बंगाल में भारी बवाल के बीच राज्यपाल ने यह उठाया बड़ा कदम

पीएम और गृह मंत्री से मिले थे राज्यपाल, बताया था राज्य के हालात को

By: Rabindra Rai

Published: 12 Jun 2019, 04:10 PM IST

कोलकाता. पश्चिम बंगाल में जारी भारी बवाल के बीच राज्य के राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य में जारी राजनीतिक हिंसा की घटनाओं को लेकर राज्यपाल ने गत सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। त्रिपाठी ने संवाददाताओं को बताया था कि उन्होंने राज्य के ताजा हालात से दोनों नेताओं को अवगत कराया है। माना जा रहा है कि केन्द्र के सुझाव पर राज्यपाल ने राज्य में शांति बहाली की पहल की है। उन्होंने सर्वदलीय बैठक बुला ली है। गुरुवार को राजभवन में शाम चार बजे होने वाली इस बैठक के लिए राज्य की सभी पार्टियों तृणमूल कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी, वाममोर्चा, कांग्रेस को न्योता भेजा गया है। अब देखना है कि बैठक में सभी दलों के नेताओं का क्या रवैया रहता है। खासकर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस का क्या रुख रहता है। इस पर सभी की नजर रहेगी।
प्रदेश में हिंसा का दौर जारी है। कोई ऐसा दिन नहीं है जब राज्य में हिंसा की खबरें नहीं आती हैं। अब एक नए मामले में मालदह में दो दिन से लापता बीजेपी कार्यकर्ता का शव मिला है। इसके बाद से ही इलाके में तनाव है। राज्य में लगातार हिंसा को लेकर पहले से ही सत्तारूढ़ टीएमसी और बीजेपी आमने-सामने हैं। अब एक और बीजेपी कार्यकर्ता के शव मिलने के बाद तनाव और बढ़ता दिख रहा है। प्रदेश में हिंसा को लेकर बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने बुधवार को सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया। पुलिस ने आंसू गैस के गोल दाग कर सभी को तितर-बितर किया। इससे पहले मंगलवार को पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के कांकीनाड़ा में बम धमाके में 2 लोगों की मौत हो गई जबकि 4 लोग घायल हो गए। लोकसभा चुनाव के बाद से ही टीएमसी और बीजेपी के कार्यकर्ताओं में हिंसक झड़प जारी है। उत्तर 24 परगना में हिंसा के मामले ने इस विवाद को मंगलवार को और बढ़ा दिया।
इससे पहले एक आरएसएस और एक बीजेपी के कार्यकर्ता के पेड़ से लटकते शव पाए जाने से सनसनी फैल गई थी। सोमवार को हावड़ा के आमता स्थित सरपोटा गांव में बीजेपी कार्यकर्ता समातुल दोलुई का शव पेड़ से लटकते हुए मिला था। दोलुई के परिवार और बीजेपी नेताओं ने इस घटना के पीछे तृणमूल कांग्रेस का हाथ बताया है।

 

Rabindra Rai Editorial Incharge
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