पश्चिम बंगाल में नवजात मृत्यु दर कम करने का दावा

- नवजात देखभाल सप्ताह शुरू

By: Ashutosh Kumar Singh

Published: 15 Nov 2018, 11:01 PM IST

कोलकाता

नवजात मृत्यु दर कम करने के मामले में पश्चिम बंगाल सरकार ने महत्वपूर्ण कामयाबी हासिल की है। प्रतिदिन होने वाले नवजात बच्चों की मौत का आंकड़ा राष्ट्रीय औसत की तुलना में कम हुआ है। गुरुवार को नवजात देखभाल सप्ताह के शुरू होने के मौके पर राज्य स्वास्थ्य विभाग की ओर से विज्ञप्ति जारी कर यह दावा किया गया है। विज्ञप्ति में बताया गया है कि वर्ष 2011 में ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री बनने के बाद राज्य भर में स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक सुधार किया गया है। इससे पश्चिम बंगाल में नवजात बच्चों की मौत की संख्या कम हुई है। राज्य में प्रतिदिन 25 बच्चों की मौत होती है जो राष्ट्रीय आंकड़े से 9 कम है। पूरे देश का औसत आंकड़ा 34 है। विज्ञप्ति में यह भी दावा किया गया है कि वर्ष 2010 में जब पश्चिम बंगाल में वामपंथियों का शासन था तब प्रतिदिन 32 बच्चों की मौत होती थी। राज्य सरकार तेजी से सुविधाओं को विकसित कर इस संख्या को और कम करने में जुटी हुई है। बताया गया है कि पहले अधिकतर बच्चों का जन्म घरों पर होता था, लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के लोगों को स्वास्थ्य केंद्रों में जाकर चिकित्सकों की देखरेख में बच्चे के जन्म के लिए प्रेरित किया है। इसका लाभ यह हुआ है कि राज्य में 96 प्रतिशत बच्चों का जन्म विभिन्न सरकारी अस्पतालों में हो रहा है। वर्ष 2010-11 में यह आंकड़ा 65 प्रतिशत था। विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि आने वाले एक साल में शत प्रतिशत बच्चों का जन्म अस्पतालों में होगा। स्वास्थ्य विभाग ने दावा किया है कि टीकाकरण की प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ी है। वित्त वर्ष 2017 -18 में 96 प्रतिशत बच्चों का टीकाकरण किया जा चुका है। विज्ञप्ति में किए गए दावे के अनुसार बच्चे के जन्म के समय मां की मौत केआंकड़े में भी कमी आई है। 2007-08 में प्रति एक लाख में से 145 महिलाओं की मौत बच्चों के जन्म देने के समय हो जाती थी। वर्तमान में यह आंकड़ा घटकर 112 पर है। पहुंच गया है। इस मामले में राष्ट्रीय आंकड़ा 167 है। विज्ञप्ति के अनुसार पश्चिम बंगाल सरकार ने सरकारी अस्पतालों में बच्चों की चिकित्सा संबंधी सुविधाएं विकसित करने के लिए 132 करोड़ रुपये खर्च की है। अस्पतालों में बच्चों के लिए इंटेंसिव केयर यूनिट, क्रिटिकल केयर यूनिट और गर्भवती महिलाओं के लिए शौचालय और अन्य चिकित्सकीय सुविधाएं विकसित की गई हैं। इसी वजह से नवजात की मौत के आंकड़े में भी कमी आई है।

Ashutosh Kumar Singh
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