पश्चिम बंगाल बाबा लोकनाथ मंदिर में क्यों मची थी भगदड़? जाने विस्तार से...

पश्चिम बंगाल बाबा लोकनाथ मंदिर में क्यों मची थी भगदड़? जाने विस्तार से...
पश्चिम बंगाल: जन्माष्टमी के मौके पर मंदिर में भगदड़, 4 लोगों की मौत, 27 घायल,पश्चिम बंगाल: जन्माष्टमी के मौके पर मंदिर में भगदड़, 4 लोगों की मौत, 27 घायल,पश्चिम बंगाल: जन्माष्टमी के मौके पर मंदिर में भगदड़, 4 लोगों की मौत, 27 घायल

Ashutosh Kumar Singh | Updated: 25 Aug 2019, 11:19:23 PM (IST) Kolkata, Kolkata, West Bengal, India

  • भगदड़ में 6 श्रद्धालुओं की जान चली गई और 30 से अधिक श्रद्धालु जख्मी हो गए थे।

कोलकाता

कोलकाता से लगभग 50 किलोमीटर दूर उत्तर 24 परगना जिले के कचुआ धाम बाबा लोकनाथ मंदिर की पहचान भक्तों के कष्टों के निवारण स्थान के रूप में है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि बाबा लोकनाथ के दर्शन और पूजन से गंभीर से गंभीर बीमारियों से मुक्ति मिल जाती है। सभी तरह के संकट दूर हो जाते हैं। भाद्र मास की अष्टमी के दिन बाबा लोकनाथ के पूजन का विशेष महत्व है। इस दिन पूजन से सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसी मान्यता को लेकर इस साल भाद्र मास की अष्टमी को भक्तों का हुजूम कचुआ धाम पहुंचा था, लेकिन अचानक हुए हादसे के बाद मची भगदड़ में 6 श्रद्धालुओं की जान चली गई और 30 से अधिक श्रद्धालु जख्मी हो गए।
हादसे के बाद शनिवार को स्थानीय लोगों के चेहरे पर उदासी छाई नजर आई। मौके पर कुछ जूते-चप्पल और फूल बिखरे नजर आए। स्थानीय लोग इस मार्मिक हादसे के लिए सरासर पुलिस व्यवस्था को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। रिमझिम मंडल नामक महिला ने दावा किया कि इस साल श्रद्धालुओं की भीड़ अन्य सालों की तुलना में अधिक थी और भीड़ नियंत्रण की पुलिस व्यवस्था बेहद कमजोर थी। मुख्य सडक़ से लगभग 100 मीटर दूर मंदिर है। मुख्य सडक़ से 26 बीघा जमीन में फैले लोकनाथ मंदिर जाने वाली सडक़ की चौड़ाई ७-८ फीट है। एक तरफ चारदीवारी और दूसरी तरफ तालाब के बीच के संकरी सडक़ मार्ग से श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं। अष्टमी की रात तालाब के किनारे बड़ी संख्या में अस्थाई दुकानें लगी थी। शुक्रवार तडक़े 3:00 बजे से श्रद्धालुओं के लिए मंदिर का द्वार खोला जाना तय था। तब तक भक्तों की भारी भीड़ वहां इक_ा हो गई थी। पुलिस मुख्य द्वार पर लगे बैरिकेड से अधिक संख्या में श्रद्धालुओं को छोड़ रही थी। पहले दर्शन की होड़ में श्रद्धालुओं में धक्का-मुक्की शुरू हो गई। अधिक दबाव के कारण चारदीवारी का एक हिस्सा टूट गया। भगदड़ सी मच गई। भीड़ का दबाव तालाब की ओर बनी अस्थाई दुकानों पर बढ़ा। दुकानें टूट गईं। कुछ श्रद्धालु तालाब में भी गिर पड़े।

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वीवीआईपी की सेवा में पुलिस

मंदिर परिसर में अस्थाई दुकान लगाने वाले सनातन मंडल ने पत्रिका को बताया कि शुक्रवार तडक़े हुए हादसे के लिए सरासर पुलिस जिम्मेदार है। पुलिस भीड़ को ठीक ढंग से नियंत्रण नहीं कर पाई। पुलिस की लापरवाही से कचुआ धाम की महिमा पर दाग लग गया। कच्चा नारियल विक्रेता बापी मंडल ने भी घटना के लिए पुलिस वालों को जिम्मेदार ठहराया। बापी ने बताया कि पुलिस भीड़ नियंत्रण से अधिक वीवीआईपी की सेवा में लगी थी।

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महज हादसा-प्रबंधन कमेटी

हालांकि मंदिर प्रबंधन कमेटी हादसे के लिए पुलिस को जिम्मेदार नहीं मान रही। कमेटी हादसे को दुर्घटना मान रही है। कमेटी के अध्यक्ष विष्णुपद राय चौधरी ने पत्रिका को बताया कि भीड़ नियंत्रण के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मी थे। भीड़ अधिक थी और बारिश शुरू हो गई। श्रद्धालुओं में मंदिर पहले पहुंचने की होड़ मच गई और हादसा हो गया।

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माना मंदिर मार्ग की चौड़ाई कम

उन्होंने स्वीकार किया कि मुख्य सडक़ से मंदिर जाने वाले मार्ग की चौड़ाई कम है। उन्होंने कहा कि प्रबंधन ने कई बार इस दिशा में प्रयास किया, लेकिन तालाब के मालिक ने सडक़ को चौड़ा नहीं करने दिया। हादसे के बाद सरकार आगे आई है। उम्मीद है कि अब सब कुछ ठीक हो जाएगा। चौधरी ने कहा कि हादसे को लेकर प्रबंधन दुखित है। मृतकों के आश्रितों के प्रति संवेदना है। प्रबंधन की ओर से मृतकों के आश्रितों को यथा शक्ति मुआवजा दिया गया है। प्रबंधन हमेशा उनकी मदद के लिए तैयार रहेगा। उन्हें जब भी कोई जरूरत पड़ेगी, प्रबंधन की ओर से यथा संभव मदद की जाएगी।

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