BENGAL NEWS-जीवन और जीविका दोनों का रखना होगा ध्यान--शर्मा

अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन की कोरोना-मानसिक चुनौतियां, सामाजिक सम्भावनाएं विषयक वीडियो संगोष्ठी

By: Shishir Sharan Rahi

Updated: 29 Jun 2020, 02:38 PM IST

BENGAL NEWS-कोलकाता. कोरोना वायरस ने सम्पूर्ण विश्व के सामाजिक—आर्थिक व्यवस्था पर गम्भीर संकट खड़ा कर दिया है। हमें जीवन और जीविका दोनों का खास ध्यान रखना होगा। लोग कठिन तनाव की स्थिति से गुजर रहे लेकिन हम साथ मिलकर इन सभी समस्याओं का सामना कर सकते हैं। अर्थव्यवस्था जिस तेजी से गिरी है, उसी तेजी से उभरेगी। अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं समाजचिंतक सीताराम शर्मा ने यह उद्गार व्यक्त किए। सम्मेलन की ओर से आयोजित कोरोना-मानसिक चुनौतियां एवं सामाजिक सम्भावनाएं विषयक वीडियो संगोष्ठी में शर्मा ने यह विचार व्यक्त किए। शर्मा ने कहा कि मनुष्य कभी इतना लाचार नहीं हुआ था। एक छोटे से वायरस ने सम्पूर्ण विश्व को घुटनों पर ला दिया। दुनिया के समस्त विकसित राष्ट्र,परमाणु—सम्पन्न शक्तियां जो दुनिया को जीतने का दम्भ भरती थी, जिन्होंने अपनी समझ में सारे तकनीक विकसित कर लिए थे, वो भी आज उतने ही लाचार और बेबस हैं जितने कि पिछड़े राष्ट्र। उन्होंने कहा कि महामारी से एक तरफ जहां मानसिक तनाव बढ़ा है, वहीं दूसरी तरफ जीविका की चिन्ता भी लोगों को सता रही है। अपनों से दूरी किसी से मिलने में भय, एकाकी जीवन, आदि ने सभी विशेषकर बुजुर्गों को बहुत प्रभावित किया है। मध्यम वर्ग में आर्थिक असुरक्षा की भावना बढ़ गई है। तनाव एवं आर्थित तंगी की वजह से हाल के दिनों में घरेलू हिंसा में भी बढ़ोतरी देखी गई है। मानसिक तनाव पर नियंत्रण के लिए मानसिक रूप से मजबूतरहना होगा। साथ ही, इसके लिए परिवार के साथ मिल—बैठकर अच्छा समय व्यतीत करने, मित्रों एवं निकटस्थों से सम्पर्क बनाये रखने, अफवाहों एवं नकारात्मक लोगों से दूर रहने, सोशल मीडिया का सीमित प्रयोग करने, हल्के—फुल्के कॉमेडी के कार्यक्रम एवं पसन्द की फिल्में देखने आदि को उन्होंने कारगर कदम बताया। कोरोना के सकारात्माक परिणामों की चर्चा करते हुए शर्मा ने कहा कि लोगों के रहन—सहन, खान—पान एवं दिनचर्या में बदलाव आया है, स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी है। धर्म के प्रति लोगों में आस्था बढ़ी है। युवावर्ग अपनी सभ्यता—संस्कृति तथा परम्परागत तौर—तरीकों के विषय में जागरूक हुआ है। प्रकृति के प्रति लोगों के नजरिये में भी बदलाव आया है और लोग समझने लगे हैं कि प्रकृति से छेड़—छाड़ देर—सबेर मुसीबत का कारण बन सकता है।

समस्याओं से जूझना और समाधान निकालना मारवाडिय़ों की प्रवृति

संगोष्ठी का सभापतित्व करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष सर्राफ ने अपने वक्तव्य में सबसे पहले सभी उपस्थितों का स्वागत किया और सम्मेलन की हालिया गतिविधियों के विषय में संक्षेप में बताया। उन्होंने कहा कि सम्मेलन ने अपनी परम्परा के अनुसार, इस विपदा की घड़ी में भी तन—मन—धन से संसाधनहीन वर्ग कीसहायता की है। सराफ ने कहा कि समस्याओं से जूझना और उनका समाधान निकालना मारवाडिय़ों की प्रवृति रही है और कोरोना को पराजित करने में हमारा समाज एकमहती भूमिका निभा रहा। सम्मेलन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रह्लाद राय अगरवाला एवं रामअवतार पोद्दार ने कोरोनाजनित परिस्थितियों में सम्मेलन के उठाये जा रहे कदमों की प्रशंसा की। प्रादेशिक अध्यक्षों विनोद तोदी (बिहार), गोविन्द अग्रवाल (ओडिशा), लक्ष्मीपत भूतोडिय़ाा (दिल्ली), नंद किशोर अग्रवाल (पश्चिम बंग), सुभाष अग्रवाल (कर्नाटक), अशोक मूंधड़ा (तमिलनाडु), रमेशचन्द्र बंग (महाराष्ट्र), प्रादेशिक महामंत्री राजकुमार तिवाड़ी (पूर्वोत्तर) ने अपने—अपने राज्यों में किए जा रहे सहायता—कार्यों का विवरण दिया। राष्ट्रीय उपाध्यक्षों गोवर्धन प्रसाद गाड़ोदिया, पवन गोयनका, अनिल जाजोदिया, पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कमल नोपानी एवं संयुक्त राष्ट्रीय महामंत्री संजय हरलालका ने भी अपने विचार एवं सुझाव प्रस्तुत किए। धन्यवाद—ज्ञापन करते हुए राष्ट्रीय महामंत्री श्रीगोपाल झुनझुनवाला ने कहा कि महामारियां अतीत में भी आई हैं और भविष्य में भी आयेंगी। महत्वपूर्ण यह है कि हम इनका सामना कैसे करते हैं। संगोष्ठी में पूरे देश से सम्मेलन के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने भाग लिया।

Shishir Sharan Rahi Reporting
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