अस्पतालों पर नियामक आयोग का चलने लगा डंडा

पश्चिम बंगाल चिकित्सकीय अधिष्ठान नियामक आयोग (डब्ल्यूबीसीईआरसी) ने दोषी पाए जाने वाले अस्पतालों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। आयोग ने किसी अस्पताल में गलत ऑपरेशन तो किसी अस्पताल में अधिक बिल लिए जाने पर कार्रवाई की है। आयोग ने सॉल्टलेक स्थित एक निजी अस्पताल को एक गंभीर चिकित्सा लापरवाही के लिए दोषी करार दिया है।

By: Rabindra Rai

Published: 16 Sep 2020, 04:21 PM IST

कार्रवाई: कहीं गलत ऑपरेशन तो कहीं अधिक बिल पर कार्रवाई
मरीजों की शिकायत पर चिकित्सकीय अधिष्ठान नियामक आयोग सख्त
कोलकाता. पश्चिम बंगाल चिकित्सकीय अधिष्ठान नियामक आयोग (डब्ल्यूबीसीईआरसी) ने दोषी पाए जाने वाले अस्पतालों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। आयोग ने किसी अस्पताल में गलत ऑपरेशन तो किसी अस्पताल में अधिक बिल लिए जाने पर कार्रवाई की है। आयोग ने सॉल्टलेक स्थित एक निजी अस्पताल को एक गंभीर चिकित्सा लापरवाही के लिए दोषी करार दिया है। साथ ही अस्पताल की सिलीगुड़ी शाखा पर भी लापरवाही बरतने के लिए 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। उत्तर 24 परगना जिला के श्यामनगर के 52 वर्षीय समीर देबनाथ ने आयोग से शिकायत की थी कि दिसंबर 2019 में हर्निया का ऑपरेशन करवाने के लिए साल्टलेक के अस्पताल में भर्ती हुए थे। उन्हें दाहिनी ओर ऊपरी जांघ और कमर के क्षेत्र में हर्निया का ऑपरेशन करवाना था लेकिन, अस्पताल के डॉक्टर ने बाईं ओर ऑरेशन कर दिया।
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अन्य अस्पताल में भी लापरवाही
आयोग ने कोलकाता के ढाकुरिया स्थित एक अन्य अस्पताल को चिकित्सा में लापरवाही के दोषी करार दिया है। हृदय रोग के रोगी ने शिकायत की थी कि एनजीओ प्लास्टिक सर्जरी के दौरान लापरवाही होने के कारण उसके भीतरी अंगों से खून बह रहा है। रोगी को बाईपास सर्जरी की आवश्यकता थी, लेकिन अस्पताल में कार्डियोथोरेसिक संवहनी सर्जन नहीं था। रोगी पक्ष ने रोगी को दूसरे अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया। अस्पताल के अधिकारियों ने दावा किया है कि उन्होंने परिवार के सदस्यों को बताया कि वे कार्डियोथोरेसिक संवहनी सर्जन की व्यवस्था करेंगे, लेकिन रोगी पार्टी ने इंतजार नहीं किया।
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अतिरिक्त एक लाख मांगने का आरोप
आयोग के अनुुसार एक मरीज ने महानगर के निजी अस्पताल के डॉक्टर पर बेहतर इलाज के लिए एक लाख रुपए अतिरिक्त धनराशि मांगने का आरोप लगाया है। आयोग ने अस्पताल को इस घटना के संबंध में एक हलफनामा दायर करने के लिए कहा है। मरीज ने अस्पताल को 3.74 लाख रुपए का भुगतान किया था। आयोग ने हावड़ा के एक अस्पताल को भी चेतावनी दी है। बीरभूम के एक मरीज के परिजनों ने आरोप लगाया कि बिल का भुगतान देर से करने के कारण शव देर से दिया। अस्पताल ने दावा किया कि परिजनों के अनुरोध पर ऐसा किया गया।

Rabindra Rai Editorial Incharge
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