WEST BENGAL-महालया पर आज गूंजेगा भद्र की खनकती आवाज में महिषासुरमर्दिनी पाठ

महालया के दिन से ही मूर्तिकार दुर्गा की आंखों को रंगना शुरू कर देते हैं, महालया आज स्वागत के लिए आ गए मेघ, पितृपक्ष का होगा समापन और शारदीय नवरात्र 7 से शुरू, बंगाल में महालया का खास महत्व, भोर में रेडियो पर महिषासुरमर्दिनी रचना सुनना बंगालियों के बीच दुर्गा पूजा अनुष्ठान में से एक, महालया के दिन ही मूर्तिकार मां दुर्गा की आंखें तैयार करते हैं। महालया के साथ ही दुर्गा पूजा की शुरुआत हो जाएगी...........

By: Shishir Sharan Rahi

Published: 06 Oct 2021, 04:23 AM IST

BENGAL MAHALAYA-कोलकाता। महानगर में बुधवार को महालया के स्वागत के लिए मंगलवार को आकाश मेघों से भर गया। सुबह मौसम सुहाना रहा पर अचानक दोपहर करीब एक बजे से घंटे भर बारिश हुई। देर शाम तक आसमान बादलों से ढका रहा। इस बीच बुधवार को महालया के दिन से ही पितृपक्ष का समापन होगा। इसके अगले दिन 7 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र शुरू होंगे। पश्चिम बंगाल में महालया का खास महत्व है। महालया के दिन ही मूर्तिकार मां दुर्गा की आंखें तैयार करते हैं। महालया के साथ ही दुर्गा पूजा की शुरुआत हो जाएगी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी महालया से ही मां दुर्गा के ‘चक्षु दान’ करेंगी। इस वर्ष शारदीय नवरात्र का प्रारंभ गुरुवार से हो रहा। किसी भी प्रकार की भद्रा आदि नहीं होने के कारण कलश स्थापना प्रथम प्रहर तक सुबह 6 से 11 बजे तक करना श्रेयस्कर हैं।श्रीराधे पंचांग के संपादक पं. मनीष पुरोहित ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
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महालया पर गूंजेगा भद्र की खनकती आवाज में महिषासुरमर्दिनी पाठ
महालया पर कोलकाता में रेडियो पर वीरेंद्रकृष्ण भद्र की खनकती आवाज में 90 मिनट लंबे महिषासुरमर्दिनी पाठ को सुनने का खास रिवाज है। 1931 में इस पाठ की रचना हुई थी। हर बंगाली परिवार का सदस्य सुबह 4 बजे उठकर यह पाठ सुनता है। भद्र की महिषासुर-मर्दनी का पाठ सुने बिना दुर्गा पूजा की शुरुआत बंगाल में नहीं मानी जाती। ये परंपरा पिछले 80 साल से अधिक समय से चली आ रही है। लोग महालया के दिन सुबह 4 बजे ही उठ जाते हैं और पाठ सुुनने अपनेे रेडियो सेट खोलकर बैठ जाते हैं।

WEST BENGAL-महालया पर आज  गूंजेगा भद्र की खनकती आवाज में महिषासुरमर्दिनी पाठ

........चक्खुदान..........

बंगाल में इस अनुष्ठान को चक्खुदान के नाम से जाना जाता है। देवी को चक्खुदान के बाद जागने और अपनी आंखें खोलने की प्रार्थना के साथ बुलाया जाता है। महालया के दिन से ही मूर्तिकार दुर्गा की आंखों को रंगना शुरू कर देते हैं।

Shishir Sharan Rahi Reporting
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