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लोकतंत्र के उत्सव में इतनी मौतें क्यों : शुभप्रसन्ना

locationकोलकाताPublished: Jul 10, 2023 11:11:41 pm

Submitted by:

Krishna Das Parth

पंचायत चुनाव की मतगणना से पहले सोमवार शाम को तृणमूल के करीबी माने जाने वाले कलाकार (पेंटर) शुभप्रसन्ना ने कहा कि लोकतंत्र के उत्सव में इतनी मौतें क्यों। देश में कहीं भी चुनाव में ऐसी हिंसा नहीं होती। उन्होंने यह बयान देकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।

लोकतंत्र के उत्सव में इतनी मौतें क्यों : शुभप्रसन्ना
लोकतंत्र के उत्सव में इतनी मौतें क्यों : शुभप्रसन्ना
कोलकाता . पंचायत चुनाव की मतगणना से पहले सोमवार शाम को तृणमूल के करीबी माने जाने वाले कलाकार (पेंटर) शुभप्रसन्ना ने कहा कि लोकतंत्र के उत्सव में इतनी मौतें क्यों। देश में कहीं भी चुनाव में ऐसी हिंसा नहीं होती। उन्होंने यह बयान देकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने फिर से सडक़ पर उतरने की भी बात कही।
उन्होंने कहा, बंगाल की इस संस्कृति को बदलने की जरूरत है। समय आ गया है कि स्वतंत्र विचारधारा वाले और बुद्धिमान लोग एक साथ पटरी पर वापस आएं। यह बंगाली ज्ञानियों की पीठ है। हम सभी से अपील कर सकते हैं। जैसे मैंने पहले वाममोर्चा को हटाने के लिए मार्च किया था, मैं फिर से मार्च करूंगा।
हाल ही में जब राज्य सरकार ने 'द केरल स्टोरी' पर प्रतिबंध लगा दिया तो उन्होंने इसका विरोध किया था। तृणमूल ने असहज महसूस करते हुए कहा कि वह इसका समर्थन नहीं करती। तृणमूल के प्रदेश महासचिव व प्रवक्ता कुणाल घोष ने सोमवार को शुभप्रसन्न के कमेंट के बाद जवाब दिया। उन्होंने कहा, ''कभी-कभी उन्हें खुजली होती है। उन पर मरहम लगाने की जरूरत है।'' इसके अलावा कुणाल ने टिप्पणी की कि 61,000 से ज्यादा बूथों पर स्वतंत्र और शांतिपूर्ण मतदान हुआ, ये बात उनको भी पता होनी चाहिए।'
शुभप्रसन्ना की तरह दमदम के तृणमूल सांसद सौगत रॉय, डेबरा विधायक हुमायूं कबीर और बारासात विधायक चिरंजीत के भी स्वर सुनाई दिए। जैसा कि पार्टी के वरिष्ठ सांसद सौगत ने कहा, ''केंद्रीय बल कुछ हद तक तटस्थ है।'' इसके अलावा, हुमायूं के शब्दों में, ''ऐसा वोट देखकर किसी का भी सिर घूम जाता है।''
पंचायत चुनाव के दौरान राज्य में अब तक 41 लोगों की मौत हो चुकी है। मतदान के दिन हुई झड़पों में अब तक मरने वालों की संख्या 18 हो गई है। शुभप्रसन्ना को इस स्थिति पर अफसोस है। उन्होंने मीडिया से कहा, ''भारत के किसी अन्य राज्य में ऐसा नहीं होता है। फिर बंगाल में क्यों? राममोहन, विद्यासागर, रवीन्द्रनाथ, विवेकानन्द, सुभाष बोस का जन्म बंगाल में हुआ। उस बंगाल को कुछ लोगों की असंस्कृत हरकतों से इस तरह क्यों रौंदा जा रहा है? अब जनता से यह कहने का समय आ गया है कि हमें अपनी संस्कृति को बदलने की जरूरत है।" यहीं नहीं रुकते हुए कलाकार ने कहा, '2008 याद है?' क्या स्थिति बदल गई है? हम परिवर्तन चाहते हैं, संस्कृति परिवर्तन। सब मिलकर सब कुछ कर रहे हैं। लोगों पर जुल्म हो रहा है, खून-खराबा हो रहा है।
सत्तारूढ़ दल ने शुरू से ही राज्य में पंचायत चुनाव के आतंक को एक अलग घटना के रूप में पेश करने की कोशिश की है। ऐसे में सोमवार को 'तृणमूलपंथी' शुभप्रसन्न का भाषण निस्संदेह सत्तारूढ़ खेमे के लिए असहज करने वाला है। यह सच है कि सिंगुर, नंदीग्राम प्रकरण में शुभप्रसन्ना कई अन्य प्रमुख लोगों के साथ सीपीएम के खिलाफ सडक़ पर उतरे थे। 'परिवर्तन' के लिए मार्च निकाला था। क्या वह फिर से बदलाव का आह्वान कर तृणमूल को सत्ता से हटाना चाहते हैं? उन्होंने उस सवाल का जवाब नहीं दिया।
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