बंगाल के कॉलेजों पर टिकी तृणमूल कांग्रेस की बैतरनी, जानिए कैसे...

बंगाल के कॉलेजों पर टिकी तृणमूल कांग्रेस की बैतरनी, जानिए कैसे...
बंगाल के कॉलेजों पर टिकी तृणमूल कांग्रेस की बैतरनी, जानिए कैसे...

Prabhat Kumar Gupta | Publish: Oct, 12 2019 03:58:55 PM (IST) Kolkata, Kolkata, West Bengal, India

पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की छात्र शाखा तृणमूल छात्र परिषद (टीएमसीपी) ने राज्य के समस्त कॉलेजों में अपनी ताकत जांचने के लिए विभिन्न कॉलेजों में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है।


कोलकाता.
पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की छात्र शाखा तृणमूल छात्र परिषद (टीएमसीपी) ने राज्य के समस्त कॉलेजों में अपनी ताकत जांचने के लिए विभिन्न कॉलेजों में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। कॉलेजों में वर्षों से लम्बित छात्र संसद के चुनावों को देखते हुए समीक्षा की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसे लेकर एक निर्देशावली भी तैयार की गई है। तृणमूल छात्र परिषद के सूत्रों ने बताया कि प्रदेश नेतृत्व की ओर से मुद्रित प्रश्नावली सभी जिलों में पहुंच चुकी हैं। इसके माध्यम से नेतृत्व को यह अंदाजा लग सकेगा कि कॉलेजों में उसकी स्थिति क्या है? यही नहीं विरोधी छात्र संगठनों की वर्तमान स्थिति का भी पता चल पाएगा। दूसरी ओर, समीक्षात्मक रिपोर्ट में वामपंथी छात्र संगठन एसएफआई, भाजपा का छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद(एबीवीपी), कांग्रेस समर्थित छात्र परिषद और एसयूसीआई का छात्र संगठन डीएसओ जैसे छात्र संगठनों की कॉलेजों में मौजूदा स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी देने को कहा गया है।
कॉलेज के प्राचार्यों व अध्यापकों का ब्यौरा:
टीएमसीपी प्रदेश नेतृत्व ने विभिन्न कॉलेजों के प्रबंधन के बारे में विस्तृत जानकारी इकट्ठा करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा कॉलेजों के प्राचार्य, तीन पसंदीदा शिक्षकों का विवरण एकत्र करने के लिए भी निर्देशित किया गया है। छात्र प्रतिनिधियों के नाम, उनके फोन नंबर, प्रबंधन समिति के सदस्यों के बारे में भी पूरी जानकारी एकत्र की जा रही है। उल्लेखनीय है कि राज्य में २०१६-१७ में विभिन्न कॉलेजों में अंतिम बार छात्र संसद के लिए मतदान हुए थे। कॉलेजों में मतदान को लेकर हिंसा को देखते हुए राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सेंट जेवियर्स कॉलेज के मॉडल पर कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में गैर-राजनीतिक छात्र काउंसिल गठन करने की बात कही थी। इस संदर्भ में राज्य सरकार ने विधानसभा में विधेयक पारित किया है, इसे अमल में नहीं लाया गया।

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