लोकसभा चुनाव: पश्चिम बंगाल में घमासान के आसार

पीएम पद के लिए दावा पुख्‍ता करने की फिराक में दीदी, राज्य में अपनी मजबूत पकड़ करने की कोशिश में भाजपा

By: Rabindra Rai

Published: 10 Mar 2019, 07:32 PM IST

वामदलों तथा कांग्रेस की तृणमूल व भाजपा को रोकने की रणनीति
कोलकाता. पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव में इस बार दिलचस्प मुकाबले के आसार हैं। राज्‍य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ज्‍यादा से ज्‍यादा सीटें जीतकर पीएम पद के लिए अपना दावा पुख्‍ता करना चाहती हैं तो भाजपा अधिक सीटें जीतकर राज्य में अपनी मजबूत पकड़ बनाना चाहती हैं, वहीं वामदलों तथा कांग्रेस ने सीट समझौता कर तृणमूल और भाजपा को रोकने की रणनीति बनाई है। यही वजह है कि सबकी नजरें पश्चिम बंगाल पर टिकी हुई हैं।
प्रदेश में सीट बंटवारे पर वामदल और कांग्रेस के बीच गतिरोध कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और माकपा महासचिव सीताराम येचुरी के हस्तक्षेप के बाद लगभग सुलझ गया है। रायगंज और मुर्शिदाबाद लोकसभा सीटों को लेकर दोनों दल अड़े हुए थे। अब माना जा रहा है कि कांग्रेस इन दोनों सीटों पर उम्मीदवार नहीं उतारेगी। हालांकि अभी औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है।
चुनावों के लिहाज से पश्चिम बंगाल बेहद संवेदनशील रहा है। इस बार भी लोकसभा चुनाव से पहले ममता सरकार और मोदी सरकार के बीच तलवारें खिंच चुकी हैं। ममता बनर्जी भाजपा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर अकसर निशाना साधती रहती हैं। उनके हमले के केंद्र में वामदल नहीं बल्कि भाजपा रहती है।
बंगाल में पहले माकपा और कांग्रेस के बीच चुनाव में हिंसक झड़पें होती थीं जो आज तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच होने लगी है। वहीं देखा जाए तो बंगाल के हर चुनाव में भाजपा पहले से बेहतर प्रदर्शन कर रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह अभी तक राज्य में कई रैलियां कर चुके हैं। मोदी भी अपनी हर रैली में ममता को निशाने पर लेते देखे जाते हैं। उन्होंने भ्रष्टाचार के मामले को लेकर भी ममता को घेरा है। पिछली रैली में ही उन्होंने कहा था कि दीदी जब आपने कुछ गलत किया नहीं है तो जांच से इतना डर क्यों रही हो।
2014 के लोकसभा चुनाव में बंगाल की 42 सीटों में से तृणमूल को 34, कांग्रेस को 4, और सीपीएम-भाजपा को दो-दो सीटें मिली थीं।
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नजरें ममता बनर्जी पर
मुख्यमंत्री ममता अब राष्ट्रीय राजनीति में अहम भूमिका निभाने को बेताब हैं। जब गत 19 जनवरी को कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड मैदान में विपक्षी दलों की महारैली में वह तमाम नेताओं के साथ खड़ी थी, तब उनकी निगाहें दरअसल प्रधानमंत्री की कुर्सी पर थीं। ममता बनर्जी बीजेपी के खिलाफ महागठबंधन का चेहरा बनने की कोशिश में लगी हुई हैं। पीएम मोदी का वह सबसे मुखर विरोध कर रही हैं।
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पार्टियों में महत्वपूर्ण चेहरे
बंगाल में तृणमूल में ममता बनर्जी सबसे लोकप्रिय चेहरे के रूप में नजर आती हैं। अभिषेक बनर्जी, पार्थ चटर्जी, डेरेक ओ ब्रायन, शुभेन्दु अधिकारी, सुदीप बंद्योपाध्याय पार्टी के महत्वपूर्ण नेताओं में से हैं। भाजपा में दिलीप घोष, मुकुल रॉय, बाबुल सुप्रियो, रूपा गांगुली और राहुल सिन्हा जैसे नेता हैं। जबकि कांग्रेस में सोमेन मित्रा, अधीर चौधरी और अब्दुल मन्नान हैं, वहीं सीपीएम में सूर्यकांत मिश्रा, मोहम्मद सलीम, विमान बोस जैसे चेहरे हैं।
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राज्य के बड़े मुद्दे
राज्य का बड़ा मुद्दा एनआरसी बन चुका है। भाजपा ममता पर घुसपैठियों को शरण देने का आरोप लगाती रहती है। जबकि राज्य सरकार इसका बचाव करती नजर आती है। भाजपा ने एनआरसी के मुद्दे पर ममता सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा था कि राज्य सरकार ने घुसपैठियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बना दिया है।
ममता नोटबंदी और जीएसटी को लेकर मोदी सरकार पर शुरू से ही हमलावर रही हैं। ममता इन मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाती रही हैं।
भाजपा और कांग्रेस बेरोजगारी को लेकर ममता सरकार पर हमला करती रहती है। इन दोनों पार्टियों का आरोप है कि ममता सरकार रोजगार सृजन करने में विफल साबित हुई है। ममता बनर्जी कहती हैं कि उन्होंने दोनों समुदायों के लिए समान अधिकार दिए हैं। लेकिन भाजपा का आरोप है कि ममता ने एक धर्म विशेष का ही ध्यान रखा है जबकि दूसरे धर्म के लोगों के अधिकारों का हनन किया है।

Rabindra Rai Editorial Incharge
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