बान-शान की धरा मरूधरा का स्थापना दिवस ३० मार्च को मनाया जाएगा। 30 मार्च, 1949 में जोधपुर, जयपुर, जैसलमेर और बीकानेर रियासतों का विलय होकर वृहत्तर राजस्थान संघ बना था और तब से यही राजस्थान की स्थापना का दिन माना जाता है। राजस्थान दिवस पर महानगर में विविध कार्यक्रम होंगे। इसके तहत कविगुरु रवीन्द्रनाथ टैगोर के एक दर्जन गीतों का राजस्थानी भाषा में काव्यानुवाद कर पहली बार 30 मार्च को राजस्थान दिवस पर प्रस्तुत किया जाएगा। राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी आईसीसीआर के सत्यजीत के ऑडिटोरियम (टाटा सेंटर के पास) में इस कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे। अपने पैतृक स्थान से हजारों किलोमीटर दूर कोलकाता में बरसों से निवासरत विभिन्न प्रवासी राजस्थानियों ने राजस्थान दिवस की पूर्व संध्या पर शुक्रवार को पत्रिका संवाददाता के साथ बातचीत में अपनी प्रतिक्रिया और सुझाव दिए। लगभग सभी ने कमोबेश एक मत से खुद को राजस्थानी होने पर गर्व महसूस करते हुए कहा कि राजस्थान है मेरी धडक़न और राजस्थान ही है हमारी पहचान।
--------------------------------------

एक राजस्थानी होने पर मुझे बहुत गर्व है। राजस्थान दिवस पर इस गीत से बधाई देना चाहता हूं.....हमारा प्यारा सा राजस्थान, इसकी अलबेली सी शान, राजधानी जयपुर इसकी, गुलाबी रंग जिसकी पहचान, रंग बिरंगी पगड़ी पहने समझे जिसको अपनी ये आन। राजस्थान, भारत के सबसे खूबसूरत राज्यों में से एक है। यहां की संस्कृति दुनिया भर में मशहूर है। आज भी जब कभी राजस्थान का नाम लिया जाता है तो हमारी आखों के आगे थार रेगिस्तान, ऊंट की सवारी, घूमर और कालबेलिया नृत्य और रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधान आते हैं। अपने सभ्य स्वभाव और शालीन मेहमाननवाज़ी के लिए जाना जाता है हमारा राज्य।

----ओमप्रकाश रूईया, जनरल सेक्रेट्री, एसवीएस मारवाड़ी हॉस्पिटल.

----------------
राजस्थान के गठन के ७० साल पूरे हो गए, जो काफी हर्ष का विषय है। बतौर राजस्थानी मुझे इसके लिए खुशी तो है, पर राजस्थानी भाषा को आजादी के ७२ साल बाद भी आजतक मान्यता न मिलना दुखद है। किसी भी देश-प्रदेश के विकास में वहां की भाषा-संस्कृति का अहम रोल होता है। भाषा का नष्ट होना भविष्य को खत्म करना है। जब बंगाल, केरल, तमिलनाडु में लोकल भाषा में पढ़ाई हो सकती है, तो फिर राजस्थानी भाषा में राजस्थान में क्यों नहीं? सबसे दुखद पहलू यह है कि राजस्थान के जो भी मंत्री, सांसद हैं वे राजस्थानी भाषा को मान्यता दिलाने में पूर्णतया विफल साबित हुए। जब भी मरूधरा निवासी आपस में मिलें, अपनी भाषा में बात करें ताकि इसका प्रचार-प्रसार हो सके। -----प्रहलाद राय गोयनका, सचिव गंगा मिशन

-----------------
राजस्थान के कण-कण में उद्यमशीलता और देशप्रेम भरा है। इसकी केवल भौगोलिक सीमा ही नहीं, बल्कि यह एक सांस्कृतिक इकाई भी है। राजस्थान का नाम लेते ही शूरता-वीरता-त्याग की छवि के रूप में शूरवीर महाराणा प्रताप, दुर्गादास राठौड़ का चेहरा नजर आता है। हाड़ीरानी के बलिदान, चित्तौडग़ढ़ की रानी पद्मावती के जौहर सहित भामाशाह आदि की गाथाओं से इतिहास के पन्ने भरे हैं। सबसे दुखद बात यह है कि राजस्थान की मायड़ भाषा सरकारी उपेक्षा की शिकार हुई है। राजस्थान दिवस पर जागरूक प्रवासी राजस्थानियों की यही मांग है कि इस भाषा को मान्यता दी जाए।

-----रतनशाह, अध्यक्ष राजस्थानी प्रचारिणी सभा.
------------

पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान में काफी विकास हुआ है परन्तु अभी भी काफी कुछ करने की जरुरत है विशेष रूप से यातायात क्षेत्र में। आज भी तारानगर, नोहर, भादरा जैसे सैकड़ों शहर मूलभुत सुविधायुक्त होते हुए भी रेल से वंचित है। सरकारें आती है और चली जाती हैं पर इन क्षेत्रों को रेल मार्ग से जोडऩे के प्रति सबका उदासीन रवैया रहा है।

---ज्योतिषाचार्य डॉ. राकेश व्यास
तारानगर-कोलकाता

------------------------------------
शिक्षा में राजस्थान पिछले एक दशक से इस क्षेत्र में काफी उन्नतशील रहा है किन्तु काफी क्षेत्रो में विरोधाभाष भी साफ नजर आता है। आज भी राज्य के काफी क्षेत्रों, छोटे नगरों में शिक्षा की हालत दयनीय है। जगह-जगह छोटे निजी विद्यालय खुले हैं, जहां 2-3 क्लास के छात्रों को एक ही क्लास में शिक्षा दी जाती है। ग्रामीण-छोटे नगरों में आधुनिक शिक्षा पद्धति में सुधार करने की आवश्कता है।

-----आरके. जोशी, शिक्षक
----------------

राजस्थान वीरों और कर्मशील लोगों की जन्मभूमि रही है। यहां के लोग दृढ़ निश्चयी, कर्मशील और इतिहास रचने वालों में रहे है। विपरीत भौगोलिक परिस्थितियों के बीच भी राजस्थान ने एक गौरवशाली इतिहास रचा है। आज राजस्थान में नए युग से अप्रवासी राजस्थानियों को बहुत सारी आशा है और राजस्थान इन आशाओं को पूरा करेगा यह दिखता है।
---जेठमल रंगा, संस्थापक रामदेव बाल मंडल, दर्पनारायण टैगोर स्ट्रीट.

------ शौर्य और भक्ति की भूमि राजस्थान में उद्योग, पर्यटन, शिक्षा क्षेत्र में उन्नत करने की संभावनाएं हैं। हर गांव में बिजली-सडक़ के जुड़ाव से राजस्थान का विकास तेजी से होगा। राजस्थानियों में ईमानदारी, कठिन परिश्रम व देशभक्ति की भावना कूट-कूट कर भरी है।

--- सीए विनोद अग्रवाल (मोटिवेशनल गुरु)

-------------
राजस्थान भारत का महत्वपूर्ण राज्य है। राजा-महाराजाओं का प्रदेश रह चुका राजस्थान अपने शाही भव्यता के लिए पूरी दुनिया में विख्यात है। लिंगानुपात में पिछले 4 सालों में काफी सुधार हुआ है। राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में सुधार करने की अभी भी काफी आवश्यकता है। विशेष तौर पर लड़कियों की शिक्षा पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।

----धर्मेन्द्र अग्रवाल (हुगली अग्रवाल सम्मेलन)

स्ह्लशह्म्4 ष्टशस्रद्ग : ष्ट-२२-्य्य७-४६८६८

जोड़---राजस्थान दिवस प्रतिक्रिया...

राजस्थान हमारी जन्मभूमि है, जिसपर हमें गर्व है। कोलकाता सहित बंगाल के विभिन्न स्थानों में आज प्रवासी राजस्थानी अपने मेहनत, लगन, ईमानदारी और मधुर व्यवहार के बल पर हर क्षेत्र में पताका लहरा रहे। खासकर राजस्थान पत्रिका जिस तरह प्रवासी राजस्थानियों के हर क्षेत्र से संबंधित विषयों को प्रमुखता से उजागर करता है, उसकी जितनी सराहना की जाए कम है। १९३९ में स्थापना के बाद से पश्चिम बंग प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन आज १७ प्रदेशों में सक्रिय है। बंगाल के 12 जिलों में सम्मेलन की शाखा मजबूत हुई है। ----नंदकिशोर अग्रवाल, अध्यक्ष पश्चिम बंग प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन
-------------------

वीरों, कर्मयोगियों का प्रदेश है राजस्थान। देश के विभिन्न प्रांतों के अलावा विश्व में जहां-जहां भी प्रवासी राजस्थानी हैं अपने-अपने क्षेत्र में शिखर पर हैं। प्रवासी राजस्थानी भले ही हजारों किलोमीटर दूर रहते हों, पर अपनी माटी से हमेशा जुड़े रहते हैं। यह बेहद खुशी की बात है कि अब राजस्थान का हर क्षेत्र में विकास होने के कारण वहां से पलायन की संख्या में काफी कमी आई है। राजस्थान दिवस पर सभी प्रवासी राजस्थानियों को बहुत-बहुत बधाई। ----संतोष सर्राफ, अध्यक्ष अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मलेन
----------------------------

राजस्थानी हमेशा सभ्यता-संस्कृति सिखाते हैं। अपने रंग-रंगीले और मिलनसार व्यवहार के कारण विदेशी भी यहां आकर घुल-मिल जाते हैं। सैलानियों के दिलों में राजस्थानी अमिट छाप छोड़ जाते हैं। खासकर यहां के लजीज व्यंजन----दाल, बाटी, भुजिया, नमकीन और चूरमे के स्वाद का कोई जवाब नहीं।
लंहगा, चोली, चूनर, पगड़ी है यहां की शान।

----बनवारी लाल सोती, समाजसेवी-उद्योगपति
-------------------------------------------------

कर्मभूमि भले ही कोलकाता है, पर मन हमेशा अपनी माटी की खुशबू से जुड़ा रहता है। न केवल देश, बल्कि विदेशों में भी अपनी आन-बान-शान और पधारो म्हारो देश..की संस्कृति के लिए मशहूर राजस्थान की मूल निवासी होने पर मुझे अभिमान है। जहां बात सभ्यता और सुंदरता को एक साथ जोडऩे की हो तो राजस्थानी कपड़ों के आगे कुछ नहीं टिकता। महिलाओं के लिए पारंपरिक राजस्थानी कपड़े सभ्य, सुंदर और आरामदायक होते हैं। यहां की महिलाएं पारंपरिक घाघरा, चोली और ओढऩी पहनती हैं।
----स्वाति सर्राफ, युवा उद्योगपति

 

 

Shishir Sharan Rahi Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned