कोरोना के कारण आए आर्थिक संकट से जूझ रहे है चिड़ियाघर के जानवर, नहीं है कोई भी गोद लेने वाला

पशु के प्रति प्रेम दिखाने तथा उनकी रखरखाव का जिम्मा सहज में उठा लेने वाले कोरोना के कारण जानवरों को गोद लेने के लिए इच्छुक नहीं है।

By: Vanita Jharkhandi

Published: 24 Mar 2021, 06:16 PM IST


कोलकाता
पशु के प्रति प्रेम दिखाने तथा उनकी रखरखाव का जिम्मा सहज में उठा लेने वाले कोरोना के कारण जानवरों को गोद लेने के लिए इच्छुक नहीं है। दूसरी ओर चिड़ियाघर में रहने वाले सभी के लिए भोजन की व्यवस्था भी कठिनाई हो रही है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार सारे पशुओं के लिए अलग-अलग डाइट है ऐसे में उनको गोद लेने से यह भार थोड़ा हल्का हो जाता है। पहले लोगों में उत्साह था और बाघ से लेकर जिराफा, चिम्पांजी आदि को गोद लेने वालों की संख्या अच्छी थी। कोरोना काल के बाद लोगों में इन जानवरों को गोद लेने को राजी नहीं है। ऐसे में मात्र तीन ही जानवरों को गोद लिया गया है। टिकट बेचकर आने वाली आय से चिड़ियाघर की लागत अधिक है। उनका भोजन मंहगाई के कारण अलीपुर प्राधिकरण इस बड़ी राशि की लागत को वहन करने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। इसलिए चिड़ियाघर के अधिकारियों ने जानवरों को गोद लेने का फैसला लिया था। इस मामले में, गोद लिए गए जानवर के संरक्षक भोजन और चिकित्सा सहित आकस्मिक खर्चों का एक हिस्सा वहन करने से थोड़ी राहत होती है। गोद लेने की पहल के बाद चिड़ियाघर के अधिकारियों को शुरू में अच्छी प्रतिक्रिया मिली थी। अलीपुर चिड़ियाघर के बाघ और शेर को विदेशों से भी अपनाया गया था। लेकिन लॉकडाउन के बाद, तस्वीर बदल गई है। चिड़ियाघर के जानवरों को उस तरह से अपनाने के लिए कोई आगे नहीं आ रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में केवल तीन जानवरों को अपनाया गया है। दो चिंपांजी और एक जिराफ। चिंपांजी बाबू को अभिनेत्री सोहिनी सेनगुप्ता और सप्तर्षि मौलिक ने दत्तक लिया है। अलीपुर चिड़ियाघर में एक शिक्षिका रूपा ब्रह्मचारी ने बताया कि पहले कई जानवरों को अपनाया गया था। तालाबंदी के बाद से कोई भी उस तरीके को अपनाने के लिए आगे नहीं आया है। इस वित्तीय वर्ष में एक जिराफ और दो चिंपांजी ही दत्तक लिए गए है।

Vanita Jharkhandi Reporting
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