अभी अवतारों से नहीं संस्कारों से काम होगा- पुंडरीक गोस्वामी

- विधान गार्डन में श्रीमद भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ शुरू

- श्री हरि सत्संग समिति कोलकाता का आयोजन

By: Renu Singh

Updated: 03 Jan 2020, 04:36 PM IST

कोलकाता
वर्तमान स्थिति को देखकर उद्धव ने भगवान से प्रश्न किया कि एक रावण आया तो आप राम बनकर पैदा हुए, एक हिरण्यकश्यप आया तो आपने नृसिंह बनकर प्रह्लाद का उद्धार किया। एक कं स आया तो आपने कृष्ण बनकर सबका उद्धार किया। वर्तमान समय में मुझे लगता है सारे एक साथ आ गए हैं ऐसे में भगवान आप कितने अवतार लेंगे? तो भगवान ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि वर्तमान समय में अवतारों से नहीं संस्कारों से काम चलेगा। गुरुवार को उल्टाडांगा स्थित विधान गार्डन बैंक्वेंट में कथा वाचक पुंडरीक गोस्वामी ने यह उद्गार व्यक्त किए। श्री हरि सत्संग समिति कोलकाता की ओर से सप्ताहव्यापी श्रीमद भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ शुरू हुआ। ज्ञानयज्ञ 8 जनवरी तक चलेगा। राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने दीप प्रज्ज्वलित कर इसका उद्घाटन किया। इस अवसर पर उनकी पत्नी सुदेश धनखड़, मुख्य यजमान बनवारीलाल चौधरी, उद्योगपति प्रदीप तोदी, ललित बेरीवाल सहित कई विशिष्ट जने उपस्थित थे। संस्था के क्षेत्रीय सचिव विजय माहेश्वरी ने राज्यपाल का स्वागत किया। अलका मोदी ने सुदेश धनखड़ का सम्मान किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में आभा वाजपेयी उपस्थित थी। संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष सज्जन बंसल ने समिति की ओर से एकल विद्यालय सहित सभी गतिविधियों से श्रद्धालुओं को अवगत कराया। बंसल ने कहा कि 30 गांवों में शुरू एकल अभियान के तहत एकल विद्यालय से शिक्षा की ज्योति 1 लाख गांवों तक पहुंच गयी है। आगे भी इसके विस्तार के लिए तन-मन-धन से काम करेंगे। श्री हरि सत्संग समिति कोलकाता की ओर से देश के 27 राज्यों में चलने वाले एक अभियान के तहत एकल विद्यालयों की सराहना करते हुए कहा कि संस्था के 11 एकल विदयालयों की जिम्मेदारी वे लेंगे। कोलकाता चैप्टर के सुभाष मुरारका ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

मारवाड़ी समाज बैठाता अद्भुत सामांजस्य - राज्यपाल

राज्यपाल धनखड़ ने कहा कि मारवाड़ी समाज जन्मभूमि व कर्मभूमि में अद्भुत सामांजस्य बैठाता है। इनकी बैलेंसशीट में धार्मिक आयोजन भी है और व्यवसाय में लाभ भी कमाते हैं। मारवाड़ी समाज ने कभी अपने प्रतिष्ठा को गिरने नहीं दिया। मारवाड़ी कभी अपने काम को लेकर डंका नहीं पीटते। पर ऐसा नहीं है कि सब कुछ ठीक है। बस चिंतन व मंथन की आवश्यकता है। कई बार पीड़ा भी होती है जब हिंसा होती है, इसलिए इस प्रकार के आयोजन हिंसा जैसी घटनाओं को रोकने का कारगर उपाय है। आज काला पानी वाली जेल में जाइए तो देखेंगे कि सबसे ज्यादा लोग इसी प्रदेश के थे। नेताजी यहीं के थे जो आजादी के लिए निकल पड़े। आजादी यानी गणतंत्र के लिए। बंगाल की धरती से ही संविधान का निर्माण हुआ है।

Renu Singh Reporting
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