तो क्या भाजपा की शिकायत पर नजरबंद हुआ टीएमसी का यह हैवीवेट नेता

तो क्या भाजपा की शिकायत पर नजरबंद हुआ टीएमसी का यह हैवीवेट नेता

Krishna Das Parth | Updated: 28 Apr 2019, 11:09:01 PM (IST) Kolkata, Kolkata, West Bengal, India

तो क्या भाजपा की शिकायत पर नजरबंद हुआ टीएमसी का यह हैवीवेट नेता
-चौथे दौर के मतदान से पहले हुई कार्रवाई से तृणमूल खेमें में मची खलबली
-बीरभूम जिले में बोलती है इसकी तूती
-भाजपा और तृणमूल में हुई झड़प के बाद आयोग ने की यह कार्रवाईक

कृष्णदास पार्थ

चौथे दौर के मतदान से पहले बीरभूम जिला तृणमूल का के अध्यक्ष अणुव्रत मंडल को चुनाव आयोग ने नजरबंद कर दिया है। अब मंडल केंद्रीय बलों की निगरानी में रहेंगे। मतदान करने के अलावा उनको किसी भी बूथ पर जाने की अनुमति नहीं है। बहर हाल आयोग की इस कार्रवाई को मंडल ने राजनीति से प्रेरित बताया है। उनका मानना है कि इससे तृणमूल के समर्थकों और मतदाताओं पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। बल्कि और जोश और उत्साह से लोग तृणमूल के पक्ष में मतदान करेंगे। उनका कहना है कि उनको जो भी करना चाहिए था, वे सबकुछ कर चुके हैं। वैसे भी वे मतदान के दिन निकलते नहीं है। अपने घर पर ही रहते हैं। मंडल को यह पहली बार नजरबंद नहीं किया गया है। इससे पहले, 2016 में राज्य विधानसभा चुनावों के दौरान भी उनको नजरबंद किया गया था।
सोमवार को लोकसभा चुनाव का चौथा दौर है। इस चरण में राज्य को 8 सीटों पर मतदान होगा। जिनमें बीरभूम जिले की दो सीटें बीरभूम और बोलपुर शामिल हैं। मतदान से एक दिन पहले तृणमूल के जिलाध्यक्ष काफी व्यस्त थे।
देर रात को घर लौटने के दौरान उनको नजरबंद कर लिया गया। इस संबंध में उनका कहना है कि उन्हें नहीं पता कि चुनाव आयोग की निगरानी में रखने का यह फैसला क्यों और किसके इशारे पर लिया गया। चुनाव आयोग पागलों की तरह व्यवहार कर रहा है। नजरबंद के बाद मंडल अब केंद्रीय बलों से घिरे रहेंगे। एक डिप्टी मजिस्ट्रेट हमेशा उनके साथ रहेगा। उन्हें कैमरे की निगरानी में ही रखा जाएगा।
इस दौरान वे फोन का इस्तेमाल नहीं कर सकें गे। फोन को डिप्टी मजिस्ट्रेट के पास जमा करना होगा। उनका कहना है कि चुनाव आयोग का यह निर्णय राजनीति से प्रेरित है। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ही भाषा बोल रहा है।
मालूम हो कि बीरभूम के दुबराजपुर में बलिजुरी ग्राम पंचायत के महुला गांव में रविवार को भाजपा और तृणमूल समर्थकों में झंडा फाडऩे को लेकर जमकर विवाद हुआ था। इस संबंध में भाजपा कार्यकर्ताओं ने आयोग से शिकायत की थी।

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