जहां खोखले साबित होते हैं नेताओं के दावे, जाने जगह और वहां के हालात को...

जहां खोखले साबित होते हैं नेताओं के दावे, जाने जगह और वहां के हालात को...

Ashutosh Kumar Singh | Publish: May, 18 2019 05:29:36 PM (IST) Kolkata, Kolkata, West Bengal, India

  • न ही चलने के लिए सड़क। न शौचालय की व्यवस्था। लोग गड्ढे और तालाब का पानी पीने को मजबूर...

कोलकाता

देश में 17 वां लोकसभा चुनाव चल रहा है। चुनाव जीतने के लिए सभी पार्टियां तरह-तरह के दावे कर रही हैं। कोई पार्टी देश के चहुमुखी विकास करने का भरोसा दिला रही है तो कई पिछले पांच सालों में खुद की ओर से किए गए विकासमूलक कार्यों को का ढिंढोरा पीट रही है। लेकिन, कुछ स्थान ऐसे भी है, जहां के हालात राजनीतिक पार्टियों के सारे दावे झूठे साबित करते हैंं। वहां न तो लोगों के पीने के लिए शुद्ध पेयजल की व्यवस्था है और न ही चलने के लिए सड़क। न शौचालय की व्यवस्था है और न ही प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र। वैसा ही एक इलाका पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले की पुष्टी ग्राम पंचायत में है। ग्राम पंचायत के दो गांव बोरतार और मधुपुर गांव के करीब 500 लोग बुनियादी सुविधाओं से वचित हैं। लोग गड्ढे और तालाब का पानी पीने को मजबूर हैं। सड़क नहीं है , न ही प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और न ही आंगनबाड़ी केन्द्र। सिंचाई का कोई साधन नहीं है। किसान बारिश पर निर्भर हैं। गरीबी चरम पर है।
उक्त दोनों गांवों के लोगों में लोकतंत्र के महापर्व को लेकर कोई उत्साह नहीं है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी क्या कह रहे हैं, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह क्या कह रहे हैं, राज्य की ममता बनर्जी क्या कह रही हैं। उनके लिए उसका कोई मतलब नहीं है। ग्रामीणों ने इस बार मतदान का बहिष्कार करने का निर्णय किया था। इसकी घोषणा भी कर दी थी, लेकिन वोट डाले। जिला प्रशासन ने उन्हें आश्वासन दिया है। फिर भी गांव के लोगों को कोई उम्मीद नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि यह पहला मौका नहीं है जब जिला प्रशासन की ओर से उन्हें आश्वासन दिया गया हो।

मधुपुर ग्राम निवासी रमेश महतो ने बताया कि जन्म से ही वह गांव के हालात इसी तरह देख रहा है। आधी से अधिक उम्र बीत गई। स्कूल अधिक दूर होने के कारण छोटी उम्र के बच्चे पढऩे नहीं जाते। जो जाते भी हैं बरसात के मौसम में उन्हें स्कूल छोड़ देना पड़ता है। बीमार पडऩे पर इलाज के लिए पैदल 30 किलोमीटर दूर स्थित दूसरे प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में जाना पड़ता है। गर्भवती महिलाओं को और अधिक समस्या होती है। महिला लक्ष्मी महतो का कहना है कि गांव में शौचालय और सामूहिक स्नानघर की कोई व्यवस्था नहीं है। मजबूरी में महिलाओं को खुले में शौच एवं स्नान करना पड़ता है। न खेती का कोई साधन है और न ही रोजगार का कोई अवसर। मजबूरन लोग पैदल लम्बी दूरी तय कर शहर मजदूरी करने जाते हैं। रमेश और लक्ष्मी की तरह गोपाल महतो, झुम्पा महतो, सुखलाल महतो आदि ने भी इसी तरह की बातें कही।

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