बंगाल के मंत्री डॉ. अमित मित्रा का दावा, एलआईसी को इस तरह निजीकरण करने जा रही नरेन्द्र मोदी सरकार

केंद्र सरकार भारतीय जीवन बीमा निगम(एलआईसी)को निजीकरण करने की दिशा में चल पड़ी है। इसके लिए उसकी गलत आर्थिक नीतियां पूर्णरूप से जिम्मेवार है।

कोलकाता.
केंद्र सरकार भारतीय जीवन बीमा निगम(एलआईसी)को निजीकरण करने की दिशा में चल पड़ी है। इसके लिए उसकी गलत आर्थिक नीतियां पूर्णरूप से जिम्मेवार है। पश्चिम बंगाल के वित्त व उद्योग मंत्री डॉ. अमित मित्रा ने सोमवार को वित्त विधेयक, 2020 पर अपने जवाबी भाषण में उन्होंने ऐसा कहा।

उन्होंने कहा कि मार्च 2015 में एलआईसी का गैर निष्पादित सम्पत्ति (एनपीए) 12,213 करोड़ रुपए थी। जो सितम्बर 2019 में बढ़ कर 30,000 करोड़ तक पहुंच गई। एनपीए का बढऩा संस्थान के डूबने का संकेत है। केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों में विनिवेश के लिए जबरन एलआईसी की रकम का इस्तेमाल किया है। यही नहीं एलआईसी को भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड(भेल) का 2600 करोड़ रुपए तथा कोल इंडिया लिमिटेड का 7000 करोड़ रुपए का शेयर खरीदा गया।

डॉ. मित्रा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार गहरी साजिश के तहत एलआईसी को निजीकरण करना चाह रही है। केंद्र फेडरलिज्म को तोड़ मरोड़ रही है। वित्त मंत्री ने दावा किया कि देश में मंदी के बावजूद पश्चिम बंगाल अपने वित्तीय घाटे को कम करने तथा राजस्व वसूली में अग्रणी रहा है।
बंगाल को आर्थिक रूप से कमजोर करने की साजिश:
वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार अपने अवमूल्यन (डिवैल्यूएशन) नीति के तहत बंगाल को आर्थिक रूप से कमजोर कर रही है। आयकर और कॉरपोरेट टैक्स के जरिए केंद्र राज्य से ४४ फीसदी वसूलती है और राज्यों को ४२ फीसदी राशि लौटाती है। २०२०-२१ के आमबजट में केंद्र ने कश्मीर को मदद करने का हवाला देते हुए एक फीसदी कटौती कर दी। बंगाल को राजस्व के एवज में २०१९-२० में केंद्र का बजट आकलन ५९,२६० करोड़ रु थी जो संशोधित बजट में 11,000 रुपए कम कर 48,000 करोड़ कर दिया। जबकि 2018-19 में बंगाल को केंद्र से 55,775 करोड़ रुपए पाया था। 2019-20 में केंद्र ने इस पर जबरदस्त कैंची चलाते हुए 48,848 करोड़ ही बंगाल को देने का निर्णय किया है। गत 2 वित्त वर्ष के मुकाबले बंगाल को 7726 करोड़ कम कर दिया है।

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Prabhat Kumar Gupta Reporting
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