BENGAL LOCKDOWN EFFECT-लॉकडाउन और अम्फान ने लाई बाल विवाह में तेजी

पश्चिम बंगाल में 16 अप्रैल से जून के मध्य तक 198 बाल विवाह की शिकायतें दर्ज, अम्फान प्रभावित जिले दोनों 24 परगना जिले में

By: Shishir Sharan Rahi

Updated: 26 Jun 2020, 04:42 PM IST

BENGAL LOCKDOWN EFFECT: कोलकाता. पश्चिम बंगाल में लॉकडाउन के दौरान सैकड़ों बाल विवाह मामले सामने आए हैं। पश्चिम बंगाल में 16 अप्रैल से जून के मध्य तक 198 बाल विवाह की शिकायतें दर्ज हुई। प्रदेश में हाल ही आए सुपर साइक्लोन अम्फान प्रभावित जिले दोनों 24 परगना जिले में ऐसे मामले अधिक हुए। खासकर दक्षिण और उत्तर 24 परगना में बाल विवाह के ऐसे मामलों के सामने आने पर राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एससीपीसीआर) ने गहरी चिंता जताई है। पश्चिम बंगाल में मई में आए सुपर साइक्लोन अम्फान के बाद बाल विवाह मामले तेजी से बढ़े। दोनों परगनों से ऐसी संख्या चौंकाने वाली रही। 16 अप्रैल से 15 जून के बीच दक्षिण 24 परगना ने अकेले बाल विवाह के 66 प्रयासों की सूचना दी जबकि उत्तर 24 परगना ने 63 पंजीकृत किए। उनमें से चाइल्डलाइन ने अकेले दक्षिण में 43 और उत्तर में 39 की सूचना दी। एससीपीसीआर की हेल्पलाइन ने 23 जून तक 22 मामलों की सूचना दी जो जिला बाल संरक्षण अधिकारियों और चाइल्डलाइन को दिए गए। एससीपीसीआर की विशेष सलाहकार सुदेशना रॉय ने कहा कि उत्तर 24 परगना में 54 और दक्षिण 24 परगना में 60 विवाह रोका जा सका। कन्याश्री परियोजना इसमें एक वरदान साबित हुई। रॉय ने कहा कि हमने पाया कि दो मुद्दे थे या तो माता-पिता बहुत गरीब हैं और उनका मानना है कि बच्चों की शादी करने से उन्हें अपनी जिम्मेदारी से छुटकारा मिल जाएगा। बंगाल पहले भी बाल विवाह के लिए सुर्खियों में रहा है। बीच में यह सिलसिला थम गया था लेकिन लॉकडाउन और अम्फान के बाद इसमें तेजी आई। कई मामले ऐसे हैं जिनकी शिकायत पुलिस प्रशासन तक नहीं पहुंची। नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस) की ताजा रिपोर्ट में इस मामले में बंगाल को अव्वल बताया गया था। हाईकोर्ट की खंडपीठ की ओर से सरकार से ऐसे मामले रोकने के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश के बाद राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया। आयोग में बाल विवाह और बाल तस्करी मामले देखने वाले आयोग की विशेष सलाहकार सुदेष्णा राय ने कहा कि अब तक 198 शिकायतें मिली हैं। जांच के बाद इनमें से 134 शिकायतें सही पाई गईं। शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए उत्तर 24 परगना जिले में 54 और दक्षिण 24 परगना जिले में बाल विवाह के 60 मामलों रोकने में कामयाबी मिली। आयोग की अध्यक्ष अनन्या चटर्जी चक्रवर्ती के अनुसार 2 जून को हेल्पलाइन शुरू की गई उसके बाद अब तक बाल विवाह और बाल तस्करी की सैकड़ों शिकायतें मिली।

इसलिए कम उम्र में शादी हो रही
कोरोना से जारी लॉकडाउन और अम्फान ने ज्यादातर लोगों का रोजगार छीन लिया है और ऐसे में बाल विवाह और तस्करी बढऩे लगी। आयोग का कहना है कि बाल विवाह के ज्यादातर मामलों में लड़कियों को दूसरे शहरों में ले जाकर कोठों पर बेच दिया जाता है। लड?ी के गरीब मां-बाप के पास इसकी जानकारी हासिल करने का कोई उपाय नहीं होता और डर के मारे वे पुलिस के पास भी नहीं जाते। अचानक बाल विवाह के मामले में तेजी पर सुदेष्णा ने कहा कि 2 प्रमुख वजहों की जानकारी मिली। लड?ी के माता-पिता गरीबी के चलते बाल विवाह कर जिम्मेदारी मुक्त होना चाहते हैं। जबकि कुछ मामलों में गरीबी से तंद आकर उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद में लड?ी ही किसी के साथ भाग जाती है। बाल अधिकार औऱ बाल तस्करी के मुद्दे पर काम करने वाले संगठनों का कहना है कि राज्य के ग्रामीण इलाकों में कम उम्र में विवाह की परंपरा बरसों से जारी है। लाकडाउन ने रोजगार छीन लिया और बाकी कसर अम्फान ने पूरी कर दी। इसलिए लड़कियों की कम उम्र में ही शादी हो रही।

Shishir Sharan Rahi Reporting
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