SAMARPAN-DIWAS----समर्पण दिवस के रूप में मनाई दीनदयाल की पुण्यतिथि

गरीबों के कल्याण के प्रति समर्पित, अंत्योदय का प्रेरणा स्रोत बताते हुए उनके स्वप्न को साकार करने का संकल्प

By: Shishir Sharan Rahi

Published: 12 Feb 2021, 09:17 PM IST

BENGAL NEWS-कोलकाता। भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि 11 फरवरी को समर्पण दिवस के रूप में मनाई गई। नेताजी सुभाष रोड व कैनिंग रोड क्रॉसिंग पर राज्य भाजपा चुनाव कार्यालय सह प्रभारी भोला प्रसाद सोनकर समेत वार्ड 45 भाजपा कार्यकर्ताओं ने उपाध्याय की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। उन्हें गरीबों के कल्याण के प्रति समर्पित, अंत्योदय का प्रेरणा स्रोत बताते हुए उनके स्वप्न को साकार करने का संकल्प लिया।पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चिंतक (चिन्तक) और संगठनकर्ता थे। वे भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने भारत की सनातन विचारधारा को युगानुकूल रूप में प्रस्तुत करते हुए देश को एकात्म मानववाद नामक विचारधारा दी। वे एक समावेशित विचारधारा के समर्थक थे जो एक मजबूत और सशक्त भारत चाहते थे। राजनीति के अतिरिक्त साहित्य में भी उनकी गहरी अभिरुचि थी। उन्होंने हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं में कई लेख लिखे, जो विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए।पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितम्बर १९१६ को मथुरा जिले के नगला चन्द्रभान ग्राम में हुआ था। उनके पिता का नाम भगवती प्रसाद उपाध्याय था, जो नगला चंद्रभान (फरह, मथुरा) के निवासी थे। उनकी माता का नाम रामप्यारी था, जो धार्मिक प्रवृत्ति की थीं। पिता रेलवे में जलेसर रोड स्टेशन के सहायक स्टेशन मास्टर थे। रेल की नौकरी होने के कारण उनके पिता का अधिक समय बाहर ही बीतता था। कभी-कभी छुट्टी मिलने पर ही घर आते थे। दो वर्ष बाद दीनदयाल के भाई ने जन्म लिया, जिसका नाम शिवदयाल रखा गया। पिता भगवती प्रसाद ने बच्चों को ननिहाल भेज दिया। उस समय उपाध्याय जी के नाना चुन्नीलाल शुक्ल धानक्या (जयपुर) में स्टेशन मास्टर थे।

Shishir Sharan Rahi Reporting
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