Youth disable motivates disableds to become entrepreneurs to give jobs to others

आम तौर पर physical handicap जीवन जीने के लिए सरकार से नौकरी में reservation और आर्थिक मदद की मांग और उम्मीद करते है। लेकिन शारीरिक तौर से लाचार एक youth physical handicap पहले जीवन से संघर्ष कर स्वालंबी बना और लोगों को नौकरियां दी। अब उसने दूसरों का सहारा बनने और job देने योग्य बनने के लिए देश भर के दिव्यांगों को प्रेरित करने का बीड़ा उठाया है।

संगठन बना कर देश भर के दिव्यांगों को कर रहा है संगठित
मनोज कुमार सिंह
कोलकाता
आम तौर पर दिव्यांग जीवन जीने के लिए सरकार से नौकरी में आरक्षण और आर्थिक मदद की मांग और उम्मीद करते है। लेकिन शारीरिक तौर से लाचार एक युवा दिव्यांग पहले जीवन से संघर्ष कर स्वालंबी बना और लोगों को नौकरियां दी। अब उसने दूसरों का सहारा बनने और नौकरी देने योग्य बनने के लिए देश भर के दिव्यांगों को प्रेरित करने और उन्हें एक बैनर तले संगठित करने का बीड़ा उठाया है। वह युवा दिव्यांग कोई और नहीं, कोलकाता का 27 साल के सुमित अग्रवाल है।
सुमित अग्रवाल पत्रिका को बताते हैं कि वे देखे कि देश, समाज और तकनीक बढ़ रही है। लेकिन हम दिव्यांग पिछड़े हुए है। हम दिव्यांगो के बारे में कहा जाता है कि हम समाज से सिर्फ ले सकते, कुछ दे नहीं सकते। लेकिन हम लोगों की इस धारणा को तोडऩे और यह साबित करने के लिए फोरम बनाया है कि आरक्षण लेने के बजाय दिव्यांग भी समाज को कुछ दे सकते हैं। वह भी व्यवसायी और उद्यमी बन सकता है और लोगों को नौकरी दे सकता है। सुमित दिव्यांगों को ले कर बड़ी-बड़ी कंपनियों के साथ कार्यशाला करेंगे और कंपनियों को योग्य और उद्यमी दिव्यामगों को नौकरी पर रखने के लिए राजी करेंगे
लेकिन सुमित अग्रवाल के लिए यहां तक पहुंचना आसान नहीं रहा। उनका जीवन कठिनाइयों और संघर्षमय भरे जीवन जीने वाले रहा है। उनका जन्म सात महीनें में हो गया और वे सेरेब्रल पाल्सी के शिकार हो गए। होश संभालते ही जीवन से संघर्ष कर थोड़ा बड़े हुए तो दिव्यांगता उनके जीवन में बाधा बन कर खड़ी हो गई। वे खुद से खड़ा नहीं हो पाते और न ही चलने-फिरने सकते।
लेकिन दो लोगों के सहयोग चलने वाले सुमित अग्रवाल ने हार नहीं मानी और दिव्यांगता की बेडिय़ों को काट कर स्कूल-कॉलेज की पढाई पूरी कर वर्ष 2016 में हैदराबाद के इसीएफएआई (एक्फाई) विश्वविद्यालय के कोलकाता कैम्पस से एमबीए और 2019 में जादवपुर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता व जनसंपर्क की डिग्री ली और जनसंपर्क कंपनी खोल कर उद्यमी बन गए । उन्होंने लोगों को नौकरियां दी।
अब वे दूसरों को नौकरी देने के लिए देश भर के दिव्यांगों को नौकरी देने योग्य बनने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उन्हें संगठित कर रहे हैं। उन्होंने कुछ लोगों के साथ मिल कर इंडियन डीसएबल एंटरप्रेनर फोरम बनाया है। वे देश भर के दिव्यांगों को इससे ऑन लाइन जोड़ रहे हैं और उन्हें अपनी और विपरित परिस्थितियों में संघर्ष कर आगे बढऩे की कहानी बता रहे है।

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Manoj Singh Reporting
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