कोलकाता में आवारा कुत्तों की अब शामत

कोलकाता निगम नगर शहर के आवारा कुत्तों की नसबंदी कराएगा निगम। फरवरी से नसबंदी की प्रक्रिया शुरु होगी। राज्य सरकार ने आवंटित किए 71 लाख रूपए।

By: Ashutosh Kumar Singh

Updated: 04 Jan 2018, 05:17 PM IST

कोलकाता
कोलकाता महानगर में इन दिनों आवारा कुत्तों (स्ट्रीट डॉग) की बढ़ती संख्या से नगर वासी परेशान हैं। आये दिन शहर के विभिन्न हिस्सों में इन कुत्तों की वजह से कोई ना कोई हादसे होते रहते हैं। आवारा कुत्तों सेे परेशान लोगों को कोलकाता नगर निगम राहत की सांस देने जा रहा है। फरवरी महीने से केएमसी के कुल 144 वार्डों के हर बोरो में दो कैंप लगाए जाएंगे। यह कैंप पूरे साल भर नगर के आवारा कुत्तों को पकडक़र उन्हें वैक्सीन देगा तथा ऑपरेशन कर उनकी नसबंदी करेगा। इसके साथ ही स्वास्थ्य से जुड़ी अन्य परेशानियों की भी चिकित्सा इन कैंपों में की जाएगी। हर कैंप में रोजाना लगभग 50 स्वानों की चिकित्सा की जाएगी और उनकी नसबंदी की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग के एमआईसी अतिन घोष ने कहा कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी कुत्तों की बढ़ती जनसंख्या को रोकने के लिए शहर में नसबंदी अभियान चलाया जाएगा।

 

राज्य सरकार ने आवंटित किए 71 लाख रूपए

राज्य सरकार ने निगम को 71 लाख आवंटित किए है। रूपए शीत ऋतु कुत्तों के लिए प्रजन्न का समय जानकारों की मानें तो शीत ऋतु कुत्तों के प्रजनन का उर्पयुक्त समय है। ऐसे में स्वानों की बढ़ती संख्या को रोकने के लिए सही समय में उनकी नसबंदी कराना जरुरी है। शीत ऋतु में शहर के विभिन्न इलाकों में आपको स्वानों के छोटे-छोटे बच्चे देखने को मिलेंगे, जो आये दिन चौपहिया वाहन अथवा दो पहिया वाहनों की चपेट में आकर प्राण गंवा रहे हैं।

 

कुत्तों की बढ़ती संख्या बनी आफत, भयभीत लोग

कुत्तों की बढ़ती संख्या लोगों के परेशानी का कारण भी बन गई है। लोगों की शिकायत है कि इलाकों में स्वानों की बढ़ती संख्या गली-मोहल्ले को गंदा कर रही है। एक तो सुबह-शाम उनके मल से पूरा इलाका गंदा हो जाता है वहीं दूसरी ओर आवारा कुत्तों की वजह से सुबह हो या शाम लोगों को घर से निकलने के लिए एक सहारे की जरुरत पड़ती है। रात को दफ्तर से घर लौटने वाले लोगों की शिकायत हैं कि रोज रात को उन्हें अपने मोहल्ले से जाने के लिए पेपर या लाठीू का सहारा लेना पड़ता है। कॉलेज स्ट्रीट में रहने वाली देविका सिंह की शिकायत है कि उन्हें रोजाना दफ्तर से घर लौटने के लिए अपने भाई या पति को रास्ते तक बुलाना पड़ता है। कुत्तों की बढ़ती संख्या की वजह से उन्होंने अपने बेटे का रास्ते पर साइकिल चलवाना बंदा करा दिया है। उन्होंने बताया कि पिछले कई दिनों में इस आवारा कुत्तों ने लगभग ४ से ५ लोगों को कांटा है।

 

वीआईपी कुत्तों के साथ वीआईपी ट्रीटमेंट, खुलेगा एसी होलीडे होम

महानगर में रह रहे वीआईपी कुत्तों के लिए एसी होलीडे होम खोला जा रहा है। यह होलीडे होम 276, बिपिन गांगुली स्ट्रीट स्थिॉत सीएसपीसीए वेटेनरी हॉस्पिटल में खुलने जा रहा है। इस हॉस्पिटल में पहले से एक होलीडे होम मौजूद है जहां कुत्तों को रखने पर 2000 मासिक खर्च आता है। वहीं अब इस एसी होलीडे होम में कुत्तों को रखने पर मासिक खर्च 5000 रूपए पड़ेगा। यहां आपके वीआईपी कुत्तों को वीआईपी ट्रीटमेंट दिया जाएगा। जहां कुत्तों के खाने-पीने से लेकर सोने तक विशेष व्यावस्था की जाएगी। यहां रहने वाले कुत्तों को मांसाहारी के साथ ही शकाहारी भोजन भी दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि कुत्तों को रखने वाले शौकिन अक्सर बाहर जाते समय इस दुविधा में पड़ जाते है कि वे अपने कुत्तों को कहां रखें। ऐसे में सीएसपीसीए वेटेनरी हॉस्पिटल की यह पहल उनके लिए एक उम्मीद की किरण है। यहां की खास बात यह है कि इस होलीडे होम को दो भागों में बांटा गया है और दोनों ही विभाग बंगाली फिल्मों के नाम पर रखा गया है। पहला विभाग है प्राक्तन जिसमें झगड़ालू प्रवृत्ति के कुत्तों को रखा जाएगा वहीं दूसरा विभाग का नाम है बेलाशेश जहां शांत प्रवृत्ति के कुत्तों को रखा जाएगा। अस्पताल के सुपर ने बताया कि हमें इस कार्य के लिए एक डोनेटर की जरूरत हैं। इससे होने वाले फायदों को हम स्ट्रीट कुत्तों की देखाभल लगाएंगे क्योंकि सरकार हमें आवारा कुत्तों की देखभाल के लिए कोई सहायता नहीं करती हैं।अभिनेत्री देवोश्री राय ने इस मामले में काह कि यह कार्य सराहनीय है, लेकिन इसके लिए विशेष ध्यान देना जरूरी है। अक्सर देखा जाता है कि ऐसी जगहों से लौटने के बाद ये रईसी तुत्तें बिमार हो जाते हैं तो इनका उन जगहों पर विशेष ध्यान रखना और स्नेह देना बहुत आवश्यक है।

Ashutosh Kumar Singh
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