West Bengal Assembly Elections 2021: माकपा ने अपनी कई परंपरागत सीटें पीरजादा को दी

राज्य कमेटी के एक नेता ने कहा कि गठबंधन को शक्तिशाली करने के लिए पार्टी ने यह त्याग किया है। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि माकपा ने आइएसएफ के लिए जो सीटें छोड़ी हैं, वहां अब उसका प्रभाव अब्बास सिद्दीकी की पार्टी से बहुत कम है। मौजूदा स्थिति को देखते हुए ही माकपा ने यह निर्णय लिया...

By: Ashutosh Kumar Singh

Updated: 17 Mar 2021, 10:47 PM IST

कोलकाता
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 (West Bengal Assembly Elections 2021) में अस्तित्व संकट से गुजर रही वाममोर्चा ने अपनी कई परंपरागत सीटें गठबंधन धर्म के नाम पर नवनिर्मित पार्टी इंडियन सेकुलर फ्रंट (आईएसएफ) को दे दी है। हुगली जिले के दरगाह फुरफुरा शरीफ के पीरजादा अब्बास सिद्दीकी (Peerzada Abbas Sidiqui) की पार्टी आईएसएफ ने ओवैसी का साथ छोड़ कर माकपा-कांग्रेस के साथ गठबंधन किया है। कांग्रेस 2016 में भी माकपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ी थी। उस समय भी उन्हें 92 सीटें ही दी गई थीं। कांग्रेस इसबार अतिरिक्त सीट की मांग कर रही थी, लेकिन वाम मोर्चा ने अतिरिक्त सीटें नहीं दी। हालांकि अल्पसंख्यक वोट बैंक पर दबदबा रखने का दावा करने वाले पीरजादे की धौंस के आगे माकपा रेंगती नजर आई है और अपनी कई परंपरागत सीटें उसकी झोली में डाल दी है,जिससे पार्टी के धर्मनिरपेक्ष रवैए को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं।
रायपुर, महिषादल, चंद्रकोना, कुलपी, मंदिरबाजार, जगतबल्लभपुर, हरिपाल, खानाकुल, मटियाब्रुज, उलबेरिया, राणाघाट उत्तर व पूर्व, कृष्णगंज, संदेशखाली, चापड़ा, अशोकनगर, आमडांगा, आसनसोल उत्तर, इंटाली, कैनिंग पूर्व, जंगीपाड़ा, मध्यमग्राम, हाड़ोआ, मयूरेश्वर और मगराहाट पूर्व सीटें शामिल हैं। इन सभी सीटों पर 2011 से पहले तक माकपा के विधायक थे। कैनिंग पूर्व से जीतकर अब्दुर रज्जाक मोल्ला लंबे समय तक मंत्री रहे थे। मेंटियाब्रुज से निर्वाचित होकर एक समय मोहम्मद अमीन मंत्री बने थे।
इसी तरह आमाडांगा से अब्दुस सत्तार वाममोर्चा सरकार के मंत्रिमंडल में थे। वहीं इंटाली से जीतकर हाशिम अब्दुल हलीम विधानसभा स्पीकर बने थे। सूत्रों के मुताबिक आआईएसएफ के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर पहले माकपा के जो नेता बातचीत कर रहे थे, वे इन सीटों को छोडऩे के लिए तैयार नहीं थे। दोनों दलों में बात बन नहीं पा रही थी इसलिए माकपा की तरफ से एक अन्य वरिष्ठ नेता को बातचीत में लगाया गया, जिन्होंने इन सीटों पर माकपा की मौजूदा स्थिति को देखते हुए आइएसएफ के लिए छोडऩे को पार्टी नेतृत्व को राजी कर लिया। माकपा दरअसल नहीं चाहती थी कि सीटों के विवाद को लेकर आइएसएफ से समझौता न हो पाए।
तृणमूल कांग्रेस के अल्पसंख्यक सेल के अध्यक्ष हाजी नुरूल इस्लाम ने कहा-'माकपा के कार्यकर्ता ही आइएसएफ में शामिल हुए हैं। आम लोगों के बीच माकपा की स्वीकार्यता खत्म हो गई है इसलिए अब वे लोग आइएसएफ के छद्म वेश में राजनीति कर रहे हैं।
इसपर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए माकपा की राज्य कमेटी के एक नेता ने कहा कि गठबंधन को शक्तिशाली करने के लिए पार्टी ने यह त्याग किया है। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि माकपा ने आइएसएफ के लिए जो सीटें छोड़ी हैं, वहां अब उसका प्रभाव अब्बास सिद्दीकी की पार्टी से बहुत कम है। मौजूदा स्थिति को देखते हुए ही माकपा ने यह निर्णय लिया।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021
Ashutosh Kumar Singh
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