कितने लोगों का रोजगार छिनेगी जेम्स एण्ड ज्वेलरी उद्योग पर छाई मंदी

West Bnegal: recession Jems and jewellery industry देश के विरासत उद्योग जेम्स एण्ड ज्वेलरी उद्योग पर छाने लगी है मंदी

By: Manoj Singh

Updated: 10 Sep 2019, 11:08 PM IST


आयात ड्यूटी बढ़ाने से छाई मंदी दूर करने के लिए स्वर्ण उद्यमी संगठनों ने की मांग
कोलकाता
केन्द्र सरकार के सोने पर आयात ड्यूटी बढ़ाने से देश के विरासत उद्योग जेम्स एण्ड ज्वेलरी उद्योग पर मंदी छाने लगी है। इसके साथ ही इस उद्योग से जुड़े लाखों सोने के कारीगरों के रोजगार पर खतरों का बादल छाने लगे हैं, जिससे सबसे अधिक पश्चिम बंगाल प्रभावित हो रहा है।

इस उद्योग के पूर्नोथान और स्वर्णकारों के रोजगार बचाने के लिए ऑल इंडिया जेम्स एण्ड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल (जीजेसी) सहित स्वर्ण उद्यमी संगठनों ने केन्द्र की मोदी सरकार-2 से एक सम्पूर्ण पैकेज देने की मांग की है। इस पैकेज में सोना पर बढ़ाए गए आयात शुल्क के साथ जीएसटी घटाने और नीति में भी परिवर्तन करने की मांग शामिल हैं।
जीजेसी के वाइस चेयरमैन शंकर सेन ने कहा कि जेम्स एण्ड ज्वेलरी पर छाई मंदी केन्द्र सरकार की नीति का नतीजा है। केन्द्र ने सोना पर आयात शुल्क 10 प्रतिशत से बढ़ा कर 12.5 प्रतिशत कर दिया है और एक प्रतिशत बिक्रय कर हटा कर तीन प्रतिशत जीएसटी लागू किया है। वर्ष 2017-18 में भारत में 650 मेट्रिक टन सोना आयात किया गया था। लेकिन पिछले दो महीने में पिछले साल की तुलना में 60 प्रतिशत सोना का आयात घट गया है।

उन्होंने कहा कि इस कारण ग्रे-बाजार में प्रति 10 ग्राम सोने की कीमत में 2800 रुपए का फर्क हो गया है, जिसका सोने के गहने खरीदने वाले ग्राहकों पर नाकारात्म प्रभाव पड़ा है। बाजार से ग्राहक गायब होने लगे है और जेम्स एण्ड ज्वेलरी उद्योग कोमा जा रहा है। सरकार की नीतियों के कारण यह सब हुआ है। इस लिए सरकार इस उद्योग के हित के लिए एक सम्पूर्ण नीति लागू करे। वे इस दिन जीजेसी की ओर से आयोजित संवाददाता सम्मेलन में बोल रहे थे।
शंकर सेन ने कहा कि उद्योग को बचाने के लिए हम लोग केन्द्र सरकार से एक पैकेज देने की मांग कर रहे हैं, जिसमें सोने पर आयात शुल्क घटा कर 10 प्रतिशत, जीएसटी कम करने की मांग के साथ सरकारी नीति में परिवर्तन कर ईएमआई पद्धति लागू करने की मांग शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि हम लोग केन्द्र सरकार से स्वर्ण मुद्राकरण को कार्यान्वित करने की मांग कर रहे हैं, क्योंकि स्वर्ण मुद्रीकरण योजना (जीएमएस) ही सोने का आयात का विकल्प बन सकती है। इसके तहत देश के लोगों में बेकार पड़े 20 लाख टन सोने को बाजार में लाना है।
सबसे अधिक प्रभावित होगा बंगाल
इस दौरान जीजेसी के क्षेत्री कमेटी सदस्य श्रीपाल ढोलकिया ने कहा कि देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में जेम्स एण्ड ज्वेलरी की भागीदारी सात प्रतिशत है। इसके बावजूद केन्द्र सरकार जान-बूझ कर मुश्किल में डाल रही है। सरकर की नीति यह उद्योग कोमा में चला जा रहा है। अगर सरकार इस पर ध्यान नहीं देगी तो यह उद्योग समाप्त हो जाएगा। इसके साथ ही इस उद्योग से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रुप से जुड़े करीब एक करोड़ लोगों से रोजगार छिन जाएगा। इसका सबसे अधिक प्रभाव बंगाल पर पड़ेगा, क्योंकि देश का 80 प्रतिशत स्वर्णकार बंगाल के हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार ने आय बढाने के लिए आयात शुल्क बढ़ाया है, लेकिन आयकर विभाग के अनुसार पिछले दो से तीन महीने में जेम्स एण्ड ज्वेलरी उद्योग से सरकार को प्राप्त होने वाले आमदनी भी घट गया है।
हॉल मार्क केन्द्रों में 60 प्रतिशत काम घटा
इंडियन एसोसिएशन ऑफ हालमार्किंग सेन्टर के अध्यक्ष ने कहा कि देश में 827 हालमार्क केन्द्र हैं। इसमें से 100 बंगाल में हैं, जिनमें 60 प्रतिशत काम कम हो गया है। इस कारण इसमें काम करने वाले भी बेकार हो जाएंगे।

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Manoj Singh Reporting
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