वेतन में कटौती से फ्लैट का किराया चुकाना पड़ रहा भारी

- कोरोना इम्पैक्ट: पीजी में रहना नहीं चाह रहे हैं लोग
- मुम्बई, दिल्ली, बेंगलूरु, पुणे, चेन्नई सभी शहरों में एक जैसे हालात

By: Ashutosh Kumar Singh

Published: 23 Sep 2020, 05:32 PM IST

कोलकाता.
कोरोना काल में रेंटल हाउसिंग मार्केट पर भी बुरा असर पड़ा है। मुम्बई, दिल्ली, बेंगलूरु, पुणे, चेन्नई सहित सभी शहरों में किराये के फ्लैट और पीजी की मांग में भारी गिरावट आई है।
वेतन में कटौती से निजी कम्पनियों के कर्मचारियों के लिए फ्लैट का किराया चुकाना भारी पड़ रहा है। दूसरी तरफ सोशल डिस्टेंसिंग के मद्देनजर लोग पीजी में रहना नहीं चाह रहे हैं। नौकरी जाने से बड़ी संख्या में लोग घर लौट गए हैं। इसलिए बहुत से किराये के फ्लैट खाली हो गए हैं।
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पांच महीने में 25 प्रतिशत की कमी
प्रोपर्टी ब्रोकर एंड बुकिंग फॉर्म के अनुसार बड़े शहरों में पिछले 5 महीनों के रेंटल हाउसिंग मार्केट में 25 प्रतिशत की कमी आई है। किराये की प्रोपर्टी के कारोबार से जुड़ी कम्पनी मजिक ब्रिक्स के आनुसार 25 प्रतिशत से ज्यादा की कमी आई है।
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इन कम्पनियों का कारोबार चौपट
किराये की प्रोपर्टी के कारोबार से जुड़ी कम्पनी नेस्ट आवे के अधिकारियों के अनुसार लॉकडाउन के कारण अधिकांश निजी कम्पनियों में काम बंद है। नए लोगों को रोजगार नहीं मिल रहा है। इसलिए बड़े शहरों में लोग कम आ रहे हैं। किराये की प्रोपर्टी के कारोबार से जुड़ी कम्पनियों का कारोबार चौपट है।
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टीका आने से पहले सुधार के आसार नहीं
किराये की प्रोपर्टी के कारोबार से जुड़े लोगों के अनुसार कोविड-19 के टीका (वैक्सीन) आने से पहले कारोबार में सुधार के आसार नहीं हैं। कोरोना को लेकर लोगों में जबर्दस्त खौफ है। यह खौफ वैक्सीन आने का बाद ही खत्म होगा। फिर लोग रोजी-रोजगार की तलाश में बड़े शहरों की ओर कूच करेंगे।

Ashutosh Kumar Singh
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