धांधली करने वाली मिलों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं

धांधली करने वाली मिलों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं
kolkata news

Shankar Sharma | Publish: Oct, 19 2016 11:57:00 PM (IST) Kolkata, West Bengal, India

जूट के बोरे में धांधली के मामले में पश्चिम बंगाल की 11 जूट मिलों पर जल्द ही गाज गिरेगी। ये मिलें वर्ष 2011 से ही केंद्रीय उद्योग व वाणिज्य मंत्रालय के निशाने पर हैं

कोलकाता.जूट के बोरे में धांधली के मामले में पश्चिम बंगाल की 11 जूट मिलों पर जल्द ही गाज गिरेगी। ये मिलें वर्ष 2011 से ही केंद्रीय उद्योग व वाणिज्य मंत्रालय के निशाने पर हैं।  मंत्रालय के गुणवत्ता गारंटी विभाग (क्वालिटी एश्योरेंस विंग) ने निदेशक आपूर्ति व निपटान (डीजीएसएंडडी) को कई बार इन मिलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को कहा, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इसे लेकर वाणिज्य मंत्रालय डीजीएसएंडडी पर भड़का हुआ है।

मंत्रालय ने अधिकारियों को उक्त मिलों के खिलाफ यथाशीघ्र कार्रवाई करने का लिखित आदेश दिया है। मंत्रालय सूत्रों के अनुसार जनवरी 2011 से ही डीजीएसएंडडी को उक्त मिलों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई करने को कहा जा रहा है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इस बार मंत्रालय ने डीजीएसएंडडी को कड़े शब्दों में पत्र लिख कर मामले पर पूरी रिपोर्ट तलब की है।

सूत्रों ने बताया कि जूट के बोरे के सबसे बड़े खरीदार पंजाब खाद्य आपूर्ति विभाग ने उक्त जूट मिलों के खिलाफ घटिया किस्म के पुराने और कम वजन वाले जूट के बोरे सप्लाई करने की शिकायत की थी। शिकायत के आधार पर ही मंत्रालय ने डीजीएसएंडडी को मिलों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई करने को कहा था। केंद्र सरकार के लिए बोरे खरीदने का काम डीजीएसएंडडी ही करता है।


सूत्रों ने बताया कि पश्चिम बंगाल के अलावा ओडिसा, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ की जूट मिलों ने भारतीय खाद्य निगम ओडिसा और ओडिसा खाद्य आपूर्ति विभाग को ऐसे बोरों की सप्लाई की गई जो घटिया, साइज में छोटे और कम वजन के पाए गए। इसकी शिकायत जूट आयुक्त कार्यालय से की गई है। जूट पैकेजिंग मैटेरियल (जेपीएम) एक्ट-1987 के अंतर्गत जूट मिलों के खिलाफ कठोर कार्रवार्ई करने का अधिकार जूट आयुक्त को दिए गए हैं। वर्ष 2011 से लम्बित मामलों में प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होना कई तरह की आशंका पैदा कर रहा है।

ऐसे की जा रही है धांधली-
- सरकार को पुराने व घटिया किस्म के बोरे की सप्लाई
- मिलों में बोरे तैयार नहीं कर निजी राइस मिलों तथा खुले बाजार से सस्ते में बोरे खरीद सरकार को अधिक भाव में बेचना
- आयातित टाट से बोरे तैयार कर सरकार को सप्लाई करना
- निर्धारित वजन से कम का बोरा तैयार करना
- पंजाब व हरियाणा के बारदाना मार्केट से बोरे खरीद कर अपने मिलों का मुहर लगा कर सरकार को भेजना
- साजिश के तहत बोरों की गुणवत्ता जांच करने वाली मशीन में तकनीकी गड़बड़ी कर बोरों की मजबूती को क्लीन चिट देना
यह है जेपीएम एक्ट -
जेपीएम एक्ट-1987 के अनुसार जूट के बोरों के गबन, गैर आपूर्ति, बोरों की आपूर्ति में चूक, इस्तेमाल किए अथवा पुराने बोरे, कम वजन के बोरे, आयातित टाट के बोरे, आयातित टाट या आयातित जूट के सुतली या कपड़े से बने जूट के बोरे तैयार करना तथा उत्पादन नियंत्रण आदेश के तहत विशिष्टताओं या गैर बीआईएस मानकों के अनुरूप बोरों की सप्लाई करना जुर्म है।

जूट आयुक्त को है कार्रवाई का अधिकार-
इस तरह की धांधली की शिकायत मिलने पर जूट आयुक्त स्वत: संज्ञान लेते हुए बोरे खरीद एजेंसी या आपूर्ति एवं निपटान (डीजी एस एंड डी)  की शिकायत पर जूट मिलों को बोरे की आपूर्ति करने पर रोक लगाने का आदेश जारी करने का अधिकार है। आयुक्त को इस तरह की धांधली करने वाली मिलों के प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी करने का अधिकार है।


ये जूट मिल निशाने पर
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