Mamta Banerjee VS Governor Dhankhar: राज्यपाल ने क्यों कही बंगाल में अनुच्छेद 154 लागू करने पर विचार करने की बात

पश्चिम बंगाल में क्या सचमुच संविधान का पालन नहीं हो रहा है और यह खतरे में है। अगर यह सच है तो संविधान का पालन कौन नहीं कर रहा है और क्यों। राज्य में अगर संविधान का पालन हो रहा है तो राज्यपाल जगदीप धनखड़ और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच टकराव का वजह क्या है। क्यों राज्यपाल ने बंगाल में अनुच्छेद 154 लागू कर ममता बनर्जी के हाथ से राज्य प्रशासन का नियंत्रण छीन लेने पर विचार करने की बात कह रहे हैं।

By: Manoj Singh

Published: 30 Sep 2020, 04:03 PM IST

कहा, राज्य आतंकवादियों का स्वर्ग, कानून व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक
कोलकाता
पश्चिम बंगाल में क्या सचमुच संविधान का पालन नहीं हो रहा है और यह खतरे में है। अगर यह सच है तो संविधान का पालन कौन नहीं कर रहा है और क्यों। राज्य में अगर संविधान का पालन हो रहा है तो राज्यपाल जगदीप धनखड़ और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच टकराव का वजह क्या है। क्यों राज्यपाल ने बंगाल में अनुच्छेद 154 लागू कर ममता बनर्जी के हाथ से राज्य प्रशासन का नियंत्रण छीन लेने पर विचार करने की बात कह रहे हैं।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्यपाल जगदीप धनखड़ के बीच चल रहा टकराव उस समय चरम पर पहुंच गया, जब मुख्यमंत्री के नौ पन्नों के पत्र के जवाब में राज्यपाल ने चार पन्नों का पत्र लिखा। उसे ममता बनर्जी को भेजने के साथ ही संवाददाता सम्मेलन किया और सोशल मीडिया पर जारी कर दिया।
मुख्यमंत्री को भेजे गए अपने जवाबी पत्र में राज्यपाल ने बंगाल को आतंकियों के स्वर्ग और पुलिस शासित राज्य करार देते हुए संविधान के अनुच्छेद 154 के लागू करने पर विचार करने की धमकी दी है।
मुख्यमंत्री को चार पन्ने वाला पत्र भेजने से पहले राज्यपाल धनखड़ ने इस दिन राजभवन में एक घंटा 15 मिनट संवाददाता सम्मेलन कर सब कुछ बताने के साथ ही पत्र को ट्वीट कर सरेआम कर दिया। राज्यपाल ने संवाददाताओं से कहा कि तृणमूल कांग्रेस की सरकार ने राज्य को 'पुलिस शासित राज्य' में बदल दिया है। संविधान के अनुसार राज्य सरकार को उन्हें हर चीज की जानकारी देना अनिवार्य है, लेकिन राज्य सरकार राज्यपाल के पद की लंबे समय से अनदेखी कर रही है। बंगाल में संविधान की रक्षा नहीं हुई तो उन्हें कार्रवाई करनी होगी और राज्य में संविधान का अनुच्छेद 154 लागू करने पर विचार करना होगा। उल्लेखनीय है कि राज्य में संविधान का अनुच्छेद 154 लागू होने के बाद राज्य के कार्यकारी अधिकार राज्यपाल के अधीन आ जाएंगे और वे प्रत्यक्ष रूप से या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से उनका इस्तेमाल कर सकेंगे।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल पुलिस शासित राज्य बन गया है। पुलिस का शासन और लोकतंत्र साथ-साथ नहीं चल सकते। राज्य में कानून-व्यवस्था चरमरा गई है। माओवादी और उग्रवाद अपना सिर उठा रहें हैं। बंगाल से आतंकी मॉड्यूल भी गतिविधियां चला रहे हैं।
मुख्यमंत्री को भेजे गए जवाबी पत्र में राज्यपाल धनखड़ ने गैरजिम्मेदाराना रुख अख्तियार करने पर राज्य के पुलिस महानिदेशक वीरेंद्र की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि पुलिस अधिकारी सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की तरह काम कर रहे हैं। उन्होंने डीजीपी को दो पत्र भेजे कर राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था, हत्या के मामले को लेकर कानून का शासन में पुलिस की भूमिका के बारे में जानना चाहता था और लिखा था कि पुलिस एक राजनीतिक कार्यकर्ता की तरह काम कर रही है। लेकिन वे डीजीपी के जवाब से वे आश्चर्यचकित हैं। डीजीपी ने जवाब में लिखा है कि संविधान प्रधान इतने घमंडी कैसे हैं। डीजीपी के दिए गए जवाब सहमत योग्य नहीं है। वे बहुत ही उदासीन हैं।
राज्यपाल ने डीजीपी वीरेंद्र को इस महीने की शुरुआत में पत्र लिखकर राज्य की कानून व्यवस्था की स्थिति पर चिंता व्यक्त की थी। डीजीपी के दो पंक्ति के जवाब के बाद राज्यपाल ने उन्हें 26 सितंबर को उनसे मिलने को कहा। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 26 सितंबर को राज्यपाल को पत्र लिखकर उनसे संविधान में निर्देशित कार्यक्षेत्र में रहते हुए काम करने का आग्रह किया था।
राज्यपाल ने इस दिन राजभवन के खर्चें में कटौटी के मुद्दे को भी उठाते हुए राज्य सरकार की ओर से खुद की गतिविधियों पर निगरानी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस सरकार की ओर से उन पर इलेक्ट्रॉनिक निगरानी किए जाने की वजह से उन्हें वॉट्सएप वीडियो कॉल करने को मजबूर होना पड़ रहा है।

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Manoj Singh Reporting
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