scriptWhy is the only school in the village of scheduled castes is going to | अनुसूचित जाति व अल्पसंख्यकों के गांव का एक मात्र स्कूल क्यों हो रहा बंद, जाने | Patrika News

अनुसूचित जाति व अल्पसंख्यकों के गांव का एक मात्र स्कूल क्यों हो रहा बंद, जाने

अनुसूचित जाति व अल्पसंख्यकों के गांव का एक मात्र स्कूल क्यों हो रहा बंद, जाने

-शिक्षकों और बुनियादी सुविधाओं का आभाव प्रमुख कारण

कोलकाता

Published: December 25, 2021 03:31:03 pm

kolkata, hoghly . शिक्षकों की कमी की वजह से हुगली जिले के खानाकुल स्थित रंजीतवाटी जूनियर हाई स्कूल बंद होने के कगार पर है। इस स्कूल में अब सिर्फ10 ही विधार्थी बचे हैं। उनके लिए एक ही अतिथि शिक्षक है। लंबे समय से स्कूल में कोई प्रधानाध्यापक नहीं है। इस कारण विद्यालय के विभिन्न कार्य शेष रह गए हैं। स्कूल में बुनियादी ढांचे में भी भारी कमी है। एक समय में इस स्कूल के शुभारंभ के लिए ग्रामीणों ने लड़ाई लड़ी थी। अब अभिभावक अपने बच्चों को इस स्कूल में नहीं भेजना चाहते हैं। उनकी शिकायत है की कि यदि शिक्षकों की भर्ती नहीं की गई तो खानाकुल का रंजीतबाटी जूनियर हाई स्कूल जल्द ही बंद हो जायेगा। स्थानीय सूत्रों के अनुसार अनुसूचित जाति व अल्पसंख्यकों के गांव रंजीतबाटी में आठवीं कक्षा तक के उच्च प्राथमिक विद्यालय की मांग काफी पुरानी है। चूंकि इस गांव में ज्यादा स्कूल नहीं है। इससे पहले गांव के छात्रों को जयरामपुर हाई स्कूल तक पांच किलोमीटर पैदल चलकर जाना पड़ता था। बाढ़ प्रभावित गांवों के बीच मुंडेश्वरी की सहायक 'काना नदी' ने मानसून के दौरान उग्र रूप धारण किया था।
अनुसूचित जाति व अल्पसंख्यकों के गांव का एक मात्र स्कूल क्यों हो रहा बंद, जाने
अनुसूचित जाति व अल्पसंख्यकों के गांव का एक मात्र स्कूल क्यों हो रहा बंद, जाने
2011 में मिली स्कूल को स्वीकृति

ग्रामीणों ने मांग की कि बच्चों की सुरक्षा के लिए गांव में कम से कम आठवीं कक्षा तक स्कूल होना चाहिए। वर्ष 2011 में रंजीतवाटी जूनियर हाई स्कूल को स्वीकृति मिली। जनवरी 2012 से विद्यालय में पाठ्यक्रम शुरू हुआ। स्कूल सूत्रों के अनुसार स्कूल के प्रारंभ में चार सेवानिवृत्त अतिथि शिक्षकों की भर्ती की गई थी। प्रथम वर्ष में छात्रों की संख्या लगभग 100 है। बाद में छात्रों की संख्या बढक़र 160 हो गई। लेकिन दिसंबर 2016 में चार अतिथि शिक्षकों में से तीन 65 वर्ष की आयु तक पहुंच चुके थे और उनकी अवधि समाप्त हो गई है। शेष एक अतिथि शिक्षक और दो स्वयंसेवी शिक्षकों के जरिये स्कूल किसी तरह चलाया जाता था। 2016 में उस अतिथि शिक्षक की मृत्यु के बाद, स्कूल बदहाली की ओर बढऩे लगा। खानाकुल के कांतापुकुर प्राथमिक विद्यालय के सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक मदन मोहन घांटी 2020 से अतिथि शिक्षक हैं। इस विद्यालय में सिर्फ शिक्षक की ही समस्या नहीं।
शिक्षकों के बैठने की जगह नहीं

स्कूल में इंफ्रास्ट्रक्चर का भी अभाव है। दो मंजिला इमारत की पहली मंजिल पर केवल तीन क्लासरूम हैं। शिक्षकों के बैठने की जगह नहीं है। छात्राओं के लिए मात्र एक शौचालय। छात्रों और शिक्षकों के लिए अलग-अलग शौचालय नहीं हैं। कोई पुस्तकालय या कंप्यूटर सीखने की व्यवस्था नहीं है। इन समस्याओं को लेकर सम्बंधित विभागों में अभिभावकों ने शिकायत की। लेकिन कोई लाभ नहीं मिला। शिक्षकों की कमी के चलते अब स्कूल बंद होने के कगार पर हंै। स्कूल के विकास के लिए आंदोलन कर रहे ग्रामीण भी अपने बच्चों का नामांकन जयरामपुर में करा रहे हैं।'
शिकायत के बाद भी नहीं हुआ समाधान

स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष काशीनाथ मंडल ने शिकायत की, "शिक्षकों की भर्ती सहित स्कूल के समग्र बुनियादी ढांचे के विकास के लिए लंबे आवेदन के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ है। अभी तक 3 लाख रुपए का ही अनुदान मिला है। शिक्षा के प्रति सरकार की उदासीनता बनी हुई है।

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