CORONA EFFECT: कोरोना और तालाबंदी का कहर--मासूम को गोद में ले राशन की खातिर 13 किमी पैदल चली महिला

BENGAL CORONA NEWS: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले की घटना, राशन की आस में आदिवासी महिला मार्ग्रेट हंसदा जा पहुंची ब्लॉक ऑफिस , कहा, उसे खुद की नहीं बच्चे का पेट भरने की फिक्र

By: Shishir Sharan Rahi

Published: 10 May 2020, 03:21 PM IST

BENGAL CORONA ALERT: कोलकाता. पूरी दुनिया को चपेट में लेने वाली महामारी कोरोना वायरस नोवेल कोविड 19 के साथ ही तालाबंदी की मार गरीबों पर पड़ी है। तालाबंदी ने जहां जिंदगी की रफ्तार रोक दी है तो दूसरी तरफ रोजी-रोटी न मिलने से खाने के लाले पड़ गए हैं। भूखे-प्यासे बेबस मजदूर खाने और ठिकाने की आस में मीलों तक का सफर तय कर रहे। पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाला एक ऐसा ही मामला सामने आया है। मालदा के हजोल ब्लॉक के बनियापुकुर गांव की आदिवासी महिला मार्ग्रेट हंसदा अपने महज 6 माह के शिशु को गोद में लेकर 13 किमी दूर ब्लॉक ऑफिस राशन की आस में जा पहुंची। मार्ग्रेट का पति चंदन बेंगलुरु में मजदूरी करता है जो तालाबंदी के कारण वहीं अटका है। पत्रकारों से बातचीत में मार्ग्रेट ने कहा कि उसे खुद की चिंता नहीं बल्कि बस दिन में 2 टाइम अपने बच्चे का पेट भरने की सबसे ज्यादा फिक्र सता रही है। उसे 6 माह के शिशु के अलावा एक बच्ची और 8 साल का बेटा भी है।

टूटे चावल से भर रहे पेट
तालाबंदी शुरू होने के बाद से मार्ग्रेट और उसके बच्चे राइस मिल के बाहर पड़े धान की भूसी छानकर उससे निकलने वाले टूटे चावल खाकर पेट भर रहे। उसने कहा कि उसके पास राशन कार्ड भी नहीं है। मार्ग्रेट जब गजोल ब्लॉक ऑफिस जा रही थी तो पुलिस ने रोक कर यहां आने का कारण पूछा। फिर बाद में पुलिस मार्ग्रेट को प्रभारी अधिकारी हरधन देव के पास ले गई और उन्होंने उसे राशन किट प्रदान की।

Shishir Sharan Rahi Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned