बंगाल में कोरोना की इन दो तस्वीरों को जरूर देखें

आपदा हमेशा दिल-दिमाग को झकझोरने वाली तस्वीरें सामने लाती है। बंगाल की ये दो तस्वीरें आपको जरूर झकझोरेंगी। एक तस्वीर जहां लॉकडाउन के कारण लोगों के घर पहुंचने की जद्दोजहद की बानगी है तो दूसरी घर पहुंच चुके लोगों का दर्द बताती है।

By: Paritosh Dube

Published: 29 Mar 2020, 12:27 PM IST

कोलकाता.
यकायक हुए लॉकडाउन के कारण मजदूरों के अपने गांव- शहर से सैकड़ों मील दूर फंसे रहने, पैदल ही घर की ओर बढऩे की यह तस्वीर खडग़पुर की है। शनिवार को महाराष्ट्र के मालेगांव के तीन परिवार, जिसमें ३-३ बच्चे और महिलाएं थे 250 किलोमीटर चलकर खडग़पुर पहुंचे। ९ जनों का यह समूह बर्दमान से पैदल ही निकला था। लोगों से यह समूह पूछ पूछकर हावडा -मुम्बई राष्ट्रीय राजमार्ग के सहारे आगे बढ़ रहे थे। इसी बीच खडग़पुर के जागरुक लोगों की उनपर नजर पड़ी। मामला सामने आया तो समाजसेवी नवीन अग्रवाल ने उनके खाने पीने की व्यवस्था की। वार्ड नम्बर 15 की पार्षद अंजना साखरे से सम्पर्क किया। पार्षद पहुंची, नौ जनों के गुरुद्वारा में रहने का और खानेपीने का प्रबंध किया गया। फिर स्थानीय पुलिस की मदद से उन्हें प्याज खालीकर महाराष्ट लौट रही ट्रक में शरण दिलाई। उनके राज्य की ओर रवाना किया। ट्रक में बैठने के बाद मासूम बच्चों की आखों में खुशी की लहर और पुरुष और महिलाओ के आंखो में मनवता के प्रति कृतज्ञता का भाव देखा गया।
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हाथियों पर नजर रखने की मचान में क्वारेंटाइन
पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के बलरामपुर में चेन्नई से लौटे मजदूर इन दिनों पेड़ों की मचान पर क्वारेंटाइन अवधि काट रहे हैं। हाथियों के उत्पात वाले इस इलाके में उनकी गतिविधियों पर नजर रखने व उनके हमले से बचने के लिए लोग पहले भी मचान में रहते थे। कोरोना संक्रमण से बचने के लिए क्वारेंटाइन में रहने की अन्य ग्रामीणों की सलाह पर चेन्नई से लौटे श्रमिकों ने वनगिडी गांव के बाहर पेड़ों की डालों पर मचान बनाई, मच्छरदानी टांगी और लोगों से बना ली सामाजिक दूरी।

Paritosh Dube Desk
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