चाय बागान श्रमिकों को राज्य सरकार कर रही है प्रताडि़त

चाय बागान श्रमिकों को राज्य सरकार कर रही है प्रताडि़त
kolkata news

Shankar Sharma | Updated: 29 Jun 2016, 11:58:00 PM (IST) Kolkata, West Bengal, India

विपक्ष ने राज्य सरकार पर उत्तर बंगाल के चाय बागान श्रमिकों को प्रताडि़त करने का आरोप लगाया है। चाय बागान की वास्तविक स्थिति पर मुख्यमंत्री और श्रम मंत्री

कोलकाता. विपक्ष ने राज्य सरकार पर उत्तर बंगाल के चाय बागान श्रमिकों को प्रताडि़त करने का आरोप लगाया है। चाय बागान की वास्तविक स्थिति पर मुख्यमंत्री और श्रम मंत्री  के परस्पर विरोधी बयान से लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
विपक्ष के नेता अब्दुल मन्नान और कांग्रेस विधायक डॉ. मानस रंजन भुंइया ने चाय बागानों की वास्तविक हालात और उसे पुनरुज्जीवित करने की दिशा में सरकार की ओर से उठाए गए कदमों के बारे में जानना चाहा।

डॉ. भुंइया ने कहा कि चाय बागानों के बारे में पूछे जाने पर वित्त मंत्री डॉ. अमित मित्रा बागान श्रमिकों को सस्ते में राशन, चिकित्सा सुविधा और राहत की बात कह कर मुद्दे को टाल दे रहे हैं। उनका कहना है कि वित्त मंत्री अत्यंत बुद्धिमान व्यक्ति हैं, पर सवालों के जवाब में वे 180 डिग्री मुड़ जा रहे हैं।

विपक्ष ने कहा कि राज्य की आर्थिक समृद्धि में चाय उद्योग की अहम भूमिका है। कांग्रेस सदस्य का कहना है कि चाय बागानों को चलाने का दायित्व केंद्र सरकार का  है।

कांग्रेस विधायक ने चाय बागानों को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली और केंद्रीय वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण पर दबाव डालने का मुख्यमंत्री से अनुरोध किया। उनका कहना है कि मोदी के समक्ष प्रस्ताव भेजने में मुख्यमंत्री को किस बात की आपत्ति है।

इधर, राज्य के वित्त मंत्री डॉ. अमित मित्रा ने कहा कि सरकार बंद चाय बागानों की 15 जमीनों का वैकल्पिक इस्तेमाल करने पर विचार कर रही है। वित्त मंत्री का कहना है कि सरकार बंद पड़ी छह बागानों रेड बैंक, सुरेन्द्रनगर, धरनीपुर, डेकलापाड़ा, बंदापानी, मधु और रहिमाबाद का अधिग्रहण करना चाह रही है। उन्होंने कहा कि वाममोर्चा के कार्यकाल में दार्जिलिंग व डुआर्स के पांच बागान परित्यक्त हालत में थी। तृणमूल सरकार ने इसे अपने कब्जे में लेने के बाद इसकी नीलामी कर दी। इन बागानों में उत्पादन हो रहा है।

वित्त मंत्री ने डनकन के बंद सात बागानों के प्रति केंद्र की उदासीनता की आलोचना करते हुए कहा कि अधिग्रहण के 3महीने बाद भी इसे खोलने की दिशा में  प्रगति नहीं हुई। मित्रा के अनुसार केंद्र जहां इसे लेकर उदासीन है, वहीं राज्य सरकार बंद बागान के 3185 श्रमिकों को पेंशन तथा हजारों श्रमिकों को आईसीडीएस समेत अन्य सामाजिक योजनाओं से लाभ पहुंचाया जा रहा है।
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