पश्चिम बंगाल वन विभाग रख रहा जंगल के राजा पर नजर

सुंदरवन में उपग्रह, रेडियो सिग्नल की मदद से मानव बाघ संघर्ष का अध्ययन

By: Rajendra Vyas

Published: 12 Jan 2021, 06:09 PM IST

आशुतोष सिंह .

कोलकाता. सुंदरवन में मानव और बाघों के बीच संघर्ष के अध्ययन के लिए पश्चिम बंगाल का वन विभाग उपग्रहों और रेडियो सिग्नलों की मदद ले रहा है। हाल में पकड़े गए एक व्यस्क रॉयल बंगाल टाइगर के शरीर में सेटेलाईट रेडियो कॉलर फिट कर उसे जंगल में छोड़ा गया है। वन विभाग के अधिकारी एवं वन्यजीव विशेषज्ञ उसके मार्फत बाघों की हर पल की गतिविधि पर नजर रख रहे हैं।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार पहले बाघों में सेटेलाईट रेडियो कॉलर डाटा संग्रह करने के लिए लगाया जाता था। यह पहला मौका है जब सेटेलाईट रेडियो कॉलर का इस्तेमाल मानव और बाघों के बीच संघर्ष के अध्ययन के लिए किया जा रहा है।
सुंदरवन में बाघों के हमले मे होती है सर्वाधिक लोगों की मौत
पश्चिम बंगाल के दक्षिणी सिरे पर स्थित सुंदरवन में बाघों के हमले में सबसे अधिक लोगों की मौत होती है। पिछले साल 23 सितंबर को लोकसभा पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार 2015 और 2019 के बीच राज्य में कम से कम 62 लोग बाघों के हमले में मारे गए। 61 लोगों की मौत के साथ महाराष्ट्र दूसरा था।
सिकुड़ते जंगल के कारण बढ़ रहा है मानव-बाघ संघर्ष
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार आबादी के बढ़ते दबाव और पर्यावरण असंतुलन की वजह से जंगल सिकुड़ रहा है। इस कारण सुंदरवन की विभिन्न बस्तियों में रहने वाले लोग और बाघ एक-दूसरे से रोजाना जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।
लोग जंगल में केकड़ों, मछलियों और शहद को इक_ा करने के लिए घुसते हैं। वहां बाघ हमला कर देते हैं।
हाल में एक अध्ययन में इलाके के मैंग्रोव जंगलों के तेजी से घटने पर चिंता जताते हुए कहा गया है कि यही स्थिति रही तो वर्ष 2070 तक सुंदरवन बाघों के रहने के लायक नहीं बचेगा।
जल्द और कुछ बाघों में फिट किए जाएंगे सेटेलाईट रेडियो कॉलर
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार जल्द और कुछ बाघों में सेटेलाईट रेडियो कॉलर फिट किए जाएंगे। कम से कम और तीन बाघों मे सेटेलाईट रेडियो कॉलर फिट किया जाएगा।
इनका कहना है
इस पहल से बाघों, उनके आवास और मानव आबादी के प्रबंधन और सुरक्षा में मदद मिलेगी और साथ ही बाघों के व्यवहार और आवास उपयोग पैटर्न को समझने में मदद मिलेगी
विनोद कुमार यादव, विनोद कुमार यादव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक

Rajendra Vyas
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