‘.....तो भारत को जगतगुरु बनने से दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती’

'..... So no power in the world can stop India from becoming Jagatguru'---देश के मौजूदा हालात पर भागवतकिंकर अनुराग कृष्ण शाी (कन्हैयाजी) की बेबाक टिप्पणी, पत्रिका से खास बातचीत में कहा, संतों का जीवन दर्शन होता है, न कि प्रदर्शन, ......मन मैला--तन उजला, बगुला जैसा भेख, ताते तो काग ही भले, भीतर--बाहर एक

By: Shishir Sharan Rahi

Published: 03 Jan 2020, 03:40 PM IST

कोलकाता. धर्म और नीति अगर एक साथ चलें, तो भारत को जगतगुरु बनने से दुनिया की कोई भी ताकत नहीं रोक सकती। संतों के जीवन का दर्शन और सरकार की नीतियों से भारत वासियों का जीवन सुखमय-शांतिमय और सशक्त बनेगा। और इसके लिए साधु-संत और सरकार को एक साथ चलने की अहम आवश्यकता है। कथाव्यास वैदिक--पथिक भागवतकिंकर अनुराग कृष्ण शाी (कन्हैयाजी) ने देश के मौजूदा हालात पर पत्रिका संवाददाता के सवालों के जवाब में गुरुवार सुबह ये बेबाक टिप्पणी की। वृंदावन निवासी शाी ने गुरुवार सुबह महानगर के १ए, हंगरफोर्ड स्ट्रीट में पत्रिका को दिए खास इंटरव्यू में कहा कि संतों का जीवन दर्शन होता है, न कि प्रदर्शन। महानगर के १ए, हंगरफोर्ड स्ट्रीट में २९ दिसंबर से शुरू श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ में रोजाना दोपहर 2 से शाम 6 तक शाी के श्रीमुख से होने वाली कथा श्रवण का लाभ लेने महानगर के काफी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण करने रोजाना आ रहे हैं। कथा के आयोजक जयकुमार करनानी, महेन्द्र कुमार करनानी, अभिषेक करनानी के निवास स्थल पर शाी ने पत्रिका के अनेक सवालों के जवाब दिए। अभिषेक करनानी ने बताया कि कथा का समापन ४ जनवरी को सुदामा चरित्र, श्रीशुकदेव विदाई, व्यास पूजन, कथा विश्राम और पूर्णाहुति के साथ होगा। २००४ से लगातार भागवत कथा-रामकथा-शिवपुराण, हनुमान कथा आदि वाचन करने वाले शाी २००४ से ही कोलकाता आ रहे हैं।

महज वेशभूषा से कोई नहीं होता साधु-संत

1981 में जन्मे शाी का स्पष्ट रूप से ये कहना है कि महज वेशभूषा से किसी को साधु-संत हम मान लें, यह कतई उचित नहीं। धर्म की आड़ में कुछ तथाकथित बाबाओं के कुत्सित आचरण से जनमानस की आस्था को ठेस पहुंचाने संबंधी सवाल पर उन्होंने यह बात कही। उन्होंने कहा कि वेशभूषा के साथ-साथ शाों में कुछ लक्षण भी बताए गए हैं। और उन लक्षणों से अभिभूत ही अगर कोई है तो फिर वो संत वरना संत के वेश में शैतान। इस संबंध में उन्होंने बगुला और कौआ का दृष्टांत देते हुए एक कविता की पंक्ति सुनाई......मन मैला--तन उजला, बगुला जैसा भेख, ताते तो काग ही भले, भीतर--बाहर एक।

ये धरती साधु-संतों के बल पर ही है टिकी

साधु-संतों के आचरण संबंधी पूछे सवाल पर उन्होंने कहा कि ये धरती साधु-संतों के बल पर ही टिकी है और अगर ये न होते, तो संपूर्ण जगत जलकर खाक हो गया होता अबतक। हालांकि उन्होंने ये माना कि कुछ मुट्ठी भर प्रदर्शन करते हैं और उनका कोई दर्शन नहीं होता। समाज में बढ़ते नैतिक पतन, अश्लीलता, मासूमों से अश्लील हरतक आदि सवालों पर कहा कि पहले एक घर में एक टीवी होता था। दूरदर्शन पर सामाजिक-पारिवारिक मूल्यों को बढ़ावा देने वाले एक से बढक़र एक सीरियल्स प्रसारित होते थे। इसकी जगह आज एक घर में ही कमरे-कमरे में टीवी की भरमार है जिसपर निजी चैनल्स वाले टीआरपी के फेर में अश्लीलता परोस रहे हैं। पहले जहां सभी परिवार के सदस्य साथ बैठ दूरदर्शन देखते थे लेकिन आज परिवार के साथ टीवी देखने में संकोच हो रहा। पहले संस्कारित मूल्यों पर जोर था और आज की युवा पीढ़ी के पॉकेट-पॉकेट तक मोबाइल, स्मार्टफोन पर पोर्न साइट्स की भरमार है। नतीजा सामने।

अश्लीलता प्रदर्शन करने वाले टीवी सीरियल्स, इंटरनेट आदि सोशल मीडिया पर तत्काल हो बैन
भारत को सनातन-संस्कृति का देश बताते हुए उन्होंने कहा कि सबसे पहले सरकारें खासकर भारत सरकार को कठोर कदम उठाते हुए देश में अश्लीलता प्रदर्शन करने वाले टीवी सीरियल्स, इंटरनेट आदि सोशल मीडिया पर तत्काल प्रभाव से बैन करना चाहिए। अगर हमारी सभ्यता--संस्कृति बची तो तभी देश बचेगा। पहले कुंडली का महत्व था जिसपर खास जोर दिया था। गुरुमुख विद्या बेहद जरूरी है। बिना गुरु के ज्ञान नहीं मिल सकता ये अटल सत्य है।

अन्य से इस तरह भिन्न है शाी की कथा
कथा तो सभी करते हैं पर जीवन में किसी भी ज्ञान का प्रकाश तभी होता है जब वह गुरु परंपरा से हो। परंपरा से प्राप्त ज्ञान दिव्य प्रकाश देता है। शाीजी पुष्टिमार्गीय अनुगामी परंपरा में तीसरी पीढ़ी के कथावाचक हैं। भागवतभूषण पं. श्रीश्रीनाथ शाी (पुराणाचार्य) इनके दादागुरु हैं जिनसे इन्होंने ज्ञान भी प्राप्त किया और शिक्षा-दीक्षा २००३में वृंदावन में पाई। शाी ने कहा कि वृंदावन में भागवक सेवा संस्था कोलकाता के तत्वावधान में वैदिक गुरुकुल 2006 से ही चल रहा। यहां वेदशाों का अध्ययन के साथ अंग्रेजी, कम्प्यूटर-मानव धर्म शिक्षा सहित कई प्रकल्प चल रहे हैं।

Shishir Sharan Rahi Reporting
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