‘शिव से सीखें दाम्पत्य जीवन’

‘शिव से सीखें दाम्पत्य जीवन’

Shishir Sharan Rahi | Updated: 20 Dec 2018, 09:24:45 PM (IST) Kolkata, Kolkata, West Bengal, India

नया मंदिर में राम सेवा समिति ट्रस्ट की रामकथा

हावड़ा. संसार में दाम्पत्य जीवन के बारे में अगर सीखना है तो शिव से सीखें। शिव जैसा गृहस्थ कोई नहीं। बांधाघाट के सेठ बंशीधर जालान स्मृति नया मंदिर में राम सेवा समिति ट्रस्ट (हावड़ा) की ओर से आयोजित नवदिवसीय रामकथा के पंचम दिन पं. शम्भू शरण लाटा ने गुरुवार को यह उद्गार व्यक्त किए। लाटा ने कहा कि शिव पूजन से हमको शिक्षा, जीने की प्रेरणा मिलती है। शंकर परिवार में सबसे छोटा चूहा है जो गणेश का वाहन है जबकि गणपति खुद विशालकाय। शंकर के गले, माथे, कमर और हाथों में सांप है और एक सांप कई चूहों को खा सकता है लेकिन यहां एक चूहा कई सांपों के बीच सुरक्षित है। सांप चूहे को खाता है शेर गाय-बैल को देखते ही खा जाता है। पार्वती का वाहन शेर और शंकर का वाहन नंदी बैल। ये जन्मजात शत्रु एक जगह रहते हैं लेकिन आपस में कोई बैर नहीं करते। इसलिए शिव यह प्रेरणा देते हैं कि जीवन ऐसा होना चाहिए। केवल जलाभिषेक और हर-हर महादेव के जयकारे लगाने से कुछ नहीं होने वाला, बल्कि शिव के स्वरुप से हमें शिक्षा लेनी चाहिए। लाटा ने ...राम तुम बड़े दयालु हो.... भजन सुनाकर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर किया। राम विवाह के बाद अयोध्या में आनन्द प्रसंग का उन्होंने उल्लेख किया। कैकेयी प्रसंग, राम वनवास, दशरथ प्रयाण आदि प्रसंग पर श्रद्धालु भावुक हुए। लाटा ने कहा कि भगवान को पकडऩा चाहते हो तो भगवान से कोई सम्बंध जोड़ लो। बिना सम्बंध के ईश्वर से प्रेम नहीं होता, क्योंकि हम प्रभु के और भगवान हमारे हैं। उन्होंने राम की बाल लीला का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान से सम्बंध जोडऩे में न किसी विद्या की आवश्यकता है और न बुद्धि की, लेकिन भीतर की शुद्धि नितांत जरुरी है। जिसका चित्त शुद्ध नहीं वह भगवान को अपना मान नहीं सकता। लाटा ने राम के विद्यार्जन का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि विद्या व्यक्ति को झुकना सिखाती है। समय के साथ विद्या का जो स्तर गिरा है उसी का परिणाम है कि आज माता-पिता-गुरु के प्रति लोगों में सम्मान की भावना घटती जा रही। जिसने माता-पिता की सेवा नहीं की वो गुरु की सेवा क्या करेगा? उन्होंने आज शिक्षा के बदलते स्तर पर खेद जताते हुए कहा कि आधुनिकता के चक्कर में हम पाश्चात्य सभ्यता, संस्कृति और भाषा का अनुसरण कर रहे हैं जिससे बचने की जरुरत है। गंगा किनारे चल रही इस रामकथा में सर्दी के बावजूद कथा श्रवण को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।

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