Sushma sWARAJ: जब सुषमा ने आडवाणी की रथयात्रा में बंद करवाया बड़े नेताओं के भाषण

Sushma sWARAJ: जब सुषमा ने आडवाणी की रथयात्रा में बंद करवाया बड़े नेताओं के भाषण

Manoj Kumar Singh | Updated: 07 Aug 2019, 11:16:31 PM (IST) Kolkata, Kolkata, West Bengal, India

बंगाल में कैसे समय से चलने लगा था लेट लतीफ राम रथ

 

ईमानदार और उदार होने के साथ आदर्शवादी और अपने काम के प्रति समर्पित थी शुषमाजी - राहुलिस सिन्हा
कोलकाता

अयोध्या आंदोलन को देश भर में फैलाने के लिए तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी 12 सितंबर 1990 में सोमनाथ से राम रथ यात्रा शुरू कर पश्चिम बंगाल पहुंचे थे। बंगाल में पहुंचने के बाद रथ यात्रा लेट लतीफ हो गई, तब सुषमा स्वराज ने पार्टी के सभी केन्द्रीय नेताओं के भाषण बंद करवा कर रथयात्रा को समय से चलवाया था।
तब सुषमा स्वराज रथयात्रा की राष्ट्रीय संयोजक और भाजपा नेता राहुल सिन्हा उनके सहयोगी राज्य संयोजक थे। सिन्हा के बनाए रूट पर आडवाणी बंगाल में रथ यात्रा कर रहे थे, लेकिन कम्युनिस्ट शासन होने के बावजूद लोगों की भीड़ होने के कारण बंगाल में पहुंचने के बाद रथ यात्रा लेट लतीफ होने लर्गी। रोज रथ यात्रा सुबह समय से शुरू होती थी, लेकिन रात को निर्धारित समय पर कभी भी नहीं रुकती थी। रोज रात 9 बजे रथ को पड़ाव डालना था, लेकिन रोज रात एक से डेढ़ बज जाता था।

लेकिन जब आडवाणी का राम रथ रात 9 बजे की जगह दो बजे कोलकाता पहुंचा तो सुषमा स्वराज राहुल सिन्हा से नाराज हो गई। राहुल सिन्हा बताते हैं कि रथ के देर से आने पर आडवाणी के सामने सुषमा स्वराज उन पर नाराज हो गई। उस समय पार्टी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व केन्द्रीय मंत्री तपन सिकदर भी थे। उन्होंने थोड़ा झुझलाते हुए हमसे पूछा कि कैसा रुट बनाए हो कि रथ के गंतव्य स्थल पर पहुंचने में रोज देर हो जा रही है। गुस्सा होने पर भी उनकी भाषा में मिठास और नरमी थी।
सिन्हा बताते हैं कि जब उन्होंने बताया कि कि भीड़ देख कर केन्द्रीय नेता लम्बा-लम्बा भाषण दे रहे हैं और समय का ध्यान नहीं रख रहे हैं, तो सुषमा जी समझ गई। उन्होंने आडवाणी जी से कहा कि रोज देर हो रही है तो आप बीमार पड़ जाएंगे और रथ यात्रा पूरी नहीं कर पाएंगे। इस लिए रथ यात्रा के दौरान भाषण देते समय केन्द्रीय नेता समय का ध्यान रखे या उनके भाषण रद्द कर सिर्फ आप भाषण दीजिए।

सिन्हा बताते हैं कि आडवाणी ने सुषमा की बात सरलता से स्वीकार कर ली। सिन्हा बताते हैं कि सुषमा जी ईमानदार और उदार होने के साथ आदर्शवादी और काम के प्रति समर्पित थी। उन्होंने कभी समझौता नहीं किया।

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