West Bengal election:चार राष्ट्रीय राजधानी हो और प्रत्येक में बारी-बारी से चले संसद सत्र- ममता

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा के राष्ट्रीयवाद के विरोध में क्षेत्रीयता और बाहरी का राग अलापा। उन्होंने दिल्ली की जगह एक बार फिर से कोलकाता को देश की राजधानी बनाने की मांग की। सिर्फ कोलकाता ही नहीं उन्होंने देश के तीन अन्य राज्यों में भी राष्ट्रीय राधानी बनाने और वहां क्रमवार तरीके से संसद का सत्र बुलाने की भी मांग की।

By: Manoj Singh

Published: 25 Jan 2021, 10:17 AM IST

फिर से कोलकाता को भी बनाएं देश की राजधानी
कोलकाता
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती पर उनको श्रद्धांजलि देने के लिए कोलकाता में रैली निकालने के साथ ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को भाजपा के राष्ट्रीयवाद के विरोध में क्षेत्रीयता और बाहरी का राग अलापा।
उन्होंने दिल्ली की जगह एक बार फिर से कोलकाता को देश की राजधानी बनाने की मांग की। सिर्फ कोलकाता ही नहीं उन्होंने देश के तीन अन्य राज्यों में भी राष्ट्रीय राधानी बनाने और वहां क्रमवार तरीके से संसद का सत्र बुलाने की भी मांग की।
उन्होंने कहा कि केवल दिल्ली ही क्यों राजधानी होगी। कोलकाता भी देश की राजधानी हो और इसके साथ ही और तीन देश की राजधानी बनाई जाए। दक्षिण भारत कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, केरल या अन्य राज्य, उत्तर में पंजाब, हरियाणा, पूर्व ) में बिहार, ओडिशा, बंगाल और बिहार में भी राष्ट्रीय राजधानी हो। उत्तर पूर्व के राज्यों में भी राजधानी हो केवल दिल्ली तक ही सीमाबद्ध क्यों रहेगा। दिल्ली में भी सभी बाहरी हैं। संसद का सत्र देश के सभी भागों में हो। केवल एक स्थान पर संसद का सत्र क्यों होगा। कोलकाता और देश के अन्य राज्यों में पारी-पारी से संसद का सत्र क्यों नहीं होगा।
ममता बनर्जी ने कहा कि बंगाल का स्वतंत्रता संग्राम में काफी योगदान रहा है। बग भंग आंदोलन और भारतीय पुनर्जागरण का शुरुआत बंगाल से हुई थी। बंगाल कभी भी किसी के सामने सिर नहीं झुकाया था और कभी भी सिर नहीं झुकाएगा। उन्होंने कहा कि वन नेशन, वन पार्टी और वन वोट की बात कही जा रही है। इतिहास की गलत व्याख्या की जा रही है। इतिहास को झुठलाया जा रहा है।
फिर से योजना आयोग को किया जाए बहाल
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि केन्द्र की मोदी सरकार ने योजना आयोग को समाप्त कर दिया और उसकी जगह नीति आयोग का गठन किया गया है। वह नीति आयोग का विरोध नहीं करती हैं, लेकिन प्लानिंग कमीशन को फिर से बहाल करना ही होगा। उनहोंने कहा कि केंद्र सरकार ने बिना कोई बातचीत किए नेताजी की जयंती को पराक्रम दिवस घोषित कर दिया। उन लोगों से कोई बातचीत नहीं की गई, लेकिन नेताजी सुभाष चंद्र बोस देश प्रेम के प्रतीक थे। रविंद्रनाथ टैगोर ने सबसे पहले नेताजी सुभाष चंद्र बोस को देशनायक की उपाधि दी थी। नेताजी ने आजाद हिंद फौज का गठन किया था।

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Manoj Singh Reporting
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