WEST BENGAL-लोभ कषाय का अभाव ही शौच धर्म

दिगम्बर जैन समाज 27 को करेगा उत्तम शौच धर्म की पूजा अर्चना

By: Shishir Sharan Rahi

Published: 26 Aug 2020, 04:51 PM IST

BENGAL NEWS: कोलकाता. दसलक्षण पर्व मनाते हुए दिगम्बर जैन समाज 27 अगस्त गुरुवार को उत्तम शौच धर्म की पूजा अर्चना करेगा। आचार्य विद्यासागर महाराज के शिष्य ब्रह्मचारी के.सी. जैन ने बुधवार को ये जानकारी दी। जैन ने बताया किलोभ पाप का बाप है इसलिए लोभ भी कषाय है। और लोभ कषाय के अभाव को ही शौच धर्म कहते हैं। मनुष्य लोभ कषाय के वशीभूत होकर अपने संतोष गुण को खोकर धन आदि के प्रलोभन से हिंसा, झूठ, चोरी, कुशील और परिग्रह रूप पाप में प्रवृत्ति करता रहता है। अति लोभी व्यक्ति अपने स्वास्थ्य आदि का बिगाड़ करके अनेक प्रकार के रोगों से ग्रसित हो जाता है। तृष्णा के वशीभूत मनुष्य सदा मानसिक वेदनाओं से ग्रसित रहता है। इसलिए जैन संत न्याय नीति रूप व्यापार आदि करने तथा आवश्यकता से अधिक संचय न करने का निरन्तर उपदेश देते हैं। शौच धर्म बताता है कि यद्यपि हमारा शरीर चर्म, हाड़, मांस, रक्त आदि अपवित्र वस्तुओं के निर्मित होता है फिर भी इसमें भगवद्स्वरूप आत्मा विराजमान रहता है। इस प्रकार इस देह से भिन्न जो अपनी शुद्धात्मा का निरन्तर ध्यान करता है वह क्रोध, मान, माया और लोभ रूप कषाय भावों से अपने आपको बचाना चाहता है।समस्त जगत अपनी आत्मा के पवित्र स्वरूप का चिन्तन कर सदा सुखी रहे, इसी भावना के साथ आज सम्पूर्ण जैन समाज समस्त जगत् में शान्ति की कामना करते हुए उत्तम शौच धर्म की पूजा अर्चना करता है।

Shishir Sharan Rahi Reporting
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