परिवार से अलग रहने के कारण बिगड़ रही है कोरोना मरीजों की मन:स्थिति

समाधान खोजने में जुटा स्वास्थ्य विभाग
-मनोचिकित्सकों की ली जाएगी मदद

By: Krishna Das Parth

Published: 06 Apr 2020, 04:41 PM IST

कोलकाता. कोरोना के संदिग्ध और संक्रमित मरीजों की मन:स्थिति बिगडऩे का प्रमुख कारण उनका अपने परिवार से अलग रहना बताया जा रहा है। राज्य के विभिन्न अस्पतालों के क्वारंटाइन में रहनेवाले संदिग्धों की स्वास्थ्य रिपोर्ट और सर्वे से इसका खुलासा हुआ है। इसको देखते हुए पश्चिम बंगाल का स्वास्थ्य विभाग इसका समाधान ढुंढऩे में लग गया है। बल्कि स्वास्थ्य विभाग के सामने एक विकल्प आया है कि संदिग्धों की मन:स्थिति ठीक करने के लिए मनोचिकित्सों की मदद ली जाए। क्योंकि क्वारंटाइन में मरीजों के परिजनों को जाने की अनुमति देना संभव नहीं है।
जानकारी मिली है कि पश्चिम बंगाल राज्य के अस्पतालों व क्वारंटाइन सेंटरों में कोरोना के संदिग्ध और संक्रमित मरीज दिनों-दिन अपनी मन:स्थिति खोते जा रहे हैं। जानलेवा बीमारी में अकेलपन व तनाव के कारण लोग इतने कमजोर हो गए हैं कि उन्हें दिन रात मौत का डर सता रहा है। ऐसे में उनका जल्दी ठीक हो पाना संभव नहीं हो रहा है। इस स्थिति से निपटने के लिए राज्य के स्वास्थ्य विभाग की ओर से हर क्वारंटाइन सेंटर में चिकित्सकों की नियुक्ति की जाएगी। ये चिकित्सक मरीजों को आत्मबल प्रदान करेंगे। कोरोना जैसी जानलेवा बीमारी से अब तक पूरे देश भर में लगभग 100 लोगों की मौत हो गई है। राज्य में मरीजों की संख्या 60 के पार है। सरकार की ओर से हर तरफ से अस्पतालों और क्वारंटाइन सेंटर की व्यवस्था की जा रही है ताकि कोरोना के संदिग्ध और संक्रमित मरीजों को जल्द से जल्द ठीक किया जा सके। इस लॉकडाउन के दौरान अकेलेपन व इस बीमारी का भय लोगों में व्याप्त हो गया है। कोरोना के संदेह के कारण कई लोग आत्महत्या कर चुके है। इस स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने मनोचिकित्सक नियुक्त करने का फैसला किया है। राज्य के चिकित्सकों ने कुछ दिनों पहले ही राज्य स्वास्थ्य विभाग को मनोचिकित्सक रखने के लिए आवेदन किया था, लेकिन उस आवेदन की मंजूरी शनिवार को दी गई। शनिवार को राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने विज्ञप्ति जारी कर इस संबंध में बताया है। एक चिकित्सक ने बताया कि कोरोना संदिग्ध और संक्रमित को जब अपने परिवार से अलग रखा जा रहा है तो उनमें चिंता व्याप्त हो जा रही है। इस अकेलेपन के कारण निराश रह रहे हैं और उन्हें उम्मीद नहीं है कि वे ठीक होंगे। अगर मनोचिकित्सक रहेगा तो संबल मिलेगा। एक मनोचिकित्सक का कहना है कि इस क्वारंटाइन में रहने के कारण कई मरीजों का व्यवहार बदल गया है। इन सारी समस्याओं को मनोचिकित्सक हल कर सकते हैं। मालूम हो कि राज्यभर में 50000 से अधिक लोगों को क्वारंटाइन में रखा गया है।

Krishna Das Parth Desk
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