सामने नहीं आई कांड की सच्चाई

सामने नहीं आई कांड की सच्चाई
kolkata news

Shankar Sharma | Publish: Jun, 24 2016 11:47:00 PM (IST) Kolkata, West Bengal, India

नारदा स्टिंग ऑपरेशन की सच्चाई सामने नहीं आ पाई है। तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख नेताओं ने रिश्वत ली थी या नहीं, इसका पता लगा पाने में हैदराबाद

कोलकाता. नारदा स्टिंग ऑपरेशन की सच्चाई सामने नहीं आ पाई है। तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख नेताओं ने रिश्वत ली थी या नहीं, इसका पता लगा पाने में हैदराबाद स्थित सेंट्रल फारेंसिक लैब (सीएफएसएल) नाकाम रहा है। वीडियो फुटेज की सच्चाई का पता लगाने के लिए अब उसे चंडीगढ़ भेजा जा रहा है।

शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश मंजुला चेल्लूर तथा न्यायाधीश अरिजीत बनर्जी की खंडपीठ ने नारदा वीडियो फुटेज को जांच के लिए चंडीगढ़ स्थित सेंट्रल फारेंसिक लैब भेजने का निर्देश जारी किया। आगामी दस दिनों के भीतर हाईकोर्ट की ओर से नियुक्त तीन सदस्यीय कमेटी वीडियो फुटेज को चंडीगढ़ ले जाएगी और सेंट्रल फारेंसिक लैब को सौंपेगी। हाईकोर्ट ने एक माह के भीतर सेंट्रल लैब को अपनी रिपोर्ट भेजने को कहा है। इसके बाद मामले पर अगली सुनवाई होगी।

विधानसभा चुनाव से पूर्व नारदा ने स्टिंग ऑपरेशन के फुटेज जारी किये थे। जिसमें तृणमूल के प्रमुख नेताओं को रिश्वत लेते हुए दिखाया गया था।

इस मुद्दे पर कलकत्ता हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर हुई थी। मुख्य न्यायाधीश मंजुला चेल्लूर ने नारदा वीडियो फुटेज को जांच के लिए हैदराबाद के सीएफएसएल में भेजा था ताकि इस बात का पता लगाया जा सके कि वीडियो में दिखाए गये दृश्य सच हैं या नहीं। नारदा के सीईओ मैथ्यू सैमुअल के आई फोन, पेन ड्राइव तथा लैपटॉप को जांच के लिए  भेजा गया था। कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देशानुसार सीएफएसएल ने अपनी रिपोर्ट भेजी है।

शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश ने फारेंसिक लैब की रिपोर्ट सार्वजनिक करते हुए अदालत में कहा कि सीएफएसएल ने सच्चाई का पता लगा पाने में असमर्थता प्रकट की है। रिपोर्ट में फारेंसिक लैब ने लिखा है कि मैथ्यू सैमुअल ने आई फोन में दृश्य कैद किये थे और उसके बाद उसे लैपटॉप में स्थानांतरित किया था। पर लैब के पास अत्याधुनिक उपकरण न होने के कारण लैपटॉप के हार्ड डिस्क की जांच नहीं की जा सकी। हैदराबाद लैब ने हाईकोर्ट को प्रस्ताव भेजा है कि हार्ड डिस्क की जांच के लिए हाईकोर्ट उसे चंडीगढ़ भेज सकता है।

वहां के सेंट्रल फारेंसिक लैब में जांच के लिए उपयुक्त उपकरण हैं। सरकारी अधिवक्ता तथा याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने कहा कि सच्चाई का पता लगाने के लिए यदि फुटेज को चंडीगढ़ भेजा जाता है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। गौरतलब है कि इस मुद्दे पर हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल (अरिजिनल साइड) के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी। जिसमें सीबीआई के इंसपेक्टर नगेन्द्र सिंह तथा राज्य पुलिस के विनीत गर्ग शामिल थे।

मुख्य न्यायाधीश ने कमेटी को निर्देश दिया कि वे मैथ्यू सैमुअल के आई फोन, पेन ड्राइव तथा लैपटॉप दस दिनों के भीतर चंडीगढ़ स्थित फारेंसिक लैब ले जाकर जांच के लिए सुपुर्द करें। फारेंसिक लैब से कहा गया है कि वह एक माह के भीतर रिपोर्ट भेजे। हैदराबाद के रिपोर्ट की प्रति भी भेजने को कहा गया है। डेढ़ माह बाद इस मामले पर फिर सुनवाई होगी।

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