excessive-bills: राज्य के निजी अस्पतालों में भी मनमानी

अन्य राज्यों की तरह पश्चिम बंगाल में भी निजी अस्पतालों में भर्ती और इलाज के नाम पर लूट के मामले सामने आ रहे हैं। 1 दिन के लिए निजी अस्पतालों में 65 हजार रुपए तक का बिल थमा दिया जा रहा है। बिल नहीं देने पर या तो मरीज को अस्पताल से छुट्टी नहीं दी जा रही तो मौत होने जा पर शव को तब तक नहीं दिया जा रहा है, जब तक परिजन पूरा बिल नहीं भर रहे हैं।

By: Rabindra Rai

Published: 20 May 2021, 09:21 PM IST

कहीं 1 दिन के लिए 65 हजार का बिल तो कहीं भर्ती करने के लिए ली जा रही मोटी रकम
लोगों को करना पड़ रहा है मुश्किलों का सामना
कोलकाता. अन्य राज्यों की तरह पश्चिम बंगाल में भी निजी अस्पतालों में भर्ती और इलाज के नाम पर लूट के मामले सामने आ रहे हैं। 1 दिन के लिए निजी अस्पतालों में 65 हजार रुपए तक का बिल थमा दिया जा रहा है। बिल नहीं देने पर या तो मरीज को अस्पताल से छुट्टी नहीं दी जा रही तो मौत होने जा पर शव को तब तक नहीं दिया जा रहा है, जब तक परिजन पूरा बिल नहीं भर रहे हैं। पैसे वाले किसी तरह बिल भर दे रहे हैं, जबकि अन्य लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
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केस 1
हाल ही में उत्तर 24 परगना जिले के टीटागढ़ तृणमूल कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष विजय अवस्थी को सोदपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। निधन हो जाने के बाद अस्पताल ने एक दिन में ही 65 हजार रुपए से ज्यादा का बिल बना दिया। परिजनों ने पहले खुद बिल कम करने की अपील नहीं की। नहीं मानने पर सत्तारूढ़ दल तथा विपक्ष के नेताओं से अस्पताल में फोन कराया गया तब जाकर अस्पताल प्रबंधन ने बिल में 35 हजार रुपए की कटौती की। सवाल यह है कि जिसकी पहुंच है उसका तो यह हाल है, आम लोगों की हालत का यूं ही अंदाज लगाया जा सकता है।
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केस 2
उत्तर 24 परगना जिला निवासी शंभू सिंह की कोरोना की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। परिजनों ने सरकारी अस्पताल में भर्ती कराने के लिए पूरी कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो पाए। फिर प्राइवेट अस्पताल अपोलो में सम्पर्क किया। वहां भर्ती लेने से पहले 5 लाख रुपए की मोटी रकम की मांग की गई। परिवार वाले उस समय उतनी रकाम का जुगाड़ नहीं कर पाए। सही समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण शम्भू सिंह की मौत हो गई। मृतक के पुत्र राजू सिंह ने बताया कि अगर कम रुपए जमा लेकर अस्पताल उसके पिता को भर्ती कर लेता तो उसके पिता कर जान बच जाती और उसे पैसे जुगाड़ करने का समय भी मिल जाता।
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केस 3
कोलकाता निवासी अंकित पोद्दार की कोविड-19 पॉजिटिव रिपोर्ट 22 अप्रेल को आई। आनन-फानन में परिवार वालों ने उसे रिकवरी नर्सिंगहोम में भर्ती कराया। वहां इलाज का बिल तो प्रतिदिन अधिक बनाया जाता था, लेकिन इलाज के नाम पर बहुत कुछ नहीं किया जा रहा था। अंकित के परिजन और रिश्तेदार अपने-अपने स्तर से अपोलो, आमरी, फोर्टिस, बेल व्यू में भर्ती कराने का प्रयास किया। काफी परेशानी झेलने के बाद मजबबूत पैरवी से अंतत: उन्हें आमरी अस्पताल में जगह मिली। इसके लिए उन्हें कितने पैसे देने पड़े, इस बारे में परिजनों ने कुछ भी बताने से इनकार किया। इनके एक रिश्तेदार ने कहा कि बात जब जान की हो तो पैसे को देखना उचित नहीं है।

Rabindra Rai Editorial Incharge
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