आखिर ममता बनर्जी को कमल के फूल से डर क्यों लगता है, जानिए...

नागिरकता संशोधित कानून(सीएए), एनपीआर और एनआरसी के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो तथा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का तेवर भले ही कम होते नहीं दिख रहा हो पर उन्हें चुनावों के आते ही कमल फूल से डर लगने लगा है।

कोलकाता.
नागिरकता संशोधित कानून(सीएए), एनपीआर और एनआरसी के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो तथा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का तेवर भले ही कम होते नहीं दिख रहा हो पर उन्हें चुनावों के आते ही कमल फूल से डर लगने लगा है। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा के हाथों अपनी 18 सीटें गंवाने की घटना ममता के गले आज भी नहीं उतरती।

पश्चिम बंगाल में एक बार फिर चुनाव का मौसम आने वाला है। अप्रेल महीने में कोलकाता और हावड़ा के अलावा राज्य के 102 स्थानीय निकायों के चुनाव की रणभेरी शीघ्र बजने वाली है। ममता को एक तरफ कमल फूल यानी भाजपा तथा दूसरी ओर कांग्रेस और वाममोर्चा गठबंधन की ओर से मिलने वाली कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। कमल के फूल से ममता को डर लगना लाजिमी है। डर भी इतना कि वो अपने सामने कमल का फूल देखना तक नहीं चाहती हैं।

ममता बनर्जी सरकार ने एक स्कूल को अपने लोगो से कमल का फूल हटाने का फरमान जारी किया है। दरअसल राज्य के दक्षिण 24 परगना जिले के रनिया फ्री प्राइमरी स्कूल में बच्चों की यूनिफॉर्म में जो लोगो लगा है, उसमें कमल का फूल है। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि 10-12 वर्षों से वो लोगो में देश के नेशनल फ्लॉवर कमल के फूल का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन अब ममता सरकार ने कमल का फूल हटाने का निर्देश दिया है।

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Prabhat Kumar Gupta Reporting
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