बागी नेता शुभेंदु अधिकारी ने विधायक पद से दिया इस्तीफा

तृणमूल कांग्रेस के बागी और कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा सचिव को अपना इस्तीफा सौंपा। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि सचिव को सौंपा इस्तीफा स्वीकार्य नहीं है। इस पर उनके करीबी ने कहा कि स्पीकर चाहेंगे तो शुभेन्दु दुबारा विधानसभा जाकर अपना इस्तीफा दे आएंगे।

By: Rabindra Rai

Published: 16 Dec 2020, 11:06 PM IST

सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को लगा बड़ा झटका
शाह के बंगाल दौरे या पहले शुभेन्दु के भाजपा में शामिल होने के आसार
कोलकाता. तृणमूल कांग्रेस के बागी और कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा सचिव को अपना इस्तीफा सौंपा। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि सचिव को सौंपा इस्तीफा स्वीकार्य नहीं है। इस पर उनके करीबी ने कहा कि स्पीकर चाहेंगे तो शुभेन्दु दुबारा विधानसभा जाकर अपना इस्तीफा दे आएंगे। इस बीच बदले की राजनीति के तहत झूठे मामलों में फंसाने की आशंका के मद्देनजर शुभेन्दु ने राज्यपाल जगदीप धनखड़ को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है।
पूर्व मेदिनीपुर जिले में नंदीग्राम निर्वाचन क्षेत्र से विधायक शुभेंदु अधिकारी ने पिछले महीने राज्य मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। वह पिछले कुछ समय से पार्टी नेतृत्व से दूरी बरत रहे थे। उनके इस कदम को सत्तारूढ़ तृणमूल के लिए बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है। कई बार पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली के खिलाफ तल्ख तेवर दिखा चुके शुभेंदु ने हाल ही में सिंचाई और परिवहन मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा था कि पार्टी में योग्य लोगों को दरकिनार किया जा रहा है। अब खबर है कि गृहमंत्री अमित शाह के बंगाल दौरे के दौरान या एक दिन पहले शुभेन्दु भाजपा में शामिल हो सकते हैं। भाजपा उपाध्यक्ष मुकुल रॉय ने इस्तीफे के बाद कहा है कि उन्होंने शुभेंदु को कहा था कि टीएमसी छोड़ देंगे तो ज्यादा खुश रहेंगे। रॉय ने उनके फैसले का स्वागत किया है।
टीएमसी के लिए शुभेंदु का जाना तगड़ा झटका इसलिए है क्योंकि वो ऐसे नेताओं में से हैं, जिनकी जमीनी स्तर पर पकड़ खासी मजबूत है। उन्होंने 2007 मेंजमीन अधिग्रहण को लेकर आंदोलन किया था। जिनकी वजह से 2011 में वाममोर्चा सरकार की हार की राह आसान हुई थी।
शुभेंदु के भाजपा में शामिल होने की अटकलों के बीच राज्य के शहरी विकास मंत्री फिरहाद हकीम ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि वे क्या करेंगे। हम गांधीवाद के साथ बड़े हुए हैं और हम इसे जारी रखना चाहते हैं। मुझे विश्वास नहीं है कि वह ऐसा कुछ भी करेंगे।
तृणमूल प्रमुख के कभी बेहद करीबी रहे शुभेन्दु ने अपना इस्तीफा शाह के बंगाल दौरे से पहले दिया है। माना जा रहा है कि वह टीएमसी के कई नेताओं को बीजेपी में शामिल कराएंगे। वे भी बीजेपी का हिस्सा बनेंगे और शाह के साथ आगामी बंगाल चुनाव की रणनीति में शामिल होंगे। केंद्रीय गृह मंत्री 19-20 दिसंबर को दो दिन के लिए बंगाल दौरे पर आ रहे हैं। डेढ़ महीने के अंदर यह शाह का दूसरा बंगाल दौरा है।
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पूर्व मिदनापुर शुभेंदु का गढ़
बंगाल दौरे के दौरान अमित शाह पूर्व मिदनापुर समेत तीन जिलों में रैली करेंगे। पूर्व मिदनापुर को शुभेंदु का गढ़ माना जाता है। यहां से उनके पिता और दो भाई दो लोकसभा सीट और एक विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। शुभेंदु नंदीग्राम सीट से विधायक हैं। कहा जा रहा है कि वे गुरुवार को बीजेपी नेतृत्व से बातचीत के लिए दिल्ली जा सकते हैं। इससे पहले मंगलवार को बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने उनको कॉल करके जन्मदिन की बधाई दी। इससे अटकलें और तेज होने लगीं। शुभेंदु की सुरक्षा बढ़ाकर जेड केटेगरी कर दी गई है।
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इलाके के कद्दावर नेता
शुभेंदु अधिकारी टीएमसी में पार्टी प्रमुख के बाद सबसे लोकप्रिय और कद्दावर नेता हैं। वह कभी सीएम के दाहिने हाथ माने जाते थे। पार्टी के साथ शुरुआती दौर से ही जुड़े हैं। दक्षिण बंगाल के इलाकों में इनका काफी प्रभाव माना जाता है। शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल में तृणमूल के लोकप्रिय चेहरे रहे हैं। उनका परिवार भी बंगाल की राजनीति में अच्छा खासा दखल रखता है।
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नाराजगी की वजह
शुभेंदु अधिकारी राज्य मंत्रिमंडल में नंबर दो के मंत्री कहे जाते थे, लेकिन पिछले कुछ समय से जैसे-जैसे अभिषेक बनर्जी का राजनीति में उदय होने लगा, शुभेंदु का कद घटने लगा। शुभेंदु इसी बात से नाराज थे। हालांकि खबर यह भी है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी के लिए रणनीति तैयार कर रहे प्रशांत किशोर और उनकी एजेंसी की दखलअंदाजी शुभेंदु को रास नहीं आ रही है।

Rabindra Rai Editorial Incharge
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