पर्यावरण संरक्षण का संदेश देगा पर्यावरण दिवस

पर्यावरण संरक्षण का संदेश देगा पर्यावरण दिवस

Shishir Sharan Rahi | Updated: 04 Jun 2019, 10:18:53 PM (IST) Kolkata, Kolkata, West Bengal, India

विश्व पर्यावरण दिवस आज---इस साल की थीम--बीट एयर पॉल्यूशन---महानगर में होंगे विविध आयोजन

कोलकाता. विश्व पर्यावरण दिवस पर बुधवारको महानगर सहित प्रदेश के विभिन्न स्थानों में सरकारी-गैर सरकारी संस्थानों के साथ विभिन्न शैक्षिक संगठनों की ओर से पर्यावरण संरक्षण को लेकर कई आयोजन होंगे। धरती पर लगातार बेकाबू होते जा रहे प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग जैसे कारणों के कारण विश्व पर्यावरण दिवस की शुरुआत हुई थी। हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का मुख्य मकसद प्रकृति और मानव जाति के बीच तालमेल कायम रखना था। पर्यावरण के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए हर साल ५ जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। हर साल एक नई थीम के साथ विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। इस साल पर्यावरण दिवस के आयोजन की थीम है--बीट एयर पॉल्यूशन। पर्यावरण 2 शब्दों परि और आवरण से मिलकर बना है, जिसमें परि का मतलब है हमारे आसपास जो हमारे चारों ओर है। और आवरण का मतलब जो हमें चारों ओर से घेरे हुए है। पर्यावरण उन सभी भौतिक, रासायनिक-जैविक कारकों की इकाई है जो किसी जीवधारी अथवा पारितंत्रीय आबादी को प्रभावित करते हैं तथा उनके रूप, जीवन और जीविता को तय करते हैं। संयुक्त राष्ट्र की ओर से घोषित यह दिवस पर्यावरण के प्रति वैश्विक स्तर पर राजनैतिक और सामाजिक जागृति लाने के लिए मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 1972 में 5 जून से 16 जून तक संयुक्त राष्ट्र महासभा आयोजित विश्व पर्यावरण सम्मेलन से हुई।

पहला विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून 1973 को मनाया गया।

विश्व पर्यावरण दिवस मनाने के पीछे प्रकृति और पर्यावरण के बीच वृहद मनुष्य समाज के संबंध हैं। इनमें प्रकृति के प्रति चिंता और उसके सरंक्षण की भावना निहित है। विश्व में लगातार बढ़ते प्रदूषण और बढ़ती ग्लोबल-वार्मिंग की चिंताओं के चलते पर्यावरण दिवस की शुरुआत की गई। पर्यावरण प्रदूषण की समस्या पर 1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से वैश्विक स्तरपर पर्यावरण की चिंता करते हुए विश्व पर्यावरण दिवस मनाने की नींव रखी गई। इसकी शुरुआत स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में हुई। यहां दुनिया में पहली बार पर्यावरण सम्मेलन आयोजित हुआ, जिसमें इसमें 119 देशों ने हिस्सेदारी ली। यहीं पर पहली बार एक ही पृथ्वी का सिद्धांत दिया गया। इसी सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम नींव रखी गई। यहीं से हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाए जाने का संकल्प लिया गया। इसके बाद हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाए जाने की शुरुआत हुई। भारत में १९ नवंबर, १९८६ से पर्यावरण संरक्षण अधिनियम लागू हुआ। पहले पर्यावरण दिवस पर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भारत की प्रकृति और पर्यावरण के प्रति चिंताओं को जाहिर किया था। उन्होंने वहां पर्यावरण की बिगड़ती स्थिति एवं उसका विश्व के भविष्य पर प्रभाव' विषय पर व्याख्यान देते हुए प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण को लेकर भारत की दृष्टि और प्रतिबद्धता पर अपने विचार रखे थे।

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