बांग्ला-राजस्थानी के सेतु बंधन के सबसे बड़े प्रतीक हैं विवेकानंद - भट्टड़

- 159वीं जयंती पर माहेश्वरी विद्यालय ने याद किया विवेकानंद को
- खेतड़ी राजा अजित सिंह ने विदिशानंद को विवेकानंद नाम दिया

By: Rajendra Vyas

Published: 13 Jan 2021, 07:30 PM IST

कोलकाता. माहेश्वरी विद्यालय (अंतर्गत माहेश्वरी सभा) ने स्वामी विवेकानंद की 159वीं जयंती पर उन्हें याद करते हुए उनके प्रति श्रद्धा निवेदित की। माहेश्वरी भवन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में विवेकानंद की तस्वीर पर माल्यार्पण कर विद्यालय मंत्री केशव कुमार भट्टड़ ने कहा विवेकानंद ने देश की नब्ज पहचानी और उसके अनुसार उन्नति का मार्ग दिखाया। विवेकानंद ने शिक्षा को सबसे अधिक महत्व दिया और अपने संबोधनों से विश्व चेतना को एक नई दृष्टि दी।
उनकी आध्यात्मिक जीवन यात्रा में राजस्थान-सूत्र को प्रकाशित करते हुए केशव भट्टड़ ने कहा कि खेतड़ी रियासत के राजा अजित सिंह ने संन्यासी विदिशानंद को विवेकानंद नाम दिया और आजीवन मित्रता निभाई। विवेकानंद दो उन्नत संस्कृतियों बांग्ला और राजस्थानी के सेतु बंधन के सबसे बड़े प्रतीक हैं। विद्यालय के सभापति बुलाकी दास भैया ने प्रेषित संदेश में कहा कि आज विवेकानंद को पढऩे और उनके दिखाए मार्ग पर चलने की जरूरत है। प्रधान वक्ता कोरोना महामारी विशेषज्ञ डॉ. ए. अहमद ने गंभीर बीमारियों के लक्षण, बचने के जरूरी सावधानियां और उपलब्ध चिकित्सा पर व्याख्यान दिया। अध्यक्षता करते हुए कोलकता डिस्ट्रिक्ट के स्काउट्स-गाइड्स कमिश्नर अविनाश कुमार गुप्ता ने विवेकानंद के शिकागो भाषण का पाठ सुनाया। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए नरेन्द्र बागड़ी ने कहा कि युग चेतना के पुंज विवेकानंद के दिखाए मार्ग पर चल कर दुनिया को ज्यादा खूबसूरत बनाया जा सकता है। इस अवसर पर अभिभावक प्रतिनिधि प्रकाश चंद्र मूंधड़ा, संतोष कुमार मोहता, विद्यालय-कार्यालय प्रतिनिधि रवि बिनानी, शिक्षक केडीएस सिंह, जेपी सिंह, एएस उपाध्याय, माहेश्वरी पुस्तकालय के कोष मंत्री जयंत डागा, माहेश्वरी सेवा समिति के मंत्री गोपी किशन मूंधड़ा, कैलाश कुमार भट्ट, बलदेव दास पुरोहित, विनोद साहनी, राजेश दुजारी, पी. श्रीनिवासन, स्काउट्स के जवाहर आसावत, सुवर्णा मालाकार, कविता पोद्दार आदि मौजूद थे।

Rajendra Vyas Editorial Incharge
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