विदेशों में बिखेर रहे रोशनी, बंगाल के बाबू दा

Lights scattered abroad, babu da of bengal--रोशन किया बिग-बी से अंबानी तक का आशियाना..चंदननगर के बाबू दा ने अपने बूते बनाया मुकाम

कोलकाता/हुगली. कभी फ्रांसीसी उपनिवेश रहा पश्चिम बंगाल के हुगली जिले का चंदननगर आज अपनी जगद्धात्री पूजा व प्रकाश-सज्जा (लाइटिंग) के लिए देश-दुनिया में मशहूर है। यहां की लाइटिंग से बॉलीवुड के बिग-बी के आशियाना जलसा से उद्योगपति मुकेश अंबानी का गगनचुंबी आवास तक खास मौकों पर रोशन हो चुका है। बॉलीवुड अदाकारा प्रियंका चोपड़ा ने 2018 में जब जोधपुर में शादी रचाई थी तब चंदननगर की लाइटिंग से ही उम्मेद भवन पैलेस दुल्हन की तरह सजा था। यह अद्भुत जगमगाहट लाइट आर्टिस्ट बाबू पाल की देन थी। चंदननगर के बाबू दा ने अपने बूते यह मुकाम बनाया और आज 40 लोगों को रोजगार मुहैया कर रहे। जब भी चंदननगर की लाइटिंग चर्चा होती है तो पहला नाम बाबू का आता है। कोलकाता में दुर्गा पूजा से पार्क स्ट्रीट में क्रिसमस पर अद्भुत थीम वाली लाइटिंग जगमगाहट बाबू पाल की ही देन है। इसी शहर ने बिजली चलित चुनीलाइट से एक से एक कलााकृति बनाने में महारत हासिल की जब ६० के दशक में इस शहर ने विश्व में बिजली लाइट में अपनी अलग पहचान बनाई। चंदननगर के चर्चे सिर्फ देश में नहीं विदेशों में होते हैं जिसकी वजह यहां होने वाली विश्वविख्यात दुर्गा-काली-जगद्धात्री--कार्तिक पूजा जिसमें यहां की सडक़ें इन्ही लाइट से गुलजार होती है। देश-विदेश से लोग यहां की लाइट से बनी कलाकृतियों को देखने आते हैं। सबसे पहले ६० के दशक में श्रीधर दास नामक कलाकार ने टुनि बल्ब के जरिये एक चरखे बनाकर लाइट की दुनिया में एक नया अविष्कार किया। इसके बाद लगातार लाइट की दुनिया में रेल हादसों, ब्रिज हादसों, हेरिटेज बिल्डिंग आदि लाइट की कलाकृति बना अपनी पहचान बनाई उनके यहां 300 से अधिक कारीगर काम किया करते थे और उन्हीं में से एक हंै बाबूपाल। श्रीधर दास का नाम आज विलुप्तीकरण के कगार पर है वहीं आज बाबू पाल ने श्रीधर के नक्शे कदम पर चल देश-दुनिया मे अपनी खास पहचान बनाई।

2016 दिवाली में बिग-बी के घर बिखेरी थी रोशनी

बाबू ने 2016 की दिवाली पर बिग-बी अमिताभ बच्चन के बंगले जलसा को मांगलिक थीम से सजाया था। फिर 2017 में मुकेश अंबानी के निवास स्थल एंटीलिया के गलियारे की प्रकाश-सज्जा की। इसके बाद प्रियंका चोपड़ा की शादी में भी बत्तियों की कारीगरी दिखाने का मौका मिला। बाबू पाल का प्रकाश-सज्जा की दुनिया में आना महज संयोग था। उनकी 3 पीढ़ी लोहा व्यवसाय से जुड़ी थी पर वे कुछ नया करना चाहता था। शुरुआत में परेशानियां आईं लेकिन वे पीछे मुडक़र नहीं देखे।

सालाना 100 करोड़ का व्यवसाय

चंदननगर में 150 से अधिक रजिस्टर्ड लाइट आर्टिस्ट हैं। यहां सालभर में 100 करोड़ का व्यवसाय होता है। पहले बारात में प्रयोग में लाए जाने वाली गैस लाइट की उत्पत्ति यहीं हुई थी। बाबू पाल को 1998 में दुबई में शॉपिंग फेस्टिवल के लिए काम करने मौका मिला। उन्होंने वहां भारतीय संस्कृति की थीम पर प्रकाश-सज्जा की थीस इटली के दूतावास को आलोकित किया। दक्षिण अफ्रीका में भी काम किया।

Shishir Sharan Rahi Reporting
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