जब सीएम रास्ते में चूल्हे पर चढ़ी सब्जी को पकाने लगीं

बीरभूम जिले के दौरे से लौटने के दौरान बुधवार को मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी का एक अलग रूप देखा गया। वह चाय की एक दुकान पर पहुंची, पहले चाय पी, फिर अचानक चूल्हे पर चढ़ी सब्जी को पकाने लगीं। सब्जी पकाते हुए ही उन्होंने दुकानदार व स्थानीय लोगों की समस्याएं सुनीं और उनके समाधान का आश्वासन दिया।

By: Rabindra Rai

Published: 30 Dec 2020, 11:07 PM IST

अलग छवि: तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता का दिखा अलग रूप
लोगों की समस्याएं सुनीं और समाधान का दिया आश्वासन
बोलपुर. बीरभूम जिले के दौरे से लौटने के दौरान बुधवार को मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी का एक अलग रूप देखा गया। वह चाय की एक दुकान पर पहुंची, पहले चाय पी, फिर अचानक चूल्हे पर चढ़ी सब्जी को पकाने लगीं। सब्जी पकाते हुए ही उन्होंने दुकानदार व स्थानीय लोगों की समस्याएं सुनीं और उनके समाधान का आश्वासन दिया। कोलकाता लौटते समय पर वल्लभपुरडांगा गांव पहुंची। मोड़ पर बाबू और मेनका की चाय दुकान है। ममता दुकान में पहुंचीं। मुख्यमंत्री को देखने के लिए लोगों की भीड़ जमा हो गई। बातचीत में स्थानीय लोगों ने उन्हें गांव में शौचालय नहीं होने, सड़कों की हालत खराब होने और बिजली की सुविधा नहीं होने के बारे में बताया। ममता ने उनकी बातों को ध्यान से सुना और अपने साथ मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों को उनका समाधान करने का निर्देश दिया।
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पानी की नहीं अब बिजली की समस्या
दुकान की मालकिन मेनका ने बताया कि चाय पीने के बाद दीदी ने मुझे 500 रुपए दिए। मैंने उनसे कहा कि चाय का मूल्य इतना नहीं है। इसपर उन्होंने कहा कि रख लो, मिठाई खा लेना। वहीं मेनका के पति बाबू ने कहा कि इलाके में पहले पानी की समस्या थी। सात साल पहले तीन किलोमीटर दूर जाकर पानी लाना पड़ता था। हमने इसकी किसी तरह दीदी को जानकारी दी थी। उसके बाद गांव में नलकूप लगाया गया था, जिससे पानी की समस्या दूर हो गई। अभी बिजली की व्यवस्था नहीं है। हमने दीदी को इस बारे में भी बताया है। उन्होंने इस समस्या का भी जल्द समाधान करने का आश्वासन दिया है।
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बच्चे को दिए पांच सौ
मुख्यमंत्री पास स्थित चंदना की चाय दुकान में भी गईं। उन्होंने दुकान में बैठे एक बच्चे को 500 रुपए दिए। चंदना ने भी मुख्यमंत्री को बिजली की समस्या के बारे में बताया। ममता ने उसे भी इस समस्या को दूर करने का भरोसा दिया।

Rabindra Rai Editorial Incharge
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