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कोलकाता

प्रदेश कांग्रेस को वाममोर्चा की पहल का इंतजार

लोकसभा चुनाव में भाजपा को रोकने के लिए प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व पश्चिम बंगाल में माकपा के नेतृत्ववाली वाममोर्चा के साथ सीटों पर तालमेल करने की दिशा में आगे बढ़ चुका है। बस उसे वाममोर्चा की ओर से पहल का इंतजार है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सोमेन मित्रा को माकपा राज्य सचिव डॉ. सूर्यकांत मिश्र के साथ बातचीत करने की प्राथमिक औपचारिकता जरूरी है।

कोलकाताFeb 20, 2019 / 11:00 pm

Prabhat Kumar Gupta

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प्रदेश कांग्रेस को वाममोर्चा की पहल का इंतजार


– माकपा के साथ सीटों पर समझौते का मामला

लोकसभा चुनाव में भाजपा को रोकने की कोशिश
कोलकाता.

लोकसभा चुनाव में भाजपा को रोकने के लिए प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व पश्चिम बंगाल में माकपा के नेतृत्ववाली वाममोर्चा के साथ सीटों पर तालमेल करने की दिशा में आगे बढ़ चुका है। बस उसे वाममोर्चा की ओर से पहल का इंतजार है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सोमेन मित्रा को माकपा राज्य सचिव डॉ. सूर्यकांत मिश्र के साथ बातचीत करने की प्राथमिक औपचारिकता जरूरी है। इस संदर्भ में पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष तथा राज्यसभा सांसद प्रो. प्रदीप भट्टाचार्य ने कहा कि माकपा को भी प्रदेश कांग्रेस के साथ बातचीत करने को आगे आने चाहिए। तभी हम सीटों के तालमेल के मुद्दे पर एक दूसरे के करीब आ सकते हैं।
प्रदेश कांग्रेस के सूत्रों ने बताया कि पार्टी ने लोकसभा चुनाव में वाम दलों के साथ सीटों पर तालमेल होने अथवा नहीं होने की स्थिति का मुकाबला करने के लिए वैकल्पिक रास्ता भी तैयार कर रखा है। यही कारण है कि कांग्रेस आलाकमान के निर्देशानुसार राज्य की सभी 42 संसदीय सीटों के लिए अपने संभावित उम्मीदवारों की सूची तैयार कर दिल्ली भेज चुकी है। प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के साथ तालमेल नहीं करने की बात से आलाकमान को अवगत करा दिया है पर तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो तथा पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के खिलाफ कांग्रेस और वामदलों के साथ मंच साझा करने की घोषणा से कांग्रेस आलाकमान संशय में है। यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी तथा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ममता की ओर से मिलने वाला समर्थन गंवाना नहीं चाहते। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मित्रा ने स्पष्ट किया है कि सीटों पर तालमेल पर अंतिम निर्णय आलाकमान को ही करना है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश कांग्रेस चुनाव समिति की २७ फरवरी को राज्य मुख्यालय विधान भवन में बैठक निर्धारित है। जबकि माकपा राज्य कमेटी २८ फरवरी को चुनाव के मुद्दे पर बैठक करने वाली है।
वाममोर्चा में मतांतर कायम-
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के साथ सीटों के तालमेल के मुद्दे पर वाममोर्चा में शामिल घटक दलों भाकपा, फारवर्ड ब्लॉक और आरएसपी के साथ माकपा नेतृत्व की सहमित नहीं बन पाई है। इन दलों ने 2016 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ तालमेल करने से कितना लाभ हुआ? इस पर सवाल खड़ा किया है। वाममोर्चा राज्य कमेटी की सोमवार को हुई बैठक में इन दलों ने चेयरमैन विमान बोस से जानना चाहा कि कांग्रेस के साथ जाने का परिणाम मोर्चा के पक्ष में कितना कारगर रहा। 2011 के चुनाव में तृणमूल से हारने के बावजूद वाममोर्चा को विधानसभा में प्रमुख विपक्ष का दर्जा मिला था पर 2016 में कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लडऩे का नतीजा यह निकला कि मोर्चा को राज्य में तीसरे स्थान पर आना पड़ा। फारवर्ड ब्लॉक और आरएसपी के सूत्रों ने बताया कि पश्चिम बंगाल में वाममोर्चा के शासनकाल तक हम माकपा की दादागीरी सहते रहे और अब पार्टी पिछले 8 साल से सत्ता से बाहर है। लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए दोनों पार्टियां अपने-अपने जनाधार वाले इलाकों को बचाने को प्राथमिकता दे रहे हैं। माकपा अपने घटक दलों के लिए 10 सीटें छोडऩे की सोच रही है। कांग्रेस के साथ समझौता होने पर मोर्चा के घटक दलों के लिए इतनी सीटें छोडऩा आसान नहीं होगा। सूत्रों ने बताया कि माकपा राज्य नेतृत्व मोर्चा के घटक भाकपा, आरएसपी और फारवर्ड ब्लॉक के साथ गुरुवार को एक बार फिर बैठक करेगा।
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